बोलीविया को भारत की ८ मीट्रिक टन जीवनरक्षक दवाइयाँ, ग्लोबल साउथ साझेदारी को नई मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 9 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाइयों की खेप भेजी है। यह कदम ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की सतत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
खेप का विवरण और औपचारिक हस्तांतरण
बोलीविया में भारत के राजदूत रोहित वाधवाना ने बोलीविया की प्रशासनिक राजधानी ला पाज के एल आल्टो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह में यह खेप बोलीविया सरकार को सौंपी। इस अवसर पर बोलीविया की विदेश मंत्री सेलिंडा सोसा लुंडा, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री मारिया रेने कास्त्रो क्विसिकैंकी और उपमंत्री मैक्स एनरिकेज नावा भी उपस्थित रहे।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ग्लोबल साउथ के एक साझेदार देश की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता को समर्थन देने के लिए आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और जरूरी दवाइयों की खेप भेजी है। भारत हमेशा एकजुटता और साझा प्रगति के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार रहता है।"
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
यह सहायता ऐसे समय में आई है जब भारत-बोलीविया संबंध नई गहराई पा रहे हैं। फरवरी 2026 में बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत आए थे। उन्होंने उपराष्ट्रपति भवन में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने "सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।" साथ ही बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय को और मजबूत करने पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
पूर्व सहायता का संदर्भ
गौरतलब है कि भारत ने पिछले वर्ष जुलाई में भी बोलीविया को तीन लाख खुराक एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन दान की थीं, साथ में टीकाकरण के लिए आवश्यक अन्य चिकित्सा सामग्री भी भेजी गई थी। यह नवीनतम दवा खेप उसी निरंतर स्वास्थ्य-सहयोग श्रृंखला की अगली कड़ी है।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और डिजिटल साझेदारी पर चर्चाएँ जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में बोलीविया जैसे संसाधन-संपन्न देशों के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता, ग्लोबल साउथ में उसके रणनीतिक प्रभाव को विस्तार देने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।