क्या एनएचए और आईआईटी कानपुर के बीच डिजिटल हेल्थ में ‘मेड इन इंडिया’ मॉडल का समझौता हुआ?

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क्या एनएचए और आईआईटी कानपुर के बीच डिजिटल हेल्थ में ‘मेड इन इंडिया’ मॉडल का समझौता हुआ?

सारांश

कानपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और आईआईटी कानपुर के बीच डिजिटल हेल्थ के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है। जानें, इससे किस प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा!

Key Takeaways

  • डिजिटल हेल्थ वर्कशॉप का आयोजन
  • एआई मॉडल्स की टेस्टिंग के लिए ओपन प्लेटफॉर्म
  • बिहार में डिजिटल स्वास्थ्य की पहल
  • हेल्थ क्लेम एक्सचेंज से पारदर्शिता में वृद्धि
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत फेडरेटेड डेटा आर्किटेक्चर

कानपुर, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और आईआईटी कानपुर ने एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, आईआईटी कानपुर में एक डिजिटल हेल्थ वर्कशॉप का आयोजन किया गया है, जिसका उद्देश्य हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित और विश्वसनीय उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने बताया कि इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य एआई मॉडल्स की परीक्षण के लिए एक ओपन बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हेल्थकेयर में उपयोग होने वाले एआई मॉडल न केवल विकसित हों, बल्कि उनकी प्रमाणिकता और उपयोगिता की भी जांच की जा सके, ताकि डॉक्टर और अस्पताल उन पर भरोसा कर सकें।

उन्होंने कहा कि आज एआई मॉडल बनाना सरल है, लेकिन वे अक्सर सीमित डेटा पर आधारित होते हैं। भारत जैसे विविध देश में किसी मॉडल की सटीकता बिना व्यापक परीक्षण के तय नहीं की जा सकती। इसी कारण से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत फेडरेटेड डेटा आर्किटेक्चर अपनाया जा रहा है, जिसमें डेटा को केंद्रीकृत किए बिना, मरीज की सहमति और प्राइवेसी के साथ एआई परीक्षण किया जा सकेगा।

डॉ. बर्नवाल ने बताया कि इस मिशन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं: नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आईडी, अस्पतालों के लिए हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, और डॉक्टरों के लिए हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री

इनके जरिए एक सत्यापित डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। साथ ही हेल्थ क्लेम एक्सचेंज के माध्यम से इंश्योरेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिससे प्रीमियम का आकलन भी निष्पक्ष और सटीक हो सके।

उन्होंने बताया कि बिहार इस दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभरा है, जहां मुख्यमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य योजना के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में मैन्युअल के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं। लक्ष्य यह है कि हर नागरिक अपने पिछले १० वर्षों के इलाज और मेडिकल रिपोर्ट्स को एक क्लिक में देख सके।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ऋतू महेश्वरी भी उपस्थित रहीं और उन्होंने राज्य में डिजिटल हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को तेजी से अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।

उत्तर प्रदेश मेडिकल हेल्थ की सेक्रेटरी ऋतू महेश्वरी ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम के तहत यूपी में एआई मिशन की घोषणा की गई है, जिसके लिए दो हजार करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। यह एक बड़ा प्रोग्रेसिव कदम है। प्रदेश में आगे जो डिजिटल गतिविधियां होंगी और विभिन्न सेक्टरों में एआई के उपयोग के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हाल ही में हमने दो दिवसीय एआई इन हेल्थ कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की थी, जिसमें न केवल देश के बल्कि वैश्विक विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया था।

Point of View

यह समझौता डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने का वादा करता है, बल्कि यह भारत में डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य हेल्थ सेक्टर में एआई के सुरक्षित और भरोसेमंद उपयोग को बढ़ावा देना है।
कौन से तीन प्रमुख स्तंभ इस मिशन के अंतर्गत हैं?
इस मिशन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं: आभा आईडी, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, और हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री।
बिहार किस प्रकार एक रोल मॉडल बनकर उभरा है?
बिहार में मुख्यमंत्री की डिजिटल स्वास्थ्य योजना के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में मैन्युअल की जगह डिजिटल रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं।
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