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एनआईएमएस हैदराबाद ने तीन साल में पूरी कीं 1,000 रोबोटिक सर्जरी, सरकारी अस्पतालों में नया कीर्तिमान

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एनआईएमएस हैदराबाद ने तीन साल में पूरी कीं 1,000 रोबोटिक सर्जरी, सरकारी अस्पतालों में नया कीर्तिमान

सारांश

हैदराबाद के एनआईएमएस ने तीन साल से कम में 1,000 रोबोटिक सर्जरी पूरी कर सरकारी स्वास्थ्य सेवा में नई मिसाल कायम की। खास बात यह है कि 90% से अधिक सर्जरी आरोग्यश्री और सीएमआरएफ के तहत निःशुल्क हुईं — यानी वर्ल्ड-क्लास तकनीक अब गरीब मरीजों की पहुँच में।

मुख्य बातें

एनआईएमएस, हैदराबाद ने तीन वर्ष से कम में 1,000 रोबोट-असिस्टेड सर्जरी पूरी कर सरकारी अस्पतालों में नया राष्ट्रीय बेंचमार्क स्थापित किया।
590 सर्जरी यूरोलॉजी, 248 सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और 162 सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग द्वारा संपन्न।
90% से अधिक सर्जरी आरोग्यश्री और मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) के तहत पूरी तरह निःशुल्क।
राहुल देवराज सहित पूरी मेडिकल टीम की सराहना की।
स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने इसे सरकार की जन-केंद्रित स्वास्थ्य नीति का प्रमाण बताया।
यूरोलॉजी विभाग ने 1 वर्ष से 80 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की।

निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनआईएमएस), हैदराबाद ने तीन वर्ष से भी कम समय में 1,000 रोबोट-असिस्टेड सर्जरी पूरी कर देशभर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। तेलंगाना सरकार ने 4 अगस्त 2025 को इस उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा की, जिसे पब्लिक हेल्थकेयर में रोबोटिक तकनीक के लोकतांत्रिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

कुल 1,000 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी में से 590 सर्जरी यूरोलॉजी विभाग ने, 248 सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने और 162 सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने संपन्न कीं। इनमें प्रोस्टेट कैंसर के लिए रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी, ब्लैडर कैंसर के लिए रेडिकल सिस्टेक्टॉमी, जटिल रोबोटिक रीनल ट्रांसप्लांटेशन, यूरोगायनेकोलॉजिकल और यूरो-रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रियाएँ — जैसे बोआरी फ्लैप, यूरेटरिक रीइम्प्लांटेशन और पाइलोप्लास्टी (बच्चों की पाइलोप्लास्टी सहित) — शामिल रहीं।

यूरोलॉजी विभाग ने 1 वर्ष से लेकर 80 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों की सर्जरी की, जो इस कार्यक्रम की व्यापक पहुँच को रेखांकित करता है।

आम जनता पर असर

इन 1,000 सर्जरी में से 90 प्रतिशत से अधिक सरकार-समर्थित आरोग्यश्री और मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) योजनाओं के तहत पूरी तरह निःशुल्क की गईं। यह आँकड़ा इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि रोबोटिक सर्जरी निजी अस्पतालों में अत्यंत महँगी होती है और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग की इस तक पहुँच प्रायः सीमित रहती है।

रोबोटिक तकनीक के नैदानिक उपयोग से सर्जरी में सटीकता बढ़ी है, ऑपरेशन के बाद का दर्द और रक्त-हानि कम हुई है, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि घटी है और मरीजों के स्वस्थ होने की गति तेज़ हुई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

एनआईएमएस की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एनआईएमएस के निदेशक एवं यूरोलॉजी व रीनल ट्रांसप्लांटेशन के वरिष्ठ प्रोफेसर तथा रोबोटिक सर्जरी कोऑर्डिनेटर डॉ. राहुल देवराज सहित यूरोलॉजी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एनेस्थिसियोलॉजी, नर्सिंग सेवाओं और ऑपरेशन थिएटर कर्मचारियों की सराहना की।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने इसे पब्लिक हेल्थकेयर में 'क्रांतिकारी बदलाव का पल' बताया और कहा कि यह उपलब्धि एनआईएमएस की उत्कृष्टता, नवाचार और समतापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने भी एनआईएमएस के समस्त चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा, 'लोगों तक एडवांस्ड मेडिकल सेवाएँ पहुँचाने के हमारी सरकार के संकल्प के सबूत के तौर पर यह खुशी की बात है कि इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक रोबोटिक सर्जरी आरोग्यश्री और सीएमआरएफ योजनाओं के तहत मुफ्त में की गई हैं। हर नागरिक के लिए विश्व-स्तरीय मेडिकल सेवाएँ सुनिश्चित करना तेलंगाना सरकार का लक्ष्य है।'

