आदित्य ठाकरे ने PM मोदी को लिखा पत्र, पेट्रोल एथेनॉल मिश्रण नीति पर पुनर्विचार की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण की केंद्र सरकार की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि देशभर के लाखों वाहन मालिक — विशेषकर युवा और मध्यम वर्ग — इस नीति के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर गहरी चिंता में हैं और उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का स्वतंत्र विकल्प मिलना चाहिए।
वाहन मालिकों की चिंता
ठाकरे ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि अधिकांश परिवारों के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन खरीदना महज विलासिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, बचत और लंबी अवधि की ईएमआई का नतीजा होता है। ऐसे में वाहन मालिक स्वाभाविक रूप से वही प्रदर्शन और माइलेज चाहते हैं जिसका वादा निर्माता कंपनियों ने वाहन बेचते समय किया था।
उन्होंने कहा कि कई नागरिकों का दावा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती मात्रा से उनके वाहनों का माइलेज घट रहा है और प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार देश की सड़कों पर चल रहे बड़ी संख्या में वाहन मूलतः अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे, जिससे वाहन मालिकों को बिना किसी विकल्प के इस नीति का बोझ उठाना पड़ रहा है।
जल संकट और गन्ना खेती पर सवाल
यूबीटी नेता ने एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती को लेकर भी पर्यावरणीय चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गन्ना देश की सर्वाधिक जल-गहन फसलों में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्से पहले से ही गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे में यह नीति दीर्घकालिक स्थिरता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
पारदर्शिता और नीतिगत विश्वसनीयता पर जोर
ठाकरे ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि आम लोगों के बीच यह धारणा पनप रही है कि इस नीति से कुछ विशेष कंपनियों और उद्योग समूहों को असंगत लाभ मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे यह धारणा तथ्यात्मक रूप से सही हो या न हो, इन चिंताओं का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना सरकार की जिम्मेदारी है।
उपभोक्ता विकल्प की मांग
आदित्य ठाकरे ने दुनिया के कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता है — जिन वाहनों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन उपयुक्त हो, वे उसका उपयोग कर सकते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिक सामान्य पेट्रोल का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारत में भी दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उपभोक्ताओं की पसंद का अधिकार सुरक्षित रहेगा, मौजूदा वाहन मालिकों की असुविधा कम होगी और सरकारी नीतियों के प्रति जनता का भरोसा मजबूत होगा। ठाकरे ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मध्यम वर्ग, युवाओं और करोड़ों वाहन मालिकों के हित में इस मांग पर सकारात्मक विचार करेंगे।