आरएमएल अस्पताल में देश का पहला इमर्शन कूलिंग सेंटर, हीटस्ट्रोक के इलाज में क्रांतिकारी कदम
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ने 22 मई 2026 को भारत की पहली इमर्शन कूलिंग सुविधा का संचालन शुरू किया, जो हीटस्ट्रोक के गंभीर मामलों में मरीज के शरीर को ठंडे पानी में डुबोकर तेज़ी से तापमान घटाने की आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है।
क्या है इमर्शन कूलिंग तकनीक
इमर्शन कूलिंग एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें हीटस्ट्रोक से पीड़ित मरीज के शरीर को ठंडे पानी के टब में रखकर शरीर का तापमान तेज़ी से सामान्य स्तर पर लाया जाता है। डॉ. अजय चौहान ने बताया, "दुनिया भर में इमर्शन कूलिंग को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है, लेकिन भारत में पहले ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं थी। इसलिए हमने विचार-विमर्श कर पहली बार इसे आरएमएल अस्पताल में शुरू किया।" इस केंद्र में आइस टब, बाथ टब, कूलिंग सिस्टम, पंखे और एयर कंडीशनिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
हीट वेव सेंटर की पृष्ठभूमि
अस्पताल का यह विशेष हीट वेव सेंटर वर्ष 2024 से संचालित हो रहा है। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम की देखरेख में विकसित की गई है, जो राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के तहत कार्य करता है। यह केंद्र 24 घंटे संचालित रहता है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके।
अब तक के परिणाम
डॉ. चौहान के अनुसार, गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्याओं से पीड़ित दो मरीजों का इस सुविधा के ज़रिए सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है और उन्हें स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन के कारण देश में हीटस्ट्रोक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे देखते हुए विशेष कूलिंग गाइडलाइन भी तैयार की गई है।
देशभर में विस्तार की तैयारी
आरएमएल अस्पताल के इस मॉडल को अब देश के अन्य अस्पताल भी अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। हर साल गर्मी का प्रकोप बढ़ने के मद्देनज़र यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञ की सलाह
डॉ. चौहान ने आम जनता से हीटवेव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने सलाह दी कि अत्यधिक ज़रूरी न हो तो दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। उन्होंने लस्सी, छाछ और बेल के शरबत जैसे पेय पदार्थों के सेवन की सिफारिश करते हुए कहा कि बुजुर्गों और बच्चों का इस मौसम में विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। आने वाले महीनों में इस केंद्र की क्षमता और विस्तार का ब्यौरा स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अपेक्षित है।