फिक्की सर्वेक्षण: वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 93% उत्तरदाताओं ने दर्ज की मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि, ₹8 लाख करोड़ का कारोबार शामिल
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के ताज़े सर्वेक्षण के अनुसार, बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर मजबूत बनी रही। नई दिल्ली से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि 93 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उत्पादन में वृद्धि या समान स्तर दर्ज किया, जो तीसरी तिमाही के 91 प्रतिशत से अधिक है। सर्वेक्षण में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के वार्षिक कारोबार वाली बड़ी और लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) इकाइयाँ शामिल हैं।
सर्वेक्षण का दायरा और पद्धति
यह फिक्की का 69वाँ मैन्युफैक्चरिंग सर्वेक्षण है, जिसमें आठ प्रमुख क्षेत्रों — ऑटोमोटिव और ऑटो कंपोनेंट्स, पूंजीगत सामान, रसायन-उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल, मशीन टूल्स, धातु और धातु उत्पाद, वस्त्र-परिधान और तकनीकी वस्त्र तथा विविध क्षेत्र — की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं। इसमें बड़े उद्यमों के साथ-साथ एसएमई दोनों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिससे यह सर्वेक्षण व्यापक उद्योग परिदृश्य को दर्शाता है।
घरेलू माँग और निर्यात में सुधार
घरेलू माँग के मोर्चे पर भी सकारात्मकता स्पष्ट रही। 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने चौथी तिमाही में ऑर्डर में वृद्धि या समान स्तर की उम्मीद जताई। निर्यात के संदर्भ में, 80 प्रतिशत कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 में निर्यात वृद्धि या स्थिर स्तर की रिपोर्ट की, जबकि पिछली तिमाही में यह आँकड़ा 74 प्रतिशत था। रोज़गार के मोर्चे पर, 41 प्रतिशत कंपनियाँ वित्त वर्ष 26 में अतिरिक्त नियुक्तियाँ करने की योजना बना रही हैं, जो पिछली तिमाही के 38 प्रतिशत से अधिक है।
क्षमता उपयोग: क्षेत्रवार स्थिति
सर्वेक्षण के अनुसार, इस तिमाही में समग्र क्षमता उपयोग मामूली गिरावट के साथ 72 प्रतिशत पर रहा। क्षेत्रवार देखें तो धातु और धातु उत्पाद तथा वस्त्र, परिधान और तकनीकी वस्त्र में क्षमता उपयोग क्रमशः 76 प्रतिशत और 76.4 प्रतिशत रहा। ऑटोमोटिव और ऑटो कंपोनेंट्स में 75.7 प्रतिशत, रसायन, उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स में 75 प्रतिशत, मशीन टूल्स में 70 प्रतिशत, कैपिटल गुड्स में 69 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल में 68 प्रतिशत और विविध क्षेत्र में 65 प्रतिशत क्षमता उपयोग दर्ज किया गया।
परिचालन चुनौतियाँ और वैश्विक दबाव
क्षमता उपयोग में मामूली गिरावट के पीछे वैश्विक अस्थिरता प्रमुख कारण बताई गई है, जिसमें टैरिफ, व्यापार बाधाएँ और आर्थिक अनिश्चितता शामिल हैं। इसके अलावा, कच्चे माल की कमी, नियामक चुनौतियाँ और श्रम की अनुपलब्धता भी परिचालन मोर्चे पर दबाव बनाए हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव — विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ नीतियों के संदर्भ में — भारतीय निर्यात-उन्मुख उद्योगों के लिए अनिश्चितता का वातावरण बना रहे हैं।
आगे की संभावनाएँ
उद्योग जगत चौथी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की निरंतर वृद्धि को लेकर आशावादी बना हुआ है। नियुक्ति योजनाओं में बढ़ोतरी और निर्यात में सुधार इस आशावाद को बल देते हैं। हालाँकि, वैश्विक व्यापार परिदृश्य और घरेलू परिचालन बाधाओं पर नज़र रखना उद्योग के लिए अगले कुछ महीनों में अहम होगा।