भारत-टास्क फोर्स: कैंसर और टीबी की पहचान में एआई का योगदान
सारांश
Key Takeaways
- भारत-टास्क फोर्स का गठन स्वास्थ्य और कृषि में एआई अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
- कैंसर और टीबी की प्रारंभिक पहचान के लिए एआई उपकरण विकसित किए जाएंगे।
- यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने भारत-टास्क फोर्स की स्थापना की है। इस टास्क फोर्स का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और कृषि में एआई आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।
यह पहल पुरानी परंपराओं और आधुनिक तकनीकों का संयोजन करेगी। इसके साथ ही, आयुर्वेद के सिद्धांतों और शरीर की संरचना (जीनोम) के डेटा को जोड़कर स्वास्थ्य की बेहतर समझ विकसित की जाएगी। इससे कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान संभव हो पाएगी। एआई का उपयोग फसल पूर्वानुमान, मौसम की भविष्यवाणी आदि में भी किया जाएगा।
भारत-टास्क फोर्स, जिसे बीएचयू होलिस्टिक एआई-ड्रिवन रिसर्च फॉर एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड हेल्थ के नाम से भी जाना जाता है, विश्वविद्यालय को स्वदेशी, नैतिक और साक्ष्य-आधारित एआई समाधान के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगा। टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एकीकृत एआई प्रोटोकॉल का विकास करना है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह टास्क फोर्स पूर्वांचल क्षेत्र की आवश्यकताओं के आधार पर प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स विकसित करेगी। इसके अंतर्गत कैंसर और क्षय रोग जैसी विभिन्न बीमारियों की प्रारंभिक पहचान के लिए एआई उपकरण बनाए जाएंगे। साथ ही, फसल उत्पादन पूर्वानुमान, कीट प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी जैसे जलवायु-अनुकूल कृषि समाधान पर भी कार्य किया जाएगा।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि भारत-टास्क फोर्स का प्रमुख उद्देश्य अंतर्विषयी क्षमता निर्माण करना है। यह एक नई पीढ़ी के वैज्ञानिक-समन्वयकों को तैयार करने में मदद करेगी, जिससे तकनीकी नवाचार और जीवन विज्ञान के बीच की दूरी घटेगी। इस टास्क फोर्स में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख शिक्षक और विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें चिकित्सा विज्ञान, प्रसूति एवं स्त्री रोग, दंत चिकित्सा, आयुर्वेद, जैव प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर विज्ञान, कृषि विज्ञान, एग्रोनॉमी, सांख्यिकी, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान और आईआईटी (बीएचयू) के विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह पहल भारत सरकार की एसएएचआई (भारत के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति) और बोध (स्वास्थ्य एआई के लिए ओपन डेटा प्लेटफॉर्म बेंचमार्किंग) रूपरेखाओं के अनुरूप है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुसार भी है। इसके अलावा, यह प्रधानमंत्री मोदी के एआई शिखर सम्मेलन में व्यक्त उनके दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन एआई महाशक्तियों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।