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में उन्नत सर्जिकल तकनीकों की उपलब्धता को लेकर देशव्यापी बहस जारी है। गौरतलब है कि अधिकांश सरकारी संस्थान अभी भी पारंपरिक लेप्रोस्कोपिक पद्धति पर निर्भर हैं, ऐसे में एनआईएमएस का यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में रोबोटिक सर्जरी के एकीकरण का एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है।

क्या होगा आगे

तेलंगाना सरकार ने संकेत दिया है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में उन्नत तकनीक के विस्तार की दिशा में काम जारी रखेगी। एनआईएमएस का यह मॉडल अन्य राज्यों के सरकारी अस्पतालों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है, जहाँ रोबोटिक सर्जरी को अभी तक केवल निजी क्षेत्र तक सीमित माना जाता रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह मॉडल दीर्घकालिक और दोहराने योग्य है। रोबोटिक सर्जरी उपकरणों का रखरखाव और अपग्रेड अत्यंत महँगा होता है, और सरकारी बजट पर निर्भर संस्थानों में इसकी निरंतरता एक वास्तविक चुनौती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 90% मुफ्त सर्जरी का बोझ आरोग्यश्री और सीएमआरएफ जैसी योजनाओं पर है, जिनकी वित्तीय स्थिरता पर नज़र रखना ज़रूरी है। यदि तेलंगाना इस मॉडल को अन्य ज़िला अस्पतालों तक विस्तारित करना चाहता है, तो केवल उपकरण खरीदना पर्याप्त नहीं — प्रशिक्षित सर्जनों की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती उतनी ही अहम है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईएमएस हैदराबाद की 1,000 रोबोटिक सर्जरी की उपलब्धि क्या है?
हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनआईएमएस) ने तीन वर्ष से कम समय में 1,000 रोबोट-असिस्टेड सर्जरी पूरी कर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एक नया राष्ट्रीय बेंचमार्क बनाया है। इनमें यूरोलॉजी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की जटिल प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
क्या ये रोबोटिक सर्जरी मुफ्त में की गईं?
हाँ, 1,000 में से 90 प्रतिशत से अधिक सर्जरी आरोग्यश्री और मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) योजनाओं के तहत पूरी तरह निःशुल्क की गईं। यह सुनिश्चित किया गया कि आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीज़ भी विश्व-स्तरीय रोबोटिक सर्जरी का लाभ उठा सकें।
एनआईएमएस में किन विभागों ने सबसे अधिक रोबोटिक सर्जरी कीं?
यूरोलॉजी विभाग ने सर्वाधिक 590 सर्जरी कीं, इसके बाद सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ने 248 और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ने 162 सर्जरी संपन्न कीं। यूरोलॉजी में 1 वर्ष से लेकर 80 वर्ष से अधिक आयु के मरीज़ शामिल थे।
रोबोटिक सर्जरी से मरीज़ों को क्या फायदा होता है?
रोबोटिक सर्जरी से सर्जिकल सटीकता बढ़ती है, ऑपरेशन के बाद दर्द और रक्त-हानि कम होती है, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि घटती है और मरीज़ तेज़ी से स्वस्थ होते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से जटिल कैंसर और पुनर्निर्माण सर्जरी में अधिक प्रभावी मानी जाती है।
इस उपलब्धि पर तेलंगाना सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इसे पब्लिक हेल्थकेयर में 'क्रांतिकारी बदलाव का पल' बताया और एनआईएमएस की पूरी टीम की सराहना की। स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने इसे सरकार की जन-केंद्रित स्वास्थ्य नीति का प्रमाण बताते हुए सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को बधाई दी।
राष्ट्र प्रेस
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