इथेनॉल से वाहन खराब होने की शिकायतें: अठावले ने वैज्ञानिक जांच और पाबंदी पर विचार की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने 24 अगस्त को शिरडी में मीडिया से बात करते हुए इथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों में कथित तौर पर आ रही खराबी की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई और सरकार से इस मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी स्तर पर जांच कराने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में इथेनॉल को दोषी पाया जाता है, तो आवश्यकता पड़ने पर इस पर प्रतिबंध लगाने के विकल्प पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इथेनॉल नीति की पृष्ठभूमि
अठावले ने बताया कि इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय किसानों को चीनी की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि विस्तृत अध्ययन के बाद सरकार ने इस नीति को मंजूरी दी थी और अब तक इसके परिणाम संतोषजनक रहे थे। गौरतलब है कि भारत सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति का लक्ष्य पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण हासिल करना है, जो किसानों की आय और ऊर्जा सुरक्षा दोनों से जुड़ा है।
पिछले एक-दो महीनों में उभरी शिकायतें
अठावले के अनुसार, पिछले एक-दो महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों से वाहन खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि इससे पहले इथेनॉल के कारण वाहन क्षति की ऐसी कोई शिकायत नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा — पहले यह पता लगाना जरूरी है कि किन वाहनों में खराबी आई और उसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इथेनॉल मिश्रण का विस्तार तेज़ी से हो रहा है।
राहुल गांधी और 2029 चुनाव पर टिप्पणी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर अठावले ने कहा कि फिलहाल उन्हें ऐसा नहीं लगता कि राहुल गांधी को जल्द प्रधानमंत्री पद मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी और उनकी जोड़ी है, तब तक यह संभावना नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में जनता जो फैसला करेगी, वह उन्हें मान्य होगा। उन्होंने 'वन मैन, वन वोट, वन वैल्यू' के लोकतांत्रिक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत पाने वाला दल या गठबंधन ही सत्ता में आएगा।
विपक्ष से सहयोग की अपील
अठावले ने राहुल गांधी से अपील की कि वे प्रतिदिन सरकार पर आरोप लगाने के बजाय देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सवाल उठाने और सुझाव देने का पूरा अधिकार है, लेकिन केवल आरोप-प्रत्यारोप से देश का विकास नहीं होता। उन्होंने संसद में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाने की पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों पक्षों को देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आगे क्या होगा
अठावले की इस मांग के बाद अब नज़रें सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार जांच के आदेश देती है, तो यह स्पष्ट होगा कि इथेनॉल मिश्रण नीति में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं। वाहन उद्योग और किसान संगठन दोनों इस घटनाक्रम पर करीबी नज़र रख रहे हैं।