15 जुलाई 2026
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अहमदाबाद में नारायणा हॉस्पिटल का रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर शुरू, हैल्सियन तकनीक से मिलेगा सटीक कैंसर उपचार

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अहमदाबाद में नारायणा हॉस्पिटल का रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर शुरू, हैल्सियन तकनीक से मिलेगा सटीक कैंसर उपचार

सारांश

अहमदाबाद में नारायणा हॉस्पिटल का नया रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर सिर्फ एक नई मशीन नहीं — यह गुजरात के उन हज़ारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो हर साल उन्नत कैंसर के साथ बड़े शहरों की ओर भटकते हैं। हैल्सियन सिस्टम और तीनों ऑन्कोलॉजी सेवाओं के एकीकरण से यह केंद्र क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढाँचे में एक ठोस बदलाव का संकेत देता है।

मुख्य बातें

नारायणा हॉस्पिटल ने 30 मई 2026 को अहमदाबाद में अत्याधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया।
उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया; केंद्र में हैल्सियन रेडिएशन थेरेपी सिस्टम लगाया गया है।
गुजरात में हर वर्ष लगभग 70,000–73,000 नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं; कई उन्नत अवस्था में पकड़ में आते हैं।
भारत में केवल लगभग 550 रेडियोथेरेपी मशीनें उपलब्ध हैं, जबकि WHO की सिफारिश प्रति 10 लाख आबादी पर एक मशीन की है।
अस्पताल अब मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी — तीनों सेवाएँ एक ही छत के नीचे प्रदान करता है।
देवी शेट्टी ने कहा कि शुरुआती और सटीक इलाज मरीज की रिकवरी में निर्णायक अंतर ला सकता है।

नारायणा हॉस्पिटल ने 30 मई 2026 को अहमदाबाद में एक अत्याधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया, जो गुजरात और आसपास के क्षेत्रों के कैंसर मरीजों को उन्नत हैल्सियन रेडिएशन थेरेपी सिस्टम के ज़रिये तेज़ और सटीक उपचार उपलब्ध कराएगा। इस केंद्र का उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को इलाज के लिए दूरदराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

हैल्सियन सिस्टम: क्या है यह तकनीक

हैल्सियन रेडिएशन थेरेपी सिस्टम कैंसर उपचार की एक उन्नत प्रणाली है, जो ट्यूमर को अत्यंत सटीकता से निशाना बनाती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुँचाती है। नारायणा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. तस्नीम नलवाला ने बताया कि यह तकनीक उपचार से पहले दैनिक सीटी इमेजिंग की सुविधा देती है, जिससे ट्यूमर की स्थिति का सटीक आकलन संभव होता है। इसके अतिरिक्त आईएमआरटी, वीमैट और स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी जैसी आधुनिक विधियों से मरीजों को अत्यधिक केंद्रित रेडिएशन दिया जाता है। कई मामलों में उपचार के सत्र केवल कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं, जिससे मरीजों का समय बचता है और अनुभव अधिक आरामदायक रहता है।

गुजरात में कैंसर का बोझ और सुविधाओं की कमी

आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में हर वर्ष लगभग 70,000 से 73,000 नए कैंसर मामले सामने आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिनमें बीमारी का पता उन्नत अवस्था में चलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर और सुलभ उपचार मरीजों के जीवन को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे भारत में रेडियोथेरेपी सुविधाओं की भारी कमी है — देश में वर्तमान में केवल लगभग 550 रेडियोथेरेपी मशीनें उपलब्ध हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश के अनुसार प्रति 10 लाख की आबादी पर कम से कम एक मशीन होनी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

नारायणा हेल्थ के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने कहा कि देश में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'शुरुआती और सटीक इलाज मरीज की रिकवरी में बड़ा अंतर ला सकता है।' डॉ. शेट्टी का मानना है कि हर व्यक्ति को अपने घर के नज़दीक गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए। अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर हेमंत भटनागर ने कहा कि यह केंद्र इस विश्वास का प्रतीक है कि विश्वस्तरीय कैंसर उपचार केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हैल्सियन सिस्टम की सहायता से अस्पताल कम समय में अधिक मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करने में सक्षम होगा।

एक छत के नीचे समग्र कैंसर उपचार

इस नए केंद्र के शुरू होने के साथ नारायणा हॉस्पिटल अब मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी — तीनों प्रमुख कैंसर सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध करा रहा है। गौरतलब है कि यह व्यवस्था मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने से मुक्त करती है और उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करती है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह पहल गुजरात और आसपास के क्षेत्रों के हज़ारों मरीजों के लिए बेहतर और सुलभ कैंसर उपचार का नया विकल्प साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एक अत्याधुनिक केंद्र उस विशाल अंतर को पाट सकता है जो भारत की रेडियोथेरेपी ज़रूरत और उपलब्धता के बीच दशकों से बना हुआ है। WHO के मानक के अनुसार भारत को अभी सैकड़ों अतिरिक्त मशीनों की दरकार है, और निजी क्षेत्र की प्रीमियम सुविधाएँ अक्सर उन्हीं मरीजों तक पहुँचती हैं जो खर्च उठा सकते हैं। गुजरात में 70,000 से अधिक वार्षिक मामलों के बीच यह केंद्र एक महत्वपूर्ण पहल है, पर सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में समान निवेश के बिना व्यापक कैंसर देखभाल की पहुँच सीमित ही रहेगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में नारायणा हॉस्पिटल का नया रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर क्या है?
यह 30 मई 2026 को अहमदाबाद में उद्घाटित एक अत्याधुनिक कैंसर उपचार केंद्र है, जो हैल्सियन रेडिएशन थेरेपी सिस्टम से लैस है। यह केंद्र गुजरात और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की तीनों सेवाएँ एक ही स्थान पर प्रदान करता है।
हैल्सियन रेडिएशन थेरेपी सिस्टम पारंपरिक रेडिएशन से कैसे अलग है?
हैल्सियन सिस्टम उपचार से पहले दैनिक सीटी इमेजिंग की सुविधा देता है, जिससे ट्यूमर की सटीक स्थिति का आकलन होता है। आईएमआरटी, वीमैट और स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी जैसी तकनीकों से स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुँचाते हुए ट्यूमर को अत्यंत सटीकता से निशाना बनाया जाता है, और कई सत्र केवल कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं।
गुजरात में कैंसर की स्थिति कितनी गंभीर है?
आँकड़ों के अनुसार गुजरात में हर वर्ष लगभग 70,000 से 73,000 नए कैंसर मामले सामने आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिनमें बीमारी का पता उन्नत अवस्था में चलता है, जिससे समय पर और सुलभ उपचार और भी ज़रूरी हो जाता है।
भारत में रेडियोथेरेपी मशीनों की कमी कितनी है?
वर्तमान में भारत में लगभग 550 रेडियोथेरेपी मशीनें उपलब्ध हैं। WHO की सिफारिश के अनुसार प्रति 10 लाख की आबादी पर कम से कम एक मशीन होनी चाहिए, जो दर्शाता है कि देश को अभी सैकड़ों अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता है।
इस केंद्र से मरीजों को क्या व्यावहारिक फायदा होगा?
मरीजों को अब मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही उन्हें इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे दूरदराज शहरों की यात्रा से भी राहत मिलेगी, और हैल्सियन तकनीक की बदौलत उपचार सत्र कुछ मिनटों में पूरे हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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