12 अगस्त 2026
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स्टेम सेल से हृदय वाल्व टिशू निर्माण में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, बच्चों के इलाज की नई उम्मीद

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स्टेम सेल से हृदय वाल्व टिशू निर्माण में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, बच्चों के इलाज की नई उम्मीद

सारांश

ऑस्ट्रेलिया के MCRI वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल से मानव हृदय वाल्व जैसा ऊतक प्रयोगशाला में तैयार कर दिया है — यह खोज दुनिया के 2.8 करोड़ हृदय वाल्व रोगियों, खासकर बच्चों के लिए, बार-बार की सर्जरी से मुक्ति की उम्मीद लेकर आई है।

मुख्य बातें

मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (MCRI) , मेलबर्न के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल से मानव हृदय वाल्व जैसा ऊतक प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक तैयार किया।
यह शोध प्रतिष्ठित पत्रिका 'सेल स्टेम सेल' में 12 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ।
दुनिया भर में करीब 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से पीड़ित हैं; फिलहाल कोई पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं।
शोध में रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) के सूजनकारी प्रोटीन के संपर्क में आने पर ऊतकों में रोगग्रस्त वाल्व जैसे जैविक संकेतक दिखे।
प्रोफेसर एंजो पोरेल्लो के अनुसार, भविष्य में ऐसे वाल्व बनाए जा सकते हैं जो बच्चे के शरीर के साथ बढ़ें और बार-बार सर्जरी की जरूरत खत्म करें।

मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (MCRI), मेलबर्न के वैज्ञानिकों ने 12 अगस्त 2026 को चिकित्सा विज्ञान में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की — उन्होंने प्रयोगशाला में स्टेम सेल की सहायता से मानव हृदय वाल्व जैसा ऊतक (टिशू) सफलतापूर्वक तैयार किया है। यह शोध प्रतिष्ठित पत्रिका 'सेल स्टेम सेल' में प्रकाशित हुआ है और दुनिया भर में 2.8 करोड़ से अधिक हृदय वाल्व रोगियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

शोध में क्या हासिल हुआ

MCRI के हार्ट रीजेनरेशन ग्रुप के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में प्रयोगशाला में विकसित हृदय वाल्व ऊतक, मानव शरीर के वास्तविक वाल्व की तरह बढ़ते और व्यवहार करते देखे गए। MCRI की हार्ट रीजेनरेशन ग्रुप की टीम लीडर हॉली वोगेस ने कहा कि यह सफलता क्षतिग्रस्त हृदय वाल्व की मरम्मत के लिए ऐसे उपचार विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिनमें शरीर की अपनी कोशिकाओं का उपयोग किया जा सके।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक से अब यह समझना संभव होगा कि जन्म से वयस्क होने तक हृदय वाल्व किस प्रकार विकसित होते हैं और बीमारी या संक्रमण के कारण उनमें क्या परिवर्तन आते हैं।

रूमेटिक हार्ट डिजीज पर महत्वपूर्ण प्रयोग

इस शोध की विशेष उपलब्धि यह रही कि वैज्ञानिकों ने तैयार ऊतक का उपयोग रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) को समझने के लिए भी किया। जब RHD से जुड़े सूजनकारी प्रोटीन इन ऊतकों के संपर्क में लाए गए, तो ऊतक कठोर हो गए और उनमें वही जैविक संकेतक दिखाई दिए जो रोगग्रस्त मानव हृदय वाल्व में पाए जाते हैं।

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में RHD का असर वहाँ की स्वदेशी आबादी पर अपेक्षाकृत अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नया प्रयोगशाला मॉडल इस बीमारी की गहरी समझ और भविष्य में बेहतर उपचार विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

