झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में एआई और रोबोटिक तकनीक का नया अध्याय, रिम्स में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

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झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में एआई और रोबोटिक तकनीक का नया अध्याय, रिम्स में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

सारांश

झारखंड सरकार ने टीबी और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।

मुख्य बातें

टीबी और सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए एआई और रोबोटिक तकनीक का उपयोग।
रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत।
आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार।

रांची, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड सरकार राज्य में टीबी और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

इस क्रम में, सोमवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मेरील कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में 'टीबी मुक्त भारत' और 'सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत' जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एआई आधारित स्क्रीनिंग और रिम्स में रोबोटिक स्किल लैब की स्थापना के प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कंपनी के प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि एआई तकनीक के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर की प्रारंभिक पहचान अब अधिक सरल और लागत-कुशल तरीके से संभव हो सकेगी। इस प्रक्रिया के लिए किसी भारी मशीन की आवश्यकता नहीं होगी और एएनएम स्तर की स्वास्थ्यकर्मी भी जमीनी स्तर पर इसकी स्क्रीनिंग कर सकेंगी।

इसी प्रकार, टीबी की पहचान के लिए एआई आधारित एक्स-रे तकनीक के उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे बीमारी का जल्द पता चल सकेगा और आगे की जांच से ड्रग रेजिस्टेंस की स्थिति भी स्पष्ट की जा सकेगी।

अपर मुख्य सचिव ने इन तकनीकों की उपयोगिता को देखते हुए रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में रोबोटिक सर्जरी की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

कंपनी के विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि रोबोटिक तकनीक के उपयोग से जनरल सर्जरी, कैंसर, यूरोलॉजी और कार्डियक सर्जरी जैसे जटिल ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं। इस तकनीक में मरीज का ब्लड लॉस कम होता है और ऑपरेशन के बाद रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है। इसे आम मरीजों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि रोबोटिक सर्जरी की लागत का तुलनात्मक अध्ययन आयुष्मान भारत योजना और सीजीएचएस पैकेज की दरों के आधार पर किया जाए। विभाग इस दिशा में लागत आधारित पैकेज तैयार कर इसे पीपीपी मोड में लागू करने की संभावनाएं तलाश रहा है।

बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हीरेंद्र बिरूवा, सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पंकज बोदरा सहित स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से भविष्य में झारखंड के सरकारी अस्पतालों में भी आधुनिक और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में एआई और रोबोटिक तकनीक का स्वास्थ्य सेवाओं में क्या उपयोग होगा?
एआई और रोबोटिक तकनीक का उपयोग टीबी और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार और पहचान में किया जाएगा।
रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट कब शुरू होगा?
रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण जल्द ही शुरू किया जाएगा।
क्या एआई और रोबोटिक तकनीक के उपयोग से उपचार की लागत में कमी आएगी?
हां, एआई तकनीक के माध्यम से इलाज की प्रक्रिया अधिक किफायती और सुलभ होगी।
राष्ट्र प्रेस
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