30 अगस्त 2026
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असम यूसीसी बिल 2026: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया बोले — महिला अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम

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असम यूसीसी बिल 2026: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया बोले — महिला अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम

सारांश

असम विधानसभा में यूसीसी बिल, 2026 पारित होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने इसे महिला न्याय और 'एक राष्ट्र, एक कानून' की दिशा में बड़ा कदम बताया। बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, जबकि विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

मुख्य बातें

असम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने 30 मई 2026 को कहा कि यूसीसी महिला अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
असम विधानसभा में यूसीसी बिल, 2026 पारित; सभी दलों को चर्चा का अवसर दिया गया था।
बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बिल को सामाजिक न्याय और सुशासन का नया युग बताया।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कुछ प्रावधानों और छूटों पर चिंता जताई है।

असम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने 30 मई 2026 को गुवाहाटी में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) देश में महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम विधानसभा में यूसीसी पारित होने से पहले सभी राजनीतिक दलों को अपनी राय रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।

भाजपा का चुनावी वादा और विधानसभा में पारित बिल

भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने असम में सत्ता में वापसी पर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। सैकिया ने कहा कि उचित चर्चा और विचार-विमर्श के बाद असम विधानसभा में यूसीसी बिल, 2026 पारित किया गया। उन्होंने कहा, 'यूसीसी का अर्थ है — सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक राष्ट्र, एक कानून और एक पहचान। हम पूरे देश में अपनी विविध संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखेंगे।'

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों का संदर्भ

सैकिया ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस कथन का उल्लेख किया कि 'एक देश में दो संविधान, दो प्रधानमंत्री और दो झंडे नहीं हो सकते।' उन्होंने कहा कि इसी भावना के अनुरूप अब देश में केवल एक समान पर्सनल लॉ (निजी कानून) लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

बिल के मुख्य प्रावधान

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों पर एक समान नागरिक ढाँचा स्थापित करना है। बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का भी प्रस्ताव है। हालाँकि विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों और छूटों पर चिंता जताई है।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल का स्वागत

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यूसीसी बिल, 2026 के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा था कि यह असम में सामाजिक न्याय, समानता और सुशासन का एक नया युग लाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में यूसीसी को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

विपक्ष की आपत्तियाँ और आगे की राह

गौरतलब है कि विपक्षी पार्टियों और कुछ अल्पसंख्यक संगठनों ने बिल के कुछ प्रावधानों — विशेषकर आदिवासी समुदायों को दी गई छूटों की सीमा — पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि बिल में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की पर्याप्त रक्षा नहीं की गई है। अब यह देखना होगा कि क्रियान्वयन के स्तर पर यह कानून किस रूप में सामने आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि असम में बड़ी आदिवासी आबादी है। 'एक कानून, एक पहचान' का नारा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, परंतु क्रियान्वयन में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के साथ संतुलन बनाना ही इस बिल की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम यूसीसी बिल 2026 क्या है?
असम यूसीसी बिल, 2026 एक समान नागरिक संहिता है जिसे असम विधानसभा ने पारित किया है। यह धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों पर एक समान कानूनी ढाँचा स्थापित करता है।
यूसीसी बिल में महिलाओं के लिए क्या प्रावधान हैं?
बिल में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के अनुसार यह महिलाओं को समान न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।
विपक्ष ने असम यूसीसी बिल पर क्या आपत्ति जताई है?
विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने बिल के कुछ प्रावधानों और छूटों पर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि बिल में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की पर्याप्त रक्षा नहीं की गई है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यूसीसी पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यूसीसी बिल, 2026 के पारित होने का स्वागत किया और कहा कि यह असम में सामाजिक न्याय, समानता और सुशासन का नया युग लाएगा।
असम में यूसीसी लागू करने का वादा कब किया गया था?
भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने असम विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में वापसी पर यूसीसी लागू किया जाएगा। इस वादे को पूरा करते हुए असम विधानसभा में यूसीसी बिल, 2026 पारित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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