23 जुलाई 2026
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सोनू निगम ने पंकज उधास को दी श्रद्धांजलि: 'उन्होंने मुझे गजलों की दुनिया से रूबरू कराया'

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सोनू निगम ने पंकज उधास को दी श्रद्धांजलि: 'उन्होंने मुझे गजलों की दुनिया से रूबरू कराया'

सारांश

सोनू निगम ने स्वीकार किया कि गजल की दुनिया का दरवाज़ा उनके लिए पंकज उधास ने खोला था। 1980 के दशक से शुरू हुआ यह संगीत-ऋण, 'खजाना' फेस्टिवल के 25वें वर्ष में श्रद्धांजलि बनकर सामने आया — एक याद, जो सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, गजल विधा के भविष्य की चिंता भी है।

मुख्य बातें

सोनू निगम ने 23 जुलाई को मीडिया से बातचीत में पंकज उधास को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
सोनू ने बताया कि 1980 के दशक में पंकज उधास और अनूप जलोटा से उन्होंने गजल व भजन की बारीकियाँ सीखीं।
पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को 72 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद हुआ था।
'खजाना' गजल फेस्टिवल को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं; सोनू ने इसमें भाग लेना पंकज उधास की विरासत के प्रति अपना कर्तव्य बताया।
सोनू निगम ने युवा पीढ़ी की संगीत पसंद पर कहा कि गजल और शास्त्रीय संगीत की अपनी अमिट पहचान बनी रहेगी।

मशहूर गायक सोनू निगम ने दिग्गज गजल गायक पंकज उधास को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गजल विधा को समझने में पंकज उधास की भूमिका उनके लिए अतुलनीय रही है। 23 जुलाई को मीडिया से बातचीत में सोनू ने खुलकर बताया कि किस तरह पंकज उधास की गजलों ने उनके संगीत सफर को एक नई दिशा दी।

गजलों की पहचान दिलाई पंकज उधास ने

सोनू निगम ने कहा, 'जब मैंने पहली बार गजल संगीत को समझना शुरू किया था, तब पंकज उधास उन शुरुआती कलाकारों में शामिल थे, जिनसे मुझे इस विधा की पहचान मिली। मैंने मंच पर उनकी कई लोकप्रिय गजलें गाईं, जिनके ज़रिए मुझे इस खूबसूरत संगीत विधा की गहराई और भावनाओं को समझने का मौका मिला।'

उन्होंने आगे जोड़ा, '1980 के दशक में पंकज उधास और अनूप जलोटा जैसे कलाकारों से मैंने गजल और भजन की बारीकियाँ सीखीं। पंकज जी मुझे बहुत पसंद थे और उनका स्नेह भी मुझे हमेशा मिला। हमारे बीच आपसी सम्मान का एक गहरा रिश्ता था।'

विरासत को आगे बढ़ाना कर्तव्य

सोनू निगम ने 'खजाना' गजल फेस्टिवल के संदर्भ में कहा कि इस महोत्सव को शुरू हुए 25 वर्ष हो चुके हैं और पंकज उधास की विरासत को जीवित रखने में छोटा-सा योगदान देना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा, 'वह हमें बहुत जल्दी छोड़कर चले गए, जिससे हर कोई दुखी हुआ।'

गौरतलब है कि पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को 72 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद हुआ था। उनके चाहने वालों ने उन्हें नम आँखों से विदाई दी थी।

युवा पीढ़ी और संगीत की बदलती पसंद

बदलते दौर में युवाओं की संगीत रुचि पर सोनू निगम ने संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा, 'यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि आज की पीढ़ी केवल रैप, विदेशी संगीत या सोशल मीडिया से जुड़े गाने ही पसंद करती है। हर तरह के संगीत के अपने श्रोता होते हैं और किसी भी संगीत शैली की लोकप्रियता इस बात पर निर्भर करती है कि वह लोगों तक कितनी आसानी से पहुँचती है।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकप्रिय संगीत को अधिक लोग इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उसे समझना सरल होता है और वह जल्दी जुड़ाव बनाता है। वहीं, गजल और शास्त्रीय संगीत जैसी विधाओं को आत्मसात करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है।

पारंपरिक संगीत की अमिट पहचान

सोनू निगम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पारंपरिक संगीत की अपनी अलग पहचान और महत्व हमेशा बना रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब गजल और शास्त्रीय संगीत को डिजिटल युग में नई पीढ़ी तक पहुँचाने की चुनौती बढ़ रही है। पंकज उधास जैसे कलाकारों की विरासत इस विधा को जीवंत रखने का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न एल्गोरिदम से। 'खजाना' फेस्टिवल के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बात और भी प्रासंगिक हो जाती है कि गजल जैसी विधा को संस्थागत मंचों के बिना जीवित रखना कठिन होता जा रहा है। पंकज उधास के जाने के बाद गजल को मुख्यधारा में बनाए रखने की ज़िम्मेदारी अब उन्हीं कलाकारों पर है जिन्होंने उनसे सीखा — और सोनू निगम का यह सार्वजनिक स्वीकरण उस ज़िम्मेदारी की एक सशक्त अभिव्यक्ति है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनू निगम ने पंकज उधास को श्रद्धांजलि क्यों दी?
सोनू निगम ने 'खजाना' गजल फेस्टिवल के 25वें वर्ष के अवसर पर पंकज उधास को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में पंकज उधास की गजलों ने ही उन्हें इस संगीत विधा की गहराई से परिचित कराया था।
पंकज उधास का निधन कब और कैसे हुआ?
पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को 72 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद हुआ। वह भारतीय गजल संगीत के सबसे प्रतिष्ठित नामों में से एक थे।
'खजाना' गजल फेस्टिवल क्या है और इसका पंकज उधास से क्या संबंध है?
'खजाना' गजल फेस्टिवल एक प्रमुख संगीत महोत्सव है जो गजल विधा को समर्पित है। इस वर्ष इसे 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं और सोनू निगम ने इसमें भाग लेना पंकज उधास की विरासत को आगे बढ़ाने का अपना कर्तव्य बताया।
सोनू निगम ने युवाओं की संगीत पसंद के बारे में क्या कहा?
सोनू निगम ने कहा कि यह मानना गलत है कि युवा केवल रैप या विदेशी संगीत पसंद करते हैं। उनके अनुसार हर संगीत शैली के अपने श्रोता होते हैं, और गजल व शास्त्रीय संगीत की अपनी अमिट पहचान हमेशा बनी रहेगी।
सोनू निगम और पंकज उधास के बीच क्या संबंध था?
सोनू निगम के अनुसार दोनों के बीच आपसी सम्मान का गहरा रिश्ता था। पंकज उधास ने सोनू को गजल विधा की बारीकियाँ समझने में मदद की और उन्हें हमेशा अपना स्नेह दिया।
राष्ट्र प्रेस
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