शरद पवार ने चीनी निर्यात प्रतिबंध को बताया 'आर्थिक रूप से विनाशकारी', तत्काल वापसी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार, 14 मई को पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार के चीनी निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध की कड़ी आलोचना करते हुए इसे महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के लिए 'आर्थिक रूप से विनाशकारी' करार दिया। उन्होंने इस नीति पर तत्काल पुनर्विचार और 2026 के चीनी सीजन को संकट से बचाने के लिए प्रतिबंध वापस लेने की मांग की।
निर्यात प्रतिबंध से किसानों पर असर
पवार ने तर्क दिया कि यह प्रतिबंध ऐसे नाज़ुक समय में लागू किया गया है जब महाराष्ट्र पहले से ही अतिरिक्त चीनी उत्पादन के बोझ तले दबा हुआ है। उनके अनुसार, निर्यात पर रोक लगने से चीनी मिलों का नकदी प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे किसानों को हाल ही में संशोधित उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं बदली तो चीनी मिलें वित्तीय पतन की कगार पर पहुँच सकती हैं।
मितव्ययिता की अपील पर पवार का रुख
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घरेलू मितव्ययिता के आह्वान पर पवार ने कहा कि राजकोषीय अनुशासन आवश्यक है, लेकिन शीर्ष स्तर पर हुई नीतिगत विफलताओं का बोझ आम नागरिकों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने ईंधन और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता बताया।
पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील गंभीर स्थिति का संकेत देती है और इस पर हर तरफ चर्चा हो रही है, इसलिए सभी को इसे ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश ने इससे पहले भी ऐसे दौर देखे हैं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
काफिले कम करने पर तंज
प्रधानमंत्री की अपील के बाद कुछ मंत्रियों द्वारा अपने काफिले घटाने या पैदल चलने की खबरों का संदर्भ देते हुए पवार ने सलाह दी कि ऐसे कदम केवल दिखावा नहीं होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक-दो दिन की बचत से कोई बदलाव नहीं आएगा और यह देखना बाकी है कि सत्ताधारी दल के नेता इस अपील का कितने समय तक पालन करते हैं।
सर्वदलीय बैठक की मांग
पवार ने मौजूदा राष्ट्रीय स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ताधारी दल ने चुनाव के दौरान ईंधन संरक्षण पर विचार क्यों नहीं किया और इस निर्णय पर पहुँचने में इतना समय क्यों लगा।
आगे की राह
पवार की यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र का सहकारी चीनी उद्योग पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। उद्योग जगत और किसान संगठनों की नज़रें अब केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — विशेषकर इस बात पर कि क्या सरकार 2026 के चीनी सीजन से पहले नीति में कोई बदलाव करती है।