मनहर उधास: जैकी श्रॉफ की सिनेमाई पहचान बनी वह मखमली आवाज

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मनहर उधास: जैकी श्रॉफ की सिनेमाई पहचान बनी वह मखमली आवाज

सारांश

मनहर उधास: एक मैकेनिकल इंजीनियर जो 1969 में एक डमी ट्रैक गाने के बाद बॉलीवुड का सबसे मांग वाला पार्श्व गायक बन गया। जैकी श्रॉफ की 'हीरो' से लेकर 'राम लखन' तक, उनकी मखमली आवाज़ ने तीन दशकों तक सिनेमा को परिभाषित किया।

मुख्य बातें

मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को बड़ौदा, गुजरात में हुआ था।
1965 में मुंबई आने के बाद दिन में इंजीनियर, रात में स्क्रैच सिंगर का जीवन जिया।
1969 में 'विश्वास' के गीत से उनकी सफलता शुरू हुई, जब मुकेश के बजाय उनकी आवाज़ रिलीज़ हुई।
सुभाष घई की 'हीरो' (1983) में जैकी श्रॉफ की आवाज़ बनीं; 'तू मेरा जानू है' आज भी प्रेमियों का गीत है।
1970-90 के दशक में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनका काम ऐतिहासिक रहा।
अपने करियर के शीर्ष पर गुजराती गजलों के पुनरुद्धार में लग गए; 1975 का 'सूरज ढलती सांज' एल्बम रिकॉर्ड तोड़ गया।
83 वर्ष से अधिक आयु में भी राजकोट से टेक्सास तक लाइव कॉन्सर्ट देते हैं।

मुंबई। 1950 के दशक में सौराष्ट्र के सावरकुंडला में एक सात साल का बालक रोज़ स्कूल जाने के लिए नदी पार करता था। