16 जुलाई 2026
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आदित्य ठाकरे ने PM मोदी को लिखा पत्र, पेट्रोल एथेनॉल मिश्रण नीति पर पुनर्विचार की मांग

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आदित्य ठाकरे ने PM मोदी को लिखा पत्र, पेट्रोल एथेनॉल मिश्रण नीति पर पुनर्विचार की मांग

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने PM मोदी को पत्र लिखकर अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण नीति पर सवाल उठाए — माइलेज घटने, जल संकट और कॉर्पोरेट लाभ की आशंकाओं का हवाला देते हुए उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने की स्वतंत्रता देने की मांग की।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण नीति पर पुनर्विचार की मांग की।
उन्होंने कहा कि बढ़ते एथेनॉल मिश्रण से वाहनों का माइलेज घट रहा है और प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है, खासकर उन वाहनों में जो उच्च एथेनॉल मिश्रण के लिए डिज़ाइन नहीं थे।
ठाकरे ने गन्ने की अत्यधिक जल-खपत का हवाला देते हुए जल संकट के बीच एथेनॉल उत्पादन की स्थिरता पर सवाल उठाए।
उन्होंने आशंका जताई कि इस नीति से कुछ विशेष कंपनियों को असंगत लाभ मिल रहा है और पारदर्शिता की मांग की।
ठाकरे ने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए भारत में भी उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रित ईंधन — दोनों विकल्प उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने 16 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण की केंद्र सरकार की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि देशभर के लाखों वाहन मालिक — विशेषकर युवा और मध्यम वर्ग — इस नीति के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर गहरी चिंता में हैं और उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का स्वतंत्र विकल्प मिलना चाहिए।

वाहन मालिकों की चिंता

ठाकरे ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि अधिकांश परिवारों के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन खरीदना महज विलासिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, बचत और लंबी अवधि की ईएमआई का नतीजा होता है। ऐसे में वाहन मालिक स्वाभाविक रूप से वही प्रदर्शन और माइलेज चाहते हैं जिसका वादा निर्माता कंपनियों ने वाहन बेचते समय किया था।

उन्होंने कहा कि कई नागरिकों का दावा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती मात्रा से उनके वाहनों का माइलेज घट रहा है और प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार देश की सड़कों पर चल रहे बड़ी संख्या में वाहन मूलतः अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे, जिससे वाहन मालिकों को बिना किसी विकल्प के इस नीति का बोझ उठाना पड़ रहा है।

जल संकट और गन्ना खेती पर सवाल

यूबीटी नेता ने एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती को लेकर भी पर्यावरणीय चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गन्ना देश की सर्वाधिक जल-गहन फसलों में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्से पहले से ही गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे में यह नीति दीर्घकालिक स्थिरता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।

पारदर्शिता और नीतिगत विश्वसनीयता पर जोर

ठाकरे ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि आम लोगों के बीच यह धारणा पनप रही है कि इस नीति से कुछ विशेष कंपनियों और उद्योग समूहों को असंगत लाभ मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे यह धारणा तथ्यात्मक रूप से सही हो या न हो, इन चिंताओं का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना सरकार की जिम्मेदारी है।

उपभोक्ता विकल्प की मांग

आदित्य ठाकरे ने दुनिया के कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता है — जिन वाहनों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन उपयुक्त हो, वे उसका उपयोग कर सकते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिक सामान्य पेट्रोल का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारत में भी दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उपभोक्ताओं की पसंद का अधिकार सुरक्षित रहेगा, मौजूदा वाहन मालिकों की असुविधा कम होगी और सरकारी नीतियों के प्रति जनता का भरोसा मजबूत होगा। ठाकरे ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मध्यम वर्ग, युवाओं और करोड़ों वाहन मालिकों के हित में इस मांग पर सकारात्मक विचार करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक पुराने वाहनों के लिए संक्रमण सहायता और पारदर्शी माइलेज डेटा सार्वजनिक नहीं होता, तब तक यह नीति विश्वास की कमी से जूझती रहेगी। जल संकट वाला तर्क नया नहीं है, पर इसे मुख्यधारा राजनीतिक मंच से उठाया जाना इसकी गंभीरता को रेखांकित करता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदित्य ठाकरे ने PM मोदी को पत्र में क्या मांग की है?
आदित्य ठाकरे ने पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण की नीति पर पुनर्विचार और उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल तथा एथेनॉल मिश्रित ईंधन — दोनों में से चुनने का विकल्प देने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा नीति से लाखों वाहन मालिकों का माइलेज प्रभावित हो रहा है।
एथेनॉल मिश्रण से वाहनों पर क्या असर पड़ता है?
कई वाहन मालिकों का दावा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती मात्रा से माइलेज घट रहा है और इंजन प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जो वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए, उनमें यह समस्या अधिक देखी जाती है।
एथेनॉल उत्पादन और जल संकट का क्या संबंध है?
एथेनॉल मुख्यतः गन्ने से बनाया जाता है, जो भारत की सर्वाधिक जल-गहन फसलों में से एक है। ठाकरे ने तर्क दिया कि देश के कई हिस्सों में पहले से जल संकट होने के बावजूद बड़े पैमाने पर गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देना दीर्घकालिक दृष्टि से उचित नहीं है।
क्या अन्य देशों में उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है?
हाँ, दुनिया के कई देशों में पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रित और सामान्य पेट्रोल — दोनों विकल्प उपलब्ध होते हैं। ठाकरे ने इसी मॉडल को भारत में लागू करने की मांग की है ताकि उपभोक्ता अपनी वाहन-अनुकूलता के अनुसार ईंधन चुन सकें।
शिवसेना (यूबीटी) की एथेनॉल नीति पर क्या स्थिति है?
शिवसेना (यूबीटी) एथेनॉल मिश्रण के विचार का पूर्णतः विरोध नहीं करती, लेकिन अनिवार्य मिश्रण की बजाय उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण की पैरवी करती है। पार्टी का कहना है कि नीति को पारदर्शी बनाया जाए और वाहन मालिकों को बिना विकल्प के इसका बोझ न उठाना पड़े।
राष्ट्र प्रेस
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