हैदराबाद के डॉ. पी. रघु राम ने एआई होलोग्राम लेक्चर से जीता तीसरा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद के प्रख्यात ब्रेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. रघु राम ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित इंटरैक्टिव होलोग्राम स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान के ज़रिए दुनिया का सबसे बड़ा ऑडियंस रिकॉर्ड स्थापित करते हुए नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है। यह कार्यक्रम सिकंदराबाद स्थित केआईएमएस हॉस्पिटल में आयोजित किया गया, जहाँ एआई तकनीक के माध्यम से स्तन स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश व्यापक दर्शकों तक पहुँचाया गया।
पिछले 15 महीनों में तीसरा रिकॉर्ड
उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि डॉ. रघु राम के लिए पिछले 15 महीनों में तीसरा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है — जन स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक उपलब्धि। यह पहल उषा लक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन और केआईएमएस-उषालक्ष्मी सेंटर फॉर ब्रेस्ट डिजीज के सहयोग से संपन्न हुई। डॉ. रघु राम ने कहा कि एआई आधारित होलोग्राफिक ब्रेस्ट हेल्थ एजुकेशन के माध्यम से यह रिकॉर्ड उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
एनएआरआई पहल की शुरुआत
इस अवसर पर डॉ. रघु राम ने देशभर में स्तन स्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा देने के लिए एनएआरआई (नेशनल अवेयरनेस एंड रिसोर्स इनिशिएटिव फॉर ब्रेस्ट हेल्थ) नामक एक नई राष्ट्रीय पहल का भी शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर जाँच को प्रोत्साहित करना है।
स्वास्थ्य जानकारी: फाइब्रोएडेनोमा पर विशेषज्ञ सलाह
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रघु राम ने स्तन स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण चिकित्सीय जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि फाइब्रोएडेनोमा स्तन में होने वाली एक सामान्य और कैंसर-रहित गाँठ है, जो अधिकतर युवा महिलाओं में पाई जाती है। यह आमतौर पर दर्द रहित होती है और स्पर्श करने पर आसानी से हिलती महसूस होती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश मामलों में फाइब्रोएडेनोमा के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती — नियमित जाँच और निगरानी से इसका प्रबंधन संभव है। हालाँकि, बड़े या जटिल मामलों में चिकित्सक उपचार या शल्य-चिकित्सा की सलाह दे सकते हैं।
एआई तकनीक और चिकित्सा जागरूकता का भविष्य
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा को नए आयाम देने का यह प्रयास भारत में चिकित्सा जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। यह पहल विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति समझ विकसित करने और समय पर जाँच को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में स्तन कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और जागरूकता की माँग पहले से कहीं अधिक है।