दिल की धड़कन कैंसर कोशिकाओं को करती है नष्ट, Science जर्नल की स्टडी में बड़ा खुलासा

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दिल की धड़कन कैंसर कोशिकाओं को करती है नष्ट, Science जर्नल की स्टडी में बड़ा खुलासा

सारांश

Science जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी के अनुसार दिल की धड़कन से उत्पन्न मैकेनिकल दबाव कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। इटली के वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग कर साबित किया कि धड़कते दिल में कैंसर केवल 20%25 ऊतकों तक सीमित रहा, जबकि स्थिर दिल में यह तेजी से फैला।

Key Takeaways

  • Science जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी के अनुसार दिल की धड़कन से उत्पन्न मैकेनिकल दबाव कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकता है।
  • इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रिएस्टे की वैज्ञानिक सेरेना जाखिना ने इस शोध का नेतृत्व किया।
  • धड़कते दिल में कैंसर केवल 20 फीसदी ऊतकों तक सीमित रहा, जबकि स्थिर दिल में यह तेजी से फैला।
  • इंसानों में प्राथमिक कार्डियक ट्यूमर केवल 1 फीसदी से कम पोस्टमॉर्टम में पाए जाते हैं।
  • यह शोध भविष्य में मैकेनो-थेरेपी आधारित कैंसर उपचार की दिशा खोल सकता है।
  • अभी यह अध्ययन प्रारंभिक चरण में है; मनुष्यों पर परीक्षण के लिए और शोध आवश्यक है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रतिष्ठित जर्नल Science में प्रकाशित एक नई और महत्वपूर्ण रिसर्च ने यह स्पष्ट किया है कि दिल की लगातार धड़कन से उत्पन्न होने वाला मैकेनिकल दबाव कैंसर कोशिकाओं के विकास को प्रभावी रूप से रोक सकता है। इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रिएस्टे में सेरेना जाखिना और उनकी टीम द्वारा किए गए इस शोध ने यह समझाने की कोशिश की है कि आखिर दिल में कैंसर इतना दुर्लभ क्यों होता है।

दिल में कैंसर क्यों है इतना दुर्लभ?

वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर के लगभग हर अंग में ट्यूमर विकसित हो सकता है, लेकिन हृदय में कैंसर के मामले बेहद कम पाए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, इंसानों में प्राथमिक कार्डियक ट्यूमर — यानी जो सीधे दिल में उत्पन्न होते हैं — केवल 1 फीसदी से भी कम पोस्टमॉर्टम में पाए गए हैं। वहीं, शरीर के अन्य हिस्सों से फैलकर दिल तक पहुंचने वाले सेकेंडरी ट्यूमर करीब 18 फीसदी मामलों में देखे गए हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से जुड़े वैज्ञानिक जेम्स चोंग का कहना है कि यह नई स्टडी इस पुराने रहस्य को सुलझाने के लिए एक "मजबूत और विश्वसनीय वैज्ञानिक आधार" प्रस्तुत करती है।

चूहों पर किया गया अनोखा प्रयोग

शोधकर्ताओं ने जेनेटिकली मॉडिफाइड चूहों के शरीर के बाहर — गर्दन पर — एक अतिरिक्त हृदय प्रत्यारोपित किया। यह बाहरी दिल रक्त आपूर्ति तो प्राप्त कर रहा था, लेकिन धड़क नहीं रहा था। इसके बाद दोनों दिलों — धड़कते (नॉर्मल) और स्थिर (बाहरी) — में कैंसर कोशिकाएं इंजेक्ट की गईं।

परिणाम चौंकाने वाले रहे। मात्र दो सप्ताह के भीतर, स्थिर दिल में कैंसर कोशिकाएं तेजी से फैलीं और अधिकांश स्वस्थ कोशिकाओं की जगह ले ली। इसके विपरीत, धड़कते दिल में केवल लगभग 20 फीसदी ऊतकों पर ही कैंसर का प्रभाव देखा गया — यह अंतर वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

लैब में तैयार हृदय ऊतक पर भी परीक्षण

वैज्ञानिकों ने लैब में चूहे की हृदय कोशिकाओं से कृत्रिम हार्ट टिश्यू (इंजीनियर्ड हार्ट टिश्यू) भी तैयार किया। यह ऊतक कैल्शियम आयन के संपर्क में आने पर धड़कता था — ठीक उसी तरह जैसे शरीर के भीतर हृदय कार्य करता है।

जब इस ऊतक में फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाएं डाली गईं, तो पाया गया कि स्थिर ऊतक में कैंसर तेजी से फैला और अधिक क्षेत्र घेर लिया। जबकि धड़कते ऊतक में कैंसर कोशिकाएं सीमित रहीं और केवल बाहरी परतों में सिमटकर रह गईं।

भविष्य के कैंसर उपचार की नई राह

यह शोध स्पष्ट संकेत देता है कि हृदय की निरंतर गति और उससे उत्पन्न मैकेनिकल फोर्स कैंसर कोशिकाओं के लिए एक प्रतिकूल वातावरण निर्मित करती है, जिससे उनका विकास अवरुद्ध हो जाता है। यह खोज भविष्य में मैकेनो-थेरेपी यानी यांत्रिक बल आधारित कैंसर उपचार की नींव रख सकती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे सीधे मनुष्यों पर लागू करने से पहले व्यापक शोध आवश्यक है। फिर भी, यह खोज कैंसर विज्ञान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में मैकेनोबायोलॉजी — यानी यांत्रिक बलों का जैविक प्रभाव — एक उभरती हुई शाखा है। यह स्टडी इस क्षेत्र को नई ऊर्जा और दिशा दे सकती है। आने वाले वर्षों में इस पर बड़े क्लिनिकल ट्रायल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

बल्कि कैंसर अनुसंधान की पूरी सोच को चुनौती देती है। अब तक कैंसर के उपचार में रासायनिक और विकिरण आधारित तरीकों पर जोर रहा है, लेकिन यह शोध बताता है कि शरीर के भीतर मौजूद यांत्रिक बल — जैसे दिल की धड़कन — भी एक शक्तिशाली जैविक ढाल हो सकते हैं। विडंबना यह है कि हम वर्षों से दिल को एक कमजोर अंग मानते आए हैं, जबकि यही अंग कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत प्राकृतिक रक्षक निकला। मैकेनोबायोलॉजी को अब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) जैसी संस्थाओं को भी गंभीरता से अपने एजेंडे में शामिल करना चाहिए।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल में कैंसर इतना कम क्यों होता है?
नई स्टडी के अनुसार, दिल की निरंतर धड़कन से उत्पन्न मैकेनिकल दबाव कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है। यही कारण है कि प्राथमिक कार्डियक ट्यूमर 1 फीसदी से भी कम पोस्टमॉर्टम में पाए जाते हैं।
यह कैंसर स्टडी किसने और कहां की?
यह शोध इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रिएस्टे में वैज्ञानिक सेरेना जाखिना और उनकी टीम ने किया। यह स्टडी प्रतिष्ठित जर्नल Science में प्रकाशित हुई है।
चूहों पर किए गए प्रयोग में क्या पाया गया?
धड़कते दिल में कैंसर केवल 20 फीसदी ऊतकों तक सीमित रहा, जबकि स्थिर (नॉन-बीटिंग) दिल में कैंसर कोशिकाएं तेजी से फैलकर अधिकांश स्वस्थ कोशिकाओं की जगह ले लीं। यह अंतर दो सप्ताह के भीतर देखा गया।
क्या यह खोज इंसानों पर भी लागू होती है?
अभी यह शोध प्रारंभिक चरण में है और केवल चूहों पर परीक्षण किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसे मनुष्यों पर लागू करने से पहले और अधिक शोध की आवश्यकता है।
इस स्टडी से भविष्य के कैंसर इलाज पर क्या असर पड़ेगा?
यह खोज मैकेनो-थेरेपी यानी यांत्रिक बल आधारित कैंसर उपचार की नींव रख सकती है। भविष्य में टिश्यू मूवमेंट या मैकेनिकल फोर्स का उपयोग कर कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।
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