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डीआर कांगो में इबोला मामले 635 पहुँचे, 30 मरीज स्वस्थ; WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

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डीआर कांगो में इबोला मामले 635 पहुँचे, 30 मरीज स्वस्थ; WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

सारांश

डीआर कांगो में इबोला के 635 मामले सामने आ चुके हैं और WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। 30 मरीज ठीक हुए हैं, लेकिन खराब सड़कें, संसाधनों की कमी और सशस्त्र संघर्ष राहत कार्यों में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

मुख्य बातें

डीआर कांगो में बंडिबुग्यो इबोला वायरस के कुल मामले 635 हो गए हैं।
अब तक 30 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जिनमें ताज़ा 8 मरीज — 7 न्यांकुंडे और 1 मोंगबवालु से हैं।
संपर्क निगरानी दर एक दिन में 56.4% से बढ़कर 61.1% हुई।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 490 टन दवाइयाँ भेजी हैं; इटुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु में टीमें सक्रिय।
WHO ने 17 मई 2026 को इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया।
अफ्रीका CDC ने संसाधनों की कमी, असुरक्षा और सामुदायिक अविश्वास को राहत कार्यों में बड़ी बाधा बताया।

लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआर कांगो) में बंडिबुग्यो इबोला वायरस से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 635 तक पहुँच गई है, जबकि अब तक 30 मरीज सफलतापूर्वक स्वस्थ हो चुके हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने 11 जून 2026 को यह जानकारी साझा की। यह प्रकोप 15 मई 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित हुआ था और 17 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य मंत्री कांबा के अनुसार, ताज़ा आँकड़ों में आठ नए मरीज स्वस्थ हुए हैं — जिनमें सात न्यांकुंडे और एक मोंगबवालु क्षेत्र के हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की निगरानी दर भी एक दिन में 56.4% से बढ़कर 61.1% हो गई है, जिसे स्वास्थ्य विभाग एक सकारात्मक संकेत मान रहा है।

कांबा ने कहा, "हर मरीज का ठीक होना यह संदेश देता है कि समय पर इलाज कराने से जान बचाई जा सकती है।" सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 490 टन दवाइयाँ भेजी हैं और इटुरी, नॉर्थ किवु तथा साउथ किवु प्रांतों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हैं।

राहत कार्यों में बाधाएँ

अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका CDC) ने चेतावनी दी है कि ज़मीनी स्तर पर राहत कार्य कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कई स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छ पानी, सुरक्षा उपकरण, दवाइयाँ और आवश्यक संसाधनों की कमी बताई जा रही है।

इसके अलावा कुछ इलाकों में असुरक्षा की स्थिति, एम्बुलेंस की अनुपलब्धता, जर्जर सड़कें और स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर वेतन न मिलना भी राहत अभियान को धीमा कर रहा है। स्थानीय समुदायों में स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

प्रयोगशाला और निगरानी तंत्र को मजबूती

सरकार ने प्रयोगशाला क्षमता को बढ़ाया है और संक्रमण की पहचान की प्रक्रिया को तेज़ किया है। अफ्रीका CDC ने समुदाय-स्तरीय जागरूकता, जोखिम वाले क्षेत्रों में त्वरित मेडिकल प्रतिक्रिया, संक्रमण-रोकथाम उपायों को सुदृढ़ करने और संपर्क निगरानी को व्यापक बनाने पर विशेष ज़ोर दिया है।

वैश्विक स्वास्थ्य संदर्भ

गौरतलब है कि डीआर कांगो पहले भी इबोला के कई प्रकोपों का सामना कर चुका है — 2018-2020 के बीच का प्रकोप अब तक का दूसरा सबसे घातक था, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान गई थी। इस बार बंडिबुग्यो वैरिएंट का फैलाव चिंता का विषय है क्योंकि यह वैरिएंट अपेक्षाकृत कम अध्ययन किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी कांगो में सशस्त्र संघर्ष भी जारी है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को और कठिन बनाता है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संपर्क निगरानी दर को 80% से ऊपर ले जाना अगला प्राथमिक लक्ष्य है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं की सहायता से टीकाकरण और उपचार प्रोटोकॉल को और विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की उपेक्षित स्वास्थ्य अवसंरचना और सशस्त्र संघर्ष की परिणति है। संपर्क निगरानी दर का 61% पर होना — जबकि WHO का न्यूनतम मानक 80% है — यह बताता है कि ज़मीनी नियंत्रण अभी भी अधूरा है। 490 टन दवाइयाँ भेजना तब तक अर्थहीन है जब तक एम्बुलेंस न हों, सड़कें ठीक न हों और स्वास्थ्य कर्मियों को वेतन न मिले। वैश्विक समुदाय को यह स्वीकार करना होगा कि WHO का आपातकाल-घोषणा तंत्र बिना संसाधन-प्रतिबद्धता के महज़ कागज़ी कार्रवाई बन जाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआर कांगो में इबोला प्रकोप कब शुरू हुआ और अब तक कितने मामले हैं?
डीआर कांगो ने 15 मई 2026 को इस इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की थी। 11 जून 2026 तक कुल 635 मामले सामने आ चुके हैं और 30 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।
WHO ने डीआर कांगो के इबोला प्रकोप को वैश्विक आपातकाल क्यों घोषित किया?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई 2026 को इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया क्योंकि बंडिबुग्यो इबोला वायरस का तेज़ प्रसार, संसाधनों की कमी और सशस्त्र संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय फैलाव का जोखिम बढ़ गया था।
राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधाएँ क्या हैं?
अफ्रीका CDC के अनुसार, स्वच्छ पानी, सुरक्षा उपकरण और दवाइयों की कमी, एम्बुलेंस की अनुपलब्धता, खराब सड़कें, स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर वेतन न मिलना और कुछ इलाकों में असुरक्षा की स्थिति प्रमुख बाधाएँ हैं। सामुदायिक अविश्वास भी एक बड़ी चुनौती है।
बंडिबुग्यो इबोला वायरस क्या है और यह कितना खतरनाक है?
बंडिबुग्यो इबोला वायरस, इबोला वायरस का एक वैरिएंट है जिसे पहली बार 2007 में युगांडा के बंडिबुग्यो ज़िले में पहचाना गया था। यह वैरिएंट अपेक्षाकृत कम अध्ययन किया गया है, जिससे इसके उपचार और टीकाकरण प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।
कांगो में इबोला नियंत्रण के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएँगे?
स्वास्थ्य अधिकारियों का अगला लक्ष्य संपर्क निगरानी दर को 80% से ऊपर ले जाना है। इसके साथ ही समुदाय-स्तरीय जागरूकता, जोखिम वाले क्षेत्रों में त्वरित मेडिकल प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सहायता से टीकाकरण कार्यक्रम को विस्तारित करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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