दिल्ली में स्थापित होगा 'सुपर मेडिकल हब', सीएम रेखा गुप्ता ने एम्स जैसे एकीकृत संस्थान की घोषणा की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली में स्थापित होगा 'सुपर मेडिकल हब', सीएम रेखा गुप्ता ने एम्स जैसे एकीकृत संस्थान की घोषणा की

सारांश

दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रमुख सरकारी अस्पतालों को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर एक स्वायत्त संस्थान विकसित करने का निर्णय लिया है। यह कदम राजधानी में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक नया आयाम होगा।

मुख्य बातें

दिल्ली में बनने वाला नया सुपर मेडिकल हब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल की घोषणा की है।
प्रमुख अस्पतालों को एकीकृत किया जाएगा।
विशेषज्ञ उपचार और सुविधाएं बढ़ेंगी।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल किया जाएगा।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली सरकार राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं को और आधुनिक, सुलभ तथा प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सरकार ने राजधानी के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान जैसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी), दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर एक स्वायत्त संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

इसी प्रकार, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) को भविष्य में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान-2 के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

इस विषय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हाल ही में दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक में राजधानी के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों को एकीकृत करते हुए एक सशक्त और आधुनिक चिकित्सा तंत्र विकसित करने, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का समुचित और वैज्ञानिक उपयोग अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न संस्थानों के एकीकरण से डॉक्टरों, विशेषज्ञों, चिकित्सा उपकरणों और आधारभूत संरचना का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और मरीजों को अधिक सुव्यवस्थित तथा उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।

बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की स्थिति और मरीजों के दबाव पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कुल 650 बेड की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में लगभग 250 बेड ही उपयोग में हैं और करीब 400 बेड खाली पड़े हैं। दूसरी ओर, दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी अस्पताल में मरीजों की संख्या क्षमता से अधिक है। जीटीबी अस्पताल में लगभग 1,400 बेड की मूल क्षमता के मुकाबले 1,500 से अधिक बेड उपयोग में हैं।

मरीजों के आंकड़ों के अनुसार, जीटीबी अस्पताल में ओपीडी में लगभग 14 लाख से अधिक मरीज आते हैं और करीब 95 हजार मरीज इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) सेवाएं लेते हैं। वहीं, दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में लगभग 1.27 लाख ओपीडी मरीज और राजीव गांधी अस्पताल में लगभग 2.87 लाख ओपीडी मरीज दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जीटीबी अस्पताल पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है, जबकि कुछ अस्पतालों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अस्पतालों के एकीकरण के बाद विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का सुव्यवस्थित वितरण किया जाएगा ताकि मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार मिल सके। प्रस्ताव के अनुसार राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी और क्लीनिकल हेमेटोलॉजी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को कैंसर उपचार से संबंधित सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां रेडिएशन ऑनकोलॉजी, सर्जिकल ऑनकोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पेलिएटिव केयर और रेडियो इमेजिंग जैसी सेवाओं को समेकित किया जाएगा। वहीं, गुरु तेग बहादुर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स, इंटरनल मेडिसिन, ईएनटी, जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी, नेत्र रोग सहित कई विभागों को और मजबूत किया जाएगा।

सीएम रेखा गुप्ता के अनुसार समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण मौजुद हैं, लेकिन विशेषज्ञ स्टाफ की कमी और संसाधनों के बिखरे होने के कारण उनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उदाहरण के लिए राजीव गांधी अस्पताल में उन्नत ब्रोंकोस्कोपी सुविधा उपलब्ध है, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रेडियोथेरेपी के लिए लीनियर एक्सीलेरेटर मौजूद है, राजीव गांधी अस्पताल में कैथ लैब और इको लैब हैं, जबकि जीटीबी अस्पताल में बोन बैंक है। एकीकृत व्यवस्था के तहत इन सभी महंगे उपकरणों का बेहतर और समन्वित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास करना और राजधानी को चिकित्सा उत्कृष्टता का नया केंद्र बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कदम न केवल आवश्यक है, बल्कि एक सकारात्मक दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए एकीकृत प्रयासों का होना आवश्यक है, जिससे सभी अस्पतालों का समुचित उपयोग हो सके।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली का नया सुपर मेडिकल हब कब स्थापित होगा?
इसकी स्थापना की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और जल्द ही इसके लिए योजना बनाई जाएगी।
सुपर मेडिकल हब के लाभ क्या होंगे?
यह हब स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करेगा, जिससे उपचार में सुधार और मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी।
क्या सभी प्रमुख अस्पताल इस हब में शामिल होंगे?
हाँ, जीटीबी, डीएससीआई और आरजीएसएसएच जैसे प्रमुख अस्पतालों को इस हब में एकीकृत किया जाएगा।
क्या यह पहल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी है?
जी हाँ, इहबास को भी एकीकृत किया जाएगा और इसे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान-2 के रूप में विकसित किया जाएगा।
क्या इस योजना का वित्त पोषण कैसे होगा?
वित्त पोषण की प्रक्रिया और स्रोतों की जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले