आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल: टीबी जांच का खर्च ₹9,451 से घटकर मात्र ₹91, समय भी 15 दिन से 5 दिन हुआ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की आई-ड्रोन पहल के अंतर्गत किए गए एक नए अध्ययन ने यह साबित किया है कि ड्रोन के माध्यम से टीबी के बलगम नमूने जांच प्रयोगशाला तक पहुंचाने से दूरदराज़ के इलाकों में मरीजों का औसत खर्च ₹9,451 से घटकर केवल ₹91 रह गया और जांच का औसत समय 15 दिन से सिमटकर 5 दिन हो गया। 16 जुलाई को सामने आए इस अध्ययन के नतीजे भारत में टीबी उन्मूलन की दिशा में तकनीक की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करते हैं।
अध्ययन की पृष्ठभूमि और संरचना
यह अध्ययन तेलंगाना के यादद्री-भुवनगिरी जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बीबीनगर और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से संचालित किया गया। इसमें 840 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और पुरानी व नई व्यवस्था की तुलनात्मक समीक्षा की गई। पुरानी व्यवस्था में मरीजों को स्वयं लंबी दूरी तय कर जांच केंद्र पहुंचना पड़ता था, जबकि नई व्यवस्था में बलगम के नमूने नज़दीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या उप-स्वास्थ्य केंद्र पर एकत्र कर ड्रोन से निर्धारित टीबी जांच प्रयोगशाला तक भेजे गए।
मुख्य निष्कर्ष: समय और खर्च में भारी कमी
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, ड्रोन-आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद टीबी जांच पूरी होने का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। इससे बीमारी की पुष्टि जल्दी हो सकी और डॉक्टर समय पर इलाज शुरू करने में सक्षम हुए। आर्थिक दृष्टि से देखें तो पहले यात्रा, मजदूरी की हानि और अन्य खर्चों को मिलाकर मरीजों को औसतन ₹9,451 व्यय करने पड़ते थे, जो नई व्यवस्था में घटकर औसतन ₹91 रह गए। कई मरीजों को तो जांच के लिए कोई यात्रा व्यय ही नहीं करना पड़ा, क्योंकि वे अपने गांव के समीप स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर ही नमूना जमा कर सके।
'केंद्र और संपर्क केंद्र' मॉडल की कार्यप्रणाली
इस पहल को 'केंद्र और संपर्क केंद्र' मॉडल के आधार पर लागू किया गया, जिसके तहत 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 60 उप-स्वास्थ्य केंद्र और 4 टीबी इकाइयों को आपस में जोड़ा गया। इस नेटवर्क ने स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों के घरों के अधिक निकट पहुंचाया और दूरस्थ जांच केंद्रों तक जाने की बाध्यता समाप्त की। अध्ययन में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों ने भी बताया कि इस व्यवस्था से कार्यक्षमता बढ़ी और स्थानीय समुदायों ने इसे सहजता से अपनाया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
आईसीएमआर के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि समय पर और किफायती जांच की सुविधा भारत से टीबी समाप्त करने के प्रयासों का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अध्ययन दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक की मदद से भौगोलिक बाधाओं को पार किया जा सकता है और दूरदराज़ के लोगों पर समय व खर्च का बोझ कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने हालांकि यह भी रेखांकित किया कि मौसम की स्थिति, ड्रोन की भार-वहन क्षमता और कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ही इस व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।
आगे की राह
शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन केवल एक जिले के अनुभव पर आधारित है, फिर भी यह स्पष्ट करता है कि ड्रोन-आधारित व्यवस्था दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल के तहत देश के दुर्गम इलाकों में टीके, दवाइयाँ, रक्त उत्पाद, ऊतक और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री की त्वरित आपूर्ति की संभावनाओं पर भी निरंतर काम जारी है। यह पहल भारत के 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में तकनीक-आधारित स्वास्थ्य वितरण का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है।