बच्चों के लिए क्यों है यह खोज खास

वर्तमान में हृदय वाल्व प्रत्यारोपण की एक बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे के शारीरिक विकास के साथ कृत्रिम वाल्व को भी बदलना पड़ सकता है, जिससे बार-बार सर्जरी की नौबत आती है। MCRI के प्रोफेसर एंजो पोरेल्लो के अनुसार, भविष्य में इसी तकनीक से ऐसे हृदय वाल्व बनाए जा सकते हैं जो मरीज के शरीर के साथ-साथ बढ़ें और बदलती जरूरतों के अनुसार स्वयं को ढाल सकें।

यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में बाल हृदय रोग (Congenital Heart Disease) के मामले बढ़ रहे हैं और उपयुक्त उपचार विकल्पों की कमी एक बड़ी वैश्विक चुनौती बनी हुई है।

हृदय वाल्व रोग की वैश्विक चुनौती

विश्व भर में करीब 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके पीछे जन्मजात समस्याएँ, संक्रमण और उम्र के साथ वाल्व का कमजोर होना जैसे कारण होते हैं। फिलहाल क्षतिग्रस्त वाल्व को पूरी तरह ठीक करने का कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है और अधिकांश मरीजों को वाल्व प्रत्यारोपण सर्जरी पर निर्भर रहना पड़ता है।

आगे क्या होगा

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक अभी प्रारंभिक चरण में है और आगे के परीक्षणों में इसकी सफलता पर नैदानिक उपयोग की संभावना निर्भर करेगी। यदि यह शोध अगले चरणों में सफल रहा, तो स्टेम सेल आधारित हृदय वाल्व चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल सकते हैं — विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जिन्हें जन्मजात हृदय रोग के कारण जीवनभर सर्जरी का सामना करना पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रयोगशाला से अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर तक की यात्रा लंबी और जटिल होती है — जैव-चिकित्सा इतिहास इसका गवाह है। RHD का बोझ ऑस्ट्रेलिया की स्वदेशी आबादी और विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक है, इसलिए असली प्रश्न यह है कि क्या यह तकनीक व्यावसायिक रूप से सुलभ और किफायती बन पाएगी। बच्चों के लिए 'बढ़ने वाले वाल्व' की संकल्पना चिकित्सकीय रूप से क्रांतिकारी है, परंतु नैदानिक परीक्षणों, नियामकीय अनुमोदन और वैश्विक पहुँच के बिना यह केवल एक वैज्ञानिक वादा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल से हृदय वाल्व टिशू कैसे तैयार किया?
MCRI के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल का उपयोग करके प्रयोगशाला में ऐसा ऊतक विकसित किया जो मानव हृदय वाल्व की तरह बढ़ता और व्यवहार करता है। यह शोध 'सेल स्टेम सेल' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
यह शोध बच्चों के हृदय रोग के इलाज के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
बच्चों में वर्तमान वाल्व प्रत्यारोपण की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शरीर के बढ़ने के साथ वाल्व को बार-बार बदलना पड़ता है। स्टेम सेल आधारित वाल्व शरीर के साथ बढ़ सकते हैं, जिससे बार-बार की सर्जरी की जरूरत खत्म हो सकती है।
रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) क्या है और इस शोध से इसे कैसे समझा गया?
RHD एक ऐसी बीमारी है जिसमें संक्रमण के कारण हृदय वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने RHD से जुड़े सूजनकारी प्रोटीन को तैयार ऊतकों के संपर्क में लाया, जिससे ऊतकों में वही जैविक संकेतक दिखाई दिए जो रोगग्रस्त वाल्व में पाए जाते हैं।
हृदय वाल्व रोग से दुनिया में कितने लोग प्रभावित हैं?
विश्व भर में करीब 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके कारणों में जन्मजात समस्याएँ, संक्रमण और उम्र के साथ वाल्व का कमजोर होना शामिल हैं।
यह तकनीक मरीजों के लिए कब तक उपलब्ध हो सकती है?
यह तकनीक अभी प्रारंभिक शोध चरण में है और नैदानिक उपयोग के लिए आगे के परीक्षणों तथा नियामकीय अनुमोदन की जरूरत होगी। वैज्ञानिकों ने अभी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है।
राष्ट्र प्रेस
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