भारत ने बोत्सवाना को एचआईवी/एड्स के लिए 10 टन एंटीरेट्रोवायरल दवाएं भेजीं, जयशंकर ने ग्लोबल साउथ प्रतिबद्धता दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 15 सितंबर 2026 को जानकारी दी कि भारत ने बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को सहयोग देने के उद्देश्य से 10 टन एंटीरेट्रोवायरल दवाएं भेजी हैं, जो एचआईवी/एड्स के उपचार में काम आएंगी। यह कदम नई दिल्ली की ग्लोबल साउथ देशों के साथ स्वास्थ्य सहयोग को प्रगाढ़ करने की नीति के तहत उठाया गया है।
जयशंकर का बयान और भारत की प्रतिबद्धता
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'एचआईवी/एड्स के इलाज के लिए बोत्सवाना के पब्लिक हेल्थ सिस्टम को सपोर्ट करने के मकसद से आज वहां 10 टन एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं भेजी गईं। यह ग्लोबल साउथ के हमारे साथियों के साथ हेल्थ के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत और बोत्सवाना के द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
भारत-बोत्सवाना द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
गैबोरोन स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण रहे हैं, और पिछले कुछ वर्षों में आपसी विश्वास और गहरा हुआ है। गौरतलब है कि नवंबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बोत्सवाना की राजकीय यात्रा की थी, जो भारत से बोत्सवाना की पहली राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा थी।
राष्ट्रपति मुर्मु की यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार और निवेश, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रक्षा और डिजिटल तकनीक सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। बोत्सवाना के राष्ट्रपति डुमा गिदोन बोको ने उस यात्रा को अपने पद संभालने के बाद किसी देश की पहली राजकीय यात्रा बताते हुए कहा था कि यह भारत के साथ संबंधों को दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करती है।
प्रोजेक्ट चीता: वन्यजीव सहयोग का नया अध्याय
राष्ट्रपति मुर्मु की यात्रा के दौरान एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया — बोत्सवाना ने 'प्रोजेक्ट चीता' के अंतर्गत भारत को आठ चीते भेंट किए। यह प्रतीकात्मक दान कार्यक्रम मोकोलोडी नेचर रिजर्व में आयोजित हुआ, जहाँ दोनों नेताओं ने घांजी क्षेत्र से लाए गए इन चीतों को क्वारंटीन सुविधा में छोड़े जाने की प्रक्रिया देखी।
राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि 'यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण में भारत-बोत्सवाना सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत को दर्शाता है।' भारत में चीता पुनर्वास परियोजना को इससे नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका और आगे की राह
दवाओं की यह खेप भारत की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अफ्रीकी और एशियाई देशों को सस्ती दवाएं, टीके और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है। भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है और एंटीरेट्रोवायरल दवाओं के वैश्विक आपूर्ति में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति बोको ने कहा कि 'लोकतंत्र की जननी' भारत उनके देश की विकास यात्रा में प्रेरणा और समर्थन का मजबूत स्रोत रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होने की संभावना है।