WHO ने इबोला को घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, कर्नाटक में हाई अलर्ट — बेंगलुरु-मंगलुरु में आइसोलेशन केंद्र तैयार
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला वायरस प्रकोप को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद कर्नाटक सरकार तत्काल हाई अलर्ट पर आ गई है। 22 मई को जारी राज्य स्वास्थ्य विभाग के बयान के अनुसार, निगरानी तंत्र को व्यापक रूप से मजबूत किया गया है और अस्पतालों को आइसोलेशन एवं उपचार के लिए तैयार कर लिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।
बेंगलुरु और मंगलुरु में चिकित्सा ढाँचा तैयार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बेंगलुरु स्थित राजीव गांधी छाती रोग संस्थान (RGICDC) को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल को क्वारंटीन और उपचार केंद्र के रूप में नामित किया गया है। यह व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक प्रमुख केंद्र है और अफ्रीकी देशों से आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या यहाँ अपेक्षाकृत अधिक रहती है।
मंगलुरु में न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी के अंतर्गत श्रीनिवास पोर्ट हॉस्पिटल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है, और वेनलॉक जिला अस्पताल को आइसोलेशन एवं उपचार केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। बंदरगाह और हवाई अड्डों — दोनों एंट्री पॉइंट्स पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है।
जाँच प्रक्रिया और निगरानी तंत्र
विभाग ने बताया कि इबोला के संदिग्ध मरीजों के नमूने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), बेंगलुरु के माध्यम से पुष्टि जाँच के लिए NIV, पुणे भेजे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के तहत संदिग्ध मामलों की सक्रिय निगरानी शुरू कर दी गई है। रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और रेफरल एंबुलेंस सेवाएँ तत्पर हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने इबोला को लेकर एहतियाती कदम उठाए हों — 2014 और 2018-20 के कांगो प्रकोपों के दौरान भी देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग लागू की गई थी। हालाँकि उन अवसरों पर भारत में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।
इबोला वायरस: लक्षण और संक्रमण का तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला एक गंभीर वायरल रक्तस्रावी बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, सिरदर्द, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, शरीर पर चकत्ते और आँखों का लाल होना शामिल हैं। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के रक्त, अंगों या शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलती है।
संक्रमित कपड़े, बिस्तर और सिरिंज जैसी वस्तुएँ भी संक्रमण का माध्यम बन सकती हैं। स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित व्यक्ति के निकट परिवार के सदस्यों को सर्वाधिक जोखिम में माना जाता है। यह वायरस हवा के माध्यम से नहीं फैलता — एक तथ्य जो सार्वजनिक घबराहट को कम करने के लिए अधिकारी बार-बार रेखांकित कर रहे हैं।
यात्रियों के लिए दिशा-निर्देश और सरकारी अपील
अधिकारियों ने कहा कि इबोला प्रभावित देशों — विशेषकर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा — से लौटने वाले लोगों को भारत आने के बाद 21 दिनों तक अपनी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखनी होगी। यदि कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने आम जनता से अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक सूचनाओं से बचने और केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। पूरे राज्य में PPE किट, दवाइयों और प्रयोगशाला सुविधाओं का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया जा रहा है, और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा के आधार पर अतिरिक्त उपाय किए जा सकते हैं।