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इबोला संकट: भारत ने अफ्रीका सीडीसी को भेजी 43 टन की दूसरी मेडिकल खेप, जयशंकर ने दी जानकारी

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इबोला संकट: भारत ने अफ्रीका सीडीसी को भेजी 43 टन की दूसरी मेडिकल खेप, जयशंकर ने दी जानकारी

सारांश

इबोला संकट में भारत ने महज़ नौ दिनों में दूसरी बार अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सहायता भेजी — 43 टन की यह खेप PPE, दवाइयाँ और निगरानी उपकरण लेकर पहुँची। WHO द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित होने के बाद यह भारत की अफ्रीका के साथ बढ़ती स्वास्थ्य साझेदारी का ठोस संकेत है।

मुख्य बातें

भारत ने 2 जून 2026 को अफ्रीका सीडीसी को 43 टन की दूसरी चिकित्सा सहायता खेप भेजी।
खेप में PPE किट, जाँच उपकरण, दवाइयाँ और पोषण सप्लीमेंट शामिल हैं।
पहली खेप 24 मई को भेजी गई थी; 29 मई को भारत ने और सहायता जारी रखने का वादा किया था।
WHO ने 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
युगांडा में भारतीय उच्चायुक्त उपेन्द्र सिंह रावत ने अफ्रीका सीडीसी कार्यालय को सामग्री सौंपी।
31 मई को अफ्रीका सीडीसी ने भारत की सहायता का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया था।

भारत ने मंगलवार, 2 जून 2026 को अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप रवाना की। 43 टन की इस खेप में सुरक्षा उपकरण, जाँच एवं निगरानी उपकरण, दवाइयाँ और पोषण संबंधी सप्लीमेंट शामिल हैं, जिनका उद्देश्य डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में जारी इबोला प्रकोप से निपटने की क्षमता को और सुदृढ़ करना है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद भारत की ओर से की गई दूसरी बड़ी सहायता कार्रवाई है।

खेप में क्या शामिल है

इस दूसरी खेप में सुरक्षात्मक उपकरण (PPE किट), रोग जाँच एवं निगरानी से जुड़े उपकरण, आवश्यक दवाइयाँ और पोषण सप्लीमेंट शामिल हैं। युगांडा में भारत के उच्चायुक्त उपेन्द्र सिंह रावत ने यह सामग्री अफ्रीका सीडीसी के वहाँ स्थित कार्यालय को सौंपी। नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस हस्तांतरण की पुष्टि की।

जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'भारत ने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है, जिसमें सुरक्षा उपकरण, जाँच एवं निगरानी उपकरण, दवाइयाँ और सप्लीमेंट शामिल हैं। हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी और इबोला प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ावा देगी।'

पहली खेप और पूर्व प्रतिबद्धताएँ

इससे पहले 24 मई को भारत ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप अफ्रीका सीडीसी को भेजी थी। उस अवसर पर जयशंकर ने एक्स पर लिखा था, 'उभरते इबोला स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने में अफ्रीका का समर्थन करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।' 29 मई को भारत ने पीड़ित देशों और अफ्रीका सीडीसी को इस स्वास्थ्य आपदा से निपटने में सहायता जारी रखने का औपचारिक वादा भी किया था।

अफ्रीका सीडीसी की प्रतिक्रिया

31 मई को अफ्रीका सीडीसी ने भारत द्वारा प्रदान की गई आपातकालीन चिकित्सा सहायता का स्वागत करते हुए नई दिल्ली के प्रति आभार व्यक्त किया था। संगठन ने इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान भारत के त्वरित समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।

इबोला: बीमारी और वैश्विक संदर्भ

इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज़ बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक तथा बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों को चिकित्सा सहायता बढ़ाई है — विशेष रूप से कोविड-19 जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान दवाइयों और टीकों की आपूर्ति कर। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अफ्रीका स्वास्थ्य साझेदारी को नई दिल्ली की विदेश नीति में रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले हफ्तों में भारत की ओर से और सहायता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

या प्रतिक्रियात्मक कूटनीति मात्र है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में इबोला का यह प्रकोप उस क्षेत्र की पुरानी स्वास्थ्य-तंत्र की कमज़ोरियों को उजागर करता है, जहाँ आपूर्ति-केंद्रित सहायता ज़रूरी तो है, पर पर्याप्त नहीं। भारत यदि अफ्रीका में स्थायी स्वास्थ्य साझेदार बनना चाहता है, तो उसे खेप-दर-खेप मदद से आगे बढ़कर प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र और स्थानीय उत्पादन क्षमता में निवेश पर ध्यान देना होगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने अफ्रीका सीडीसी को दूसरी मेडिकल खेप कब और क्यों भेजी?
भारत ने 2 जून 2026 को अफ्रीका सीडीसी को दूसरी मेडिकल खेप भेजी, ताकि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में जारी इबोला प्रकोप से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा सके। WHO ने 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
43 टन की इस मेडिकल खेप में क्या-क्या शामिल है?
इस खेप में सुरक्षात्मक उपकरण (PPE किट), जाँच एवं निगरानी उपकरण, आवश्यक दवाइयाँ और पोषण संबंधी सप्लीमेंट शामिल हैं। यह सामग्री युगांडा में भारतीय उच्चायुक्त उपेन्द्र सिंह रावत ने अफ्रीका सीडीसी के कार्यालय को सौंपी।
भारत ने इससे पहले अफ्रीका सीडीसी को कब मदद भेजी थी?
भारत ने पहली खेप 24 मई 2026 को भेजी थी, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट शामिल थीं। 29 मई को भारत ने पीड़ित देशों और अफ्रीका सीडीसी को सहायता जारी रखने का औपचारिक वादा भी किया था।
इबोला क्या है और यह कैसे फैलता है?
इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज़ बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक तथा बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं।
अफ्रीका सीडीसी ने भारत की मदद पर क्या कहा?
अफ्रीका सीडीसी ने 31 मई 2026 को भारत की आपातकालीन चिकित्सा सहायता का स्वागत करते हुए नई दिल्ली के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन ने इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान भारत के त्वरित समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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