22 अगस्त 2026
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एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर गहलोत का हमला: चीनी 14-17 रुपए महंगी, इंजन को नुकसान — 'जनता कीमत चुका रही है'

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एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर गहलोत का हमला: चीनी 14-17 रुपए महंगी, इंजन को नुकसान — 'जनता कीमत चुका रही है'

सारांश

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को 'बिना तैयारी का फैसला' करार दिया — 15 दिनों में चीनी 17 रुपए तक महंगी, इंजन क्षति की शिकायतें और प्रदूषण की चिंताएँ। उनका सवाल है: लाभ किसे, कीमत किसे?

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 22 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की कड़ी आलोचना की।
मात्र 15 दिनों में चीनी की कीमतों में 14 से 17 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान और माइलेज घटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
एथेनॉल उत्पादन से वायु और जल प्रदूषण की शिकायतों पर भी चिंता जताई गई।
गहलोत ने उपभोक्ता, आपूर्ति, वाहन और पर्यावरण — चारों पहलुओं को ध्यान में रखकर नीति की व्यापक समीक्षा की माँग की।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 22 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पर्याप्त तैयारी के बिना लागू की गई इस नीति की कीमत आम नागरिकों को महंगाई, वाहन क्षति और पर्यावरण प्रदूषण के रूप में चुकानी पड़ रही है। उन्होंने इस नीति की व्यापक समीक्षा की माँग की।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

गहलोत ने कहा, 'केंद्र सरकार की दूरदर्शिता की कमी और गलत फैसलों का एक और उदाहरण पेट्रोल में बड़ी मात्रा में एथेनॉल मिलाने का निर्णय है। पर्याप्त तैयारी के बिना लिए गए इस फैसले के परिणाम देश की जनता को कई मोर्चों पर भुगतने पड़ रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह आम आदमी की मेहनत की कमाई लूटने जैसा है। इस व्यवस्था से कुछ उद्योगपति और सरकार लाभ उठा रहे हैं, जबकि आम नागरिकों को बढ़ती कीमतों का बोझ सहना पड़ रहा है।'

चीनी आपूर्ति पर असर

गहलोत के अनुसार, गन्ने का एक बड़ा हिस्सा अब चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल उत्पादन में लगाया जा रहा है, जिससे बाज़ार में चीनी की उपलब्धता घटी है। उनके दावे के मुताबिक, मात्र 15 दिनों में चीनी की कीमतों में 14 से 17 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है — जो सीधे तौर पर घरेलू बजट पर दबाव डाल रही है।

वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ

पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण वाहनों के इंजन को नुकसान पहुँचने और माइलेज घटने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे वाहन मालिकों को ईंधन और रखरखाव दोनों पर अतिरिक्त व्यय करना पड़ रहा है — जो उनके अनुसार, एक अप्रत्यक्ष कर की तरह काम कर रहा है।

पर्यावरण संबंधी चिंताएँ

गहलोत ने एथेनॉल उत्पादन से जुड़े वायु और जल प्रदूषण की शिकायतों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि नीति निर्माण के समय इन पर्यावरणीय पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

राजनीतिक संदर्भ और माँग

गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए वह अपने फैसलों के लाभ समझाने में नाकाम रही है। उन्होंने माँग की कि केंद्र सरकार उपभोक्ताओं, चीनी आपूर्ति, वाहन मालिकों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की व्यापक समीक्षा करे। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने के अपने लक्ष्य को लेकर सक्रिय रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चीनी कीमतों में 15 दिनों की तीव्र बढ़ोतरी और इंजन क्षति की शिकायतें नीतिगत क्रियान्वयन पर वैध सवाल खड़े करती हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा और किसान आय दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन की कमी से उपभोक्ता ही पहले प्रभावित होते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इंजन अनुकूलता और प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी किस एजेंसी की जिम्मेदारी है — यह जवाबदेही का असली अभाव है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति क्या है और इसे क्यों लागू किया गया?
एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल (गन्ने व अन्य स्रोतों से बना जैव-ईंधन) मिलाया जाता है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना, किसानों को अतिरिक्त आय देना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है।
गहलोत के अनुसार चीनी महंगी क्यों हुई?
गहलोत का आरोप है कि गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने में लग रहा है, जिससे बाज़ार में चीनी की आपूर्ति घटी है। उनके अनुसार सिर्फ 15 दिनों में चीनी की कीमत 14 से 17 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई।
क्या एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों को नुकसान होता है?
गहलोत ने दावा किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुँचने और माइलेज घटने की शिकायतें आ रही हैं। हालाँकि, यह दावा उनकी राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है और स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
गहलोत ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
पूर्व मुख्यमंत्री ने माँग की है कि केंद्र सरकार उपभोक्ताओं, चीनी आपूर्ति, वाहन मालिकों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की व्यापक समीक्षा करे।
एथेनॉल उत्पादन से पर्यावरण पर क्या असर पड़ रहा है?
गहलोत ने एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों से वायु और जल प्रदूषण की शिकायतों पर चिंता जताई है। उनके अनुसार नीति बनाते समय इन पर्यावरणीय पहलुओं पर पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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