सफदरजंग अस्पताल में विश्व की पहली रोबोटिक एवी वाल्व सर्जरी, भारत ने रचा चिकित्सा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल (वीएमएमसी) के चिकित्सकों ने 2 अगस्त 2026 को चिकित्सा विज्ञान में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की — दुनिया में पहली बार किसी वयस्क मरीज की रोबोटिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, जो अत्यंत दुर्लभ जन्मजात हृदय विकृतियों से ग्रस्त था। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि वैश्विक हृदय शल्य चिकित्सा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है।
मरीज की जटिल हृदय स्थिति
जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया, वह एक साथ दो अत्यंत दुर्लभ जन्मजात हृदय विकारों से पीड़ित था। पहली स्थिति थी कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (सीसीटीजीए), जिसमें हृदय के निचले कक्ष सामान्य स्थिति से उलटे होते हैं और दाहिने हिस्से को पूरे शरीर में रक्त पहुँचाने का असामान्य दबाव वहन करना पड़ता है। दूसरी स्थिति डेक्स्ट्रोकार्डिया थी, जिसमें हृदय सामान्य बाईं ओर के बजाय दाईं ओर स्थित होता है।
इन दोनों विकृतियों के संयुक्त प्रभाव से मरीज का एवी वाल्व गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था और हृदय की कार्यक्षमता लगातार घट रही थी। यह ऐसे समय में आया है जब जन्मजात हृदय रोगों से पीड़ित वयस्क मरीजों की संख्या वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है और उनके उपचार के विकल्प सीमित हैं।
सर्जरी की तैयारी और नई तकनीक
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी के लिए कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग की टीम ने पहले मरीज के सीटी स्कैन की थ्री-डी इमेजिंग तैयार की, ताकि हृदय की जटिल शारीरिक संरचना को पूरी तरह समझा जा सके। इसके बाद ऑपरेशन की विस्तृत योजना बनाई गई।
गौरतलब है कि सामान्यतः रोबोटिक हार्ट सर्जरी छाती के दाईं ओर से की जाती है। किंतु इस मरीज का हृदय दाईं ओर स्थित होने के कारण चिकित्सकों ने पूरी तकनीक को पुनर्गठित करते हुए बाईं ओर से रोबोटिक सर्जरी की — एक ऐसा तरीका जो चिकित्सा इतिहास में पहली बार अपनाया गया।
सर्जिकल प्रक्रिया और उपकरण
सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी (स्टर्नम) काटने के बजाय छोटे-छोटे छिद्रों (की-होल इंसीजन) के माध्यम से रोबोटिक उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3डी विज़ुअल सिस्टम का उपयोग किया गया। इससे अत्यंत सटीकता के साथ क्षतिग्रस्त वाल्व को प्रतिस्थापित किया गया और ऑपरेशन सफल रहा।
ऑपरेशन का नेतृत्व सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुभव गुप्ता ने किया, जबकि अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने यह उपलब्धि अर्जित की।
रोबोटिक सर्जरी के लाभ
इस न्यूनतम-आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) तकनीक के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। स्टर्नम न काटने से मरीज को दर्द काफी कम होता है। रक्त की हानि भी न्यूनतम रहती है और संक्रमण का जोखिम उल्लेखनीय रूप से घट जाता है। इसके अलावा मरीज पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी की तुलना में बहुत जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
विशेषज्ञ राय और भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल सर्जरी नहीं, बल्कि भारत के सरकारी अस्पतालों की बढ़ती तकनीकी क्षमता का ठोस प्रमाण है। यह साबित करती है कि देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में विश्वस्तरीय, अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
यह ऐतिहासिक सफलता आने वाले वर्षों में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए नई संभावनाएँ खोलेगी और वैश्विक स्तर पर सर्जनों के लिए एक नई तकनीक तथा शोध का आधार बनेगी।