31 जुलाई 2026
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एथेनॉल मिश्रण न होता तो पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक पहुँचता: पेट्रोलियम मंत्रालय

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एथेनॉल मिश्रण न होता तो पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक पहुँचता: पेट्रोलियम मंत्रालय

सारांश

मध्य पूर्व संकट में क्रूड बास्केट ₹135 डॉलर/बैरल छूने पर पेट्रोल ₹125/लीटर तक जा सकता था — लेकिन 20% एथेनॉल मिश्रण ने कीमत ₹94.77 पर रोकी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इस कार्यक्रम ने ₹1.97 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई और 950 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन घटाया।

मुख्य बातें

मध्य पूर्व संकट के दौरान बिना एथेनॉल मिश्रण के नई दिल्ली में पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक पहुँच सकता था।
20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से उपभोक्ताओं ने ₹94.77 प्रति लीटर चुकाया — यानी ₹30/लीटर की बचत।
EBP कार्यक्रम से भारत को विदेशी मुद्रा में ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की बचत हुई।
950 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई।
किसानों और डिस्टिलर्स को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ।
भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत अभी भी आयात से पूरा करता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 31 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व संकट के दौरान यदि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम लागू न होता, तो नई दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत ₹125 प्रति लीटर तक पहुँच सकती थी। मंत्रालय के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की वजह से उपभोक्ताओं को प्रति लीटर ₹30 तक की बचत हुई।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय ने बताया कि जब संकट के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थी, तब राष्ट्रीय राजधानी में बिना एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर तक जाने का अनुमान था। हालाँकि, उपभोक्ताओं ने वास्तव में ₹94.77 प्रति लीटर का भुगतान किया, क्योंकि प्रति लीटर में 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का था, जिसे पहले से निर्धारित स्थिर मूल्यों पर खरीदा गया था।

एनर्जी सिक्योरिटी पर असर

मंत्रालय ने कहा कि यह बचत दर्शाती है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने में कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है। आँकड़ों के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम ने कच्चे तेल के आयात में कटौती कर भारत को विदेशी मुद्रा में ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की बचत कराई है। साथ ही, 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। गौरतलब है कि भारत अभी भी अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात पर निर्भर है, जो इस कार्यक्रम की प्रासंगिकता को और बढ़ाता है।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत किसानों और डिस्टिलर्स को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है, जिससे कृषि उत्पादों के लिए एक स्थिर घरेलू बाज़ार तैयार हुआ है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि EBP कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का काम करता है।

खाद्य सुरक्षा की प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य बफर स्टॉक की ज़रूरतें पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त अनाज को एथेनॉल उत्पादन के लिए मंज़ूरी दी जाती है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा प्रमाणित अतिरिक्त अनाज, खराब अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के अयोग्य अनाज का ही इस कार्यक्रम में उपयोग होता है।

आगे की राह

मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से भारतीय उपभोक्ताओं को बचाने के लिए एक 'बीमा कवच' की तरह काम करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार अनिश्चित बनी हुई हैं, और भारत अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाने पर ज़ोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित रहता है: ₹125 प्रति लीटर का यह अनुमान एक काल्पनिक परिदृश्य है, जिसे सत्यापित करना कठिन है। असली परीक्षा यह है कि गन्ने और अनाज की ऊँची सरकारी खरीद कीमतें एथेनॉल की 'सस्तेपन' की कहानी को कितना प्रभावित करती हैं — यह पहलू मंत्रालय के बयान में अनुपस्थित है। साथ ही, 88 प्रतिशत आयात-निर्भरता एक दशक बाद भी बनी हुई है, जो दर्शाता है कि एथेनॉल मिश्रण अकेले ऊर्जा आत्मनिर्भरता का रास्ता नहीं है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एथेनॉल मिश्रण न होने पर पेट्रोल की कीमत कितनी होती?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, मध्य पूर्व संकट के दौरान जब भारतीय क्रूड बास्केट लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँची, तो बिना एथेनॉल मिश्रण के नई दिल्ली में पेट्रोल ₹125 प्रति लीटर तक जा सकता था। 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की वजह से उपभोक्ताओं ने ₹94.77 प्रति लीटर चुकाया।
एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम से भारत को क्या फायदा हुआ?
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम से भारत ने विदेशी मुद्रा में ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की बचत की और 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन कम हुआ। इसके अलावा किसानों और डिस्टिलर्स को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ।
क्या एथेनॉल उत्पादन से खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और बफर स्टॉक की ज़रूरतें पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त अनाज को एथेनॉल उत्पादन के लिए मंज़ूरी दी जाती है। खराब अनाज, टूटे चावल और मानव उपभोग के अयोग्य अनाज का ही उपयोग होता है।
भारत अपनी तेल ज़रूरत का कितना हिस्सा आयात करता है?
मंत्रालय के अनुसार, भारत अभी भी अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। एथेनॉल ब्लेंडिंग इस निर्भरता को कम करने और वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में काम करती है।
एथेनॉल मिश्रण से प्रति लीटर कितनी बचत होती है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से उपभोक्ताओं को प्रति लीटर ₹30 तक की बचत होती है। मध्य पूर्व संकट के दौरान यह बचत विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें चरम पर थीं।
राष्ट्र प्रेस
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