मनहर उधास: जैकी श्रॉफ की सिनेमाई पहचान बनी वह मखमली आवाज
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई। 1950 के दशक में सौराष्ट्र के सावरकुंडला में एक सात साल का बालक रोज़ स्कूल जाने के लिए नदी पार करता था। रास्ते में एक रेडियो से महान गायक केएल सहगल की करुण आवाज़ गूंजती। उस आवाज़ के आकर्षण ने उस बच्चे को इतना मुग्ध किया कि घर में ग्रामोफोन न होने के बावजूद, उसने अपने पिता से ज़िद्द करके उस गीत का रिकॉर्ड खरीदवा लिया। वह रोज़ उस रिकॉर्ड को पड़ोसी के घर ले जाता और घंटों सहगल को सुनता रहता। स्वर और सुरों के प्रति यही अनन्य दीवानगी आगे चलकर भारतीय संगीत को एक ऐसी मखमली आवाज़ देने वाली थी, जिसे हम मनहर उधास के नाम से जानते हैं।
संगीत का वंशक्रम और प्रारंभिक वर्ष
मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को ब्रिटिश भारत के बड़ौदा राज्य (वर्तमान गुजरात) में हुआ था। उनके परिवार में कला और शिक्षा का अद्वितीय संमिश्रण था। उनके पिता केशुभाई उधास एक सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ इसराज (दिलरुबा) वाद्य में निपुण थे, जबकि माता जीतूबेन एक प्रतिष्ठित गायिका थीं। उस दौर में संगीत को व्यवसाय बनाना जोखिम भरा माना जाता था, इसलिए मनहर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली।
बॉम्बे में दोहरा जीवन और पहली सफलता
1965 में जब मनहर उधास अपनी डिग्री लेकर मुंबई पहुंचे, तो उनका जीवन दो धारों में बंट गया। दिन में वे एक टेक्सटाइल कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करते, और संध्या में फेमस स्टूडियोज़ के रिकॉर्डिंग हॉल में अघोषित 'स्क्रैच' सिंगर बन जाते। दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के सान्निध्य में, वे बड़े गायकों के आने से पहले गानों की धुनें और बोल परीक्षण करते थे।
1969 में फिल्म 'विश्वास' के गीत