वित्त वर्ष 2024-25 में औद्योगिक उत्पादन 7.81% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग रोज़गार में 7.19% की वृद्धि: ASI आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पंजीकृत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 2024-25 में मज़बूत प्रदर्शन दर्ज किया है — औद्योगिक उत्पादन में सालाना आधार पर 7.81 प्रतिशत की वृद्धि हुई और रोज़गार में 7.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 30 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार द्वारा जारी 'उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण' (ASI) के आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।
मुख्य आंकड़े: प्रतिष्ठान और रोज़गार
ASI के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पंजीकृत मैन्युफैक्चरिंग प्रतिष्ठानों की कुल संख्या बढ़कर 2.67 लाख हो गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 2.60 लाख थी। राज्यवार देखें तो तमिलनाडु 41,221 प्रतिष्ठानों के साथ पहले स्थान पर रहा, इसके बाद गुजरात (33,084) और महाराष्ट्र (27,379) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
रोज़गार के मोर्चे पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा शीर्ष पाँच राज्य रहे। इन पाँच राज्यों की देश के कुल मैन्युफैक्चरिंग रोज़गार में हिस्सेदारी 56 प्रतिशत से अधिक रही।
शीर्ष उद्योगों का जीवीए में योगदान
आंकड़ों के अनुसार, पाँच प्रमुख उद्योगों — बेसिक मेटल्स, मोटर गाड़ियाँ, केमिकल और केमिकल प्रोडक्ट्स, फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स और फूड प्रोडक्ट्स — ने मिलकर वित्त वर्ष 2024-25 में देश के कुल मैन्युफैक्चरिंग सकल मूल्य वर्धित (GVA) में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया।
गौरतलब है कि ये पाँचों उद्योग परंपरागत रूप से भारतीय औद्योगिक ढाँचे की रीढ़ रहे हैं और इनका एकाग्र योगदान दर्शाता है कि विकास अभी भी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में केंद्रित है।
वेतन और पूंजी संकेतकों में सुधार
सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कर्मचारियों को दी जाने वाली कुल आय — जिसमें वेतन, भत्ते और अन्य लाभ शामिल हैं — में वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 12.08 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निवेशित पूंजी, इनपुट, आउटपुट और GVA सहित अधिकांश प्रमुख आर्थिक संकेतकों में भी पिछले वर्ष की तुलना में सुधार दर्ज किया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पुनर्संरेखण और 'चाइना प्लस वन' रणनीति के तहत भारत में विनिर्माण निवेश की संभावनाएँ बढ़ी हैं।
ASI सर्वेक्षण की भूमिका और महत्व
उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) पंजीकृत मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों में आउटपुट, वैल्यू एडेड, रोज़गार और पूंजी निर्माण जैसे मानकों पर व्यापक डेटा एकत्र करता है। यह डेटा नीति-निर्माण, राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों की तैयारी और विभिन्न मंत्रालयों की सूचना संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।
आगे देखें तो विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों की स्थिरता भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं के लिए एक सकारात्मक आधार है, हालाँकि GDP में विनिर्माण की हिस्सेदारी को वांछित स्तर तक ले जाने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता बनी रहेगी।