सफदरजंग अस्पताल में पहली रोबोट-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफल, आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स (CIO) ने 22 अगस्त 2026 को अपनी पहली रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। यह ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किया गया और इसका लाभ 75 वर्षीय एक आर्थिक रूप से कमज़ोर पुरुष मरीज़ को मिला। सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की यह शुरुआत समान स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जा रही है।
सर्जरी का नेतृत्व और टीम
यह ऐतिहासिक सर्जरी CIO के निदेशक प्रो. डॉ. सुमित सुरल के मार्गदर्शन में की गई। ऑर्थोपेडिक टीम का नेतृत्व डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा, कंसल्टेंट प्रोफेसर एवं यूनिट हेड, ने किया। उनके साथ डॉ. ध्रुवे मैनी और डॉ. कार्तिक यादव भी सर्जिकल टीम में शामिल रहे।
एनेस्थीसिया का दायित्व डॉ. सुशील गुरिया ने संभाला, जबकि ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग स्टाफ सिस्टर रेखा और रितिका तथा तकनीकी स्टाफ विजेंदर की टीम ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया। पूरी पहल VMMC और सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व और प्रोत्साहन से संभव हो सकी।
रोबोटिक प्लेटफॉर्म की विशेषताएँ
नए रोबोटिक सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक अपग्रेडेबल प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में यह टोटल नी रिप्लेसमेंट, पार्शियल नी रिप्लेसमेंट और हिप जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी प्रक्रियाओं में सहायक है।
भविष्य में तकनीकी और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के ज़रिए इसी प्लेटफॉर्म से रोबोट-असिस्टेड स्पाइन सर्जरी भी की जा सकेगी, जिससे CIO में उन्नत सर्जिकल सेवाओं का दायरा और व्यापक होगा।
चिकित्सकीय लाभ
रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सटीक प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग और ऑपरेशन के दौरान इम्प्लांट की पोजीशनिंग व अलाइनमेंट में उच्च स्तर की परिशुद्धता सुनिश्चित करती है। पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में यह तकनीक पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं को कम करने में सहायक मानी जाती है।
गौरतलब है कि यह तकनीक अब तक मुख्यतः निजी अस्पतालों तक सीमित थी, जहाँ इसकी लागत आम मरीज़ की पहुँच से बाहर होती है। सरकारी केंद्र में इसकी उपलब्धता, विशेषकर आयुष्मान भारत के अंतर्गत, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए एक बड़ा बदलाव है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
इस पहल से CIO, सफदरजंग अस्पताल में भविष्य के मरीज़ों के लिए उन्नत ऑर्थोपेडिक देखभाल की पहुँच बढ़ेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में घुटने और कूल्हे के जोड़ों की बीमारियाँ बुज़ुर्ग आबादी में तेज़ी से बढ़ रही हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस तकनीक के विस्तार से न केवल उपचार की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में टेक्नोलॉजी-आधारित ऑर्थोपेडिक देखभाल को नई दिशा मिलेगी। VMMC और सफदरजंग अस्पताल की यह उपलब्धि देश के अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक मानदंड स्थापित कर सकती है।