कान की सेहत पर WHO की चेतावनी: 9.5 करोड़ बच्चे बहरेपन के शिकार, जानें बचाव के जरूरी उपाय
सारांश
Key Takeaways
- 9.51 करोड़ बच्चे (5-19 वर्ष) दुनियाभर में श्रवण हानि से पीड़ित हैं — WHO का आंकड़ा।
- वॉल्यूम 60%25 से कम रखना सुनने की क्षमता बचाने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय है।
- इयरप्लग का उपयोग शोरगुल भरे वातावरण में कानों को स्थायी नुकसान से बचाता है।
- नॉइज-कैंसलिंग हेडफोन गेमर्स और संगीत प्रेमियों के लिए WHO की विशेष सिफारिश है।
- नियमित श्रवण परीक्षण जरूरी है — किसी भी असुविधा पर तुरंत ENT विशेषज्ञ से मिलें।
- वर्ष 2050 तक 250 करोड़ से अधिक लोगों में श्रवण हानि का अनुमान — WHO की वैश्विक चेतावनी।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कान की सेहत को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। दुनियाभर में 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 9.51 करोड़ बच्चे श्रवण हानि यानी सुनने की समस्या के साथ जीवन बिता रहे हैं। WHO का कहना है कि छोटी-छोटी लापरवाहियां कानों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे बचाव अभी से जरूरी है।
श्रवण हानि: एक बढ़ता वैश्विक संकट
WHO के आंकड़े बताते हैं कि सुनने की क्षमता का नुकसान अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रही — यह बच्चों और युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। तेज आवाज में संगीत सुनना, गेमिंग हेडफोन का लंबे समय तक उपयोग और शोरगुल भरे वातावरण में काम करना इसके प्रमुख कारण हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2050 तक दुनियाभर में 250 करोड़ से अधिक लोगों में किसी न किसी स्तर की श्रवण हानि होने का अनुमान WHO ने पहले ही जताया है।
भारत के संदर्भ में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है क्योंकि देश में स्मार्टफोन और हेडफोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है, खासकर कोरोना महामारी के बाद से। ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और ओटीटी कंटेंट की बाढ़ ने बच्चों के कान पर अतिरिक्त बोझ डाला है।
तेज आवाज से बचाव के जरूरी उपाय
WHO की सलाह के अनुसार, सुनने की क्षमता बचाने के लिए सबसे पहला कदम है — वॉल्यूम लेवल को हमेशा 60 प्रतिशत से कम रखना। यह नियम हेडफोन, स्पीकर और स्मार्टफोन — सभी पर लागू होता है।
जो लोग शोरगुल भरे कार्यस्थलों जैसे कारखानों, निर्माण स्थलों या ट्रैफिक-घने इलाकों में काम करते हैं, उनके लिए इयरप्लग का नियमित उपयोग अनिवार्य बताया गया है। यह एक सस्ता लेकिन अत्यंत प्रभावशाली उपाय है जिसे अधिकांश लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
संगीत प्रेमियों और गेमर्स के लिए विशेष सुझाव
जो लोग लाइव कॉन्सर्ट या म्यूजिक इवेंट में जाते हैं, उन्हें स्पीकर से पर्याप्त दूरी बनाकर रखनी चाहिए और इयरप्लग का उपयोग करना चाहिए। इवेंट के बाद कानों को आराम देने के लिए कम से कम एक 'शांत दिन' रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा स्मार्टफोन ऐप्स की मदद से आसपास के साउंड लेवल को नियमित रूप से मॉनिटर किया जा सकता है।
गेमिंग के शौकीनों के लिए WHO ने सुझाव दिया है कि वे ऐसे डिवाइस चुनें जिनमें नॉइज-कैंसलिंग फीचर हो। इससे बाहरी शोर कम होता है और कम वॉल्यूम पर भी स्पष्ट सुनाई देता है। स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना भी जरूरी है ताकि हेडफोन का लगातार उपयोग न हो।
नियमित जांच और सामाजिक जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित श्रवण परीक्षण (Hearing Test) उतना ही जरूरी है जितना आंखों या दांतों की जांच। अगर सुनने में कोई भी असुविधा महसूस हो — जैसे आवाजें धीमी लगना, कानों में घंटी बजना या बातें ठीक से न समझ पाना — तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर हियरिंग एड या अन्य श्रवण सहायक उपकरणों का उपयोग करने में संकोच नहीं करना चाहिए। समाज में श्रवण बाधित लोगों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले समय में WHO और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हियरिंग हेल्थ को लेकर जागरूकता अभियान और तेज किए जाने की उम्मीद है। विश्व श्रवण दिवस (3 मार्च) के अवसर पर हर साल इस मुद्दे पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया जाता है, लेकिन वर्षभर सतर्कता ही असली बचाव है।