गर्मियों में गुस्सा और चिड़चिड़ापन? आयुर्वेद के ये 5 उपाय करेंगे पित्त शांत
सारांश
Key Takeaways
- गर्मियों में पित्त दोष बढ़ने से गुस्सा, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
- हर्बल टी में तुलसी, गुलाब, कैमोमाइल और पैशनफ्लावर मिलाकर दिन में दो बार पीने से राहत मिलती है।
- घी नस्य यानी रात को नाक में घी डालने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और तनाव कम होता है।
- चंदन लेपन माथे पर लगाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है।
- भृंगराज या नारियल तेल से सिर और तलवों की मालिश गर्मियों में पित्त और वात दोनों को संतुलित करती है।
- ज्येष्ठ माह में दिन में विश्राम और हल्के शीतल आहार का सेवन आयुर्वेद में अनिवार्य माना गया है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गर्मियों के मौसम में पित्त दोष के बढ़ने से शरीर और मन दोनों असंतुलित हो जाते हैं, जिससे गुस्सा, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को भीतर से शीतल रखने और सही दिनचर्या अपनाने से इन समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल और प्रभावी उपाय अपनाकर इस मौसम में मानसिक शांति बनाए रखी जा सकती है।
गर्मियों में पित्त क्यों बढ़ता है?
आयुर्वेद के अनुसार, ज्येष्ठ माह यानी गर्मियों के चरम काल में शरीर का पित्त दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। बाहरी तापमान के साथ-साथ शरीर की आंतरिक ऊष्मा भी अनियंत्रित होने लगती है।
इसके परिणामस्वरूप छोटी-छोटी बातों पर क्रोध, अधीरता, सिर में भारीपन, जलन और भीतरी अशांति जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। ये सभी संकेत शरीर में बढ़े हुए पित्त की ओर इशारा करते हैं।
हर्बल टी से मिलेगी राहत
गर्मियों में चाय और कॉफी का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि ये शरीर की आंतरिक गर्मी को और अधिक बढ़ा देते हैं तथा जलन की समस्या पैदा करते हैं।
इनकी जगह हर्बल टी को अपनाएं जिसमें तुलसी, गुलाब की पत्तियां, पैशनफ्लावर और कैमोमाइल का मिश्रण हो। इस हर्बल टी को दिन में दो बार पीने से हॉर्मोन संतुलित होते हैं और तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है।
घी नस्य और चंदन लेपन का प्रभाव
घी नस्य एक प्राचीन आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें रात को सोने से पहले नाक में शुद्ध घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया शरीर के रूखेपन को दूर करती है, तंत्रिका तंत्र को शांत करती है और मस्तिष्क को आराम देती है।
चंदन की तासीर प्राकृतिक रूप से ठंडी होती है। माथे पर चंदन का लेप लगाने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और पित्त जनित क्रोध व अशांति में तुरंत राहत मिलती है। यह उपाय विशेष रूप से गर्मियों में बेहद कारगर माना जाता है।
तेल मालिश से मिलेगी तुरंत शांति
भृंगराज तेल या नारियल तेल से सिर और तलवों की मालिश करना गर्मियों में गुस्से और बेचैनी दोनों को नियंत्रित करने का एक अत्यंत प्रभावी तरीका है।
यह मालिश शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालती है और वात-पित्त दोनों को संतुलित करती है। नियमित रूप से यह मालिश करने पर नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
दिनचर्या में विश्राम को दें प्राथमिकता
आयुर्वेद में ज्येष्ठ माह में दिन में थोड़ा विश्राम करने की परंपरागत सलाह दी जाती है। इससे शरीर की ऊर्जा संरक्षित रहती है और मन की स्थिरता बनी रहती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में हल्का, सुपाच्य और शीतल आहार लें, तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं और धूप में अनावश्यक निकलने से बचें। इन सभी उपायों को मिलाकर अपनाने से पित्त स्वतः संतुलित रहता है और गर्मियों में मानसिक शांति बनाए रखना संभव हो जाता है।
आने वाले महीनों में जैसे-जैसे तापमान और बढ़ेगा, इन आयुर्वेदिक उपायों की प्रासंगिकता और भी अधिक हो जाएगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस मौसम में आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने की दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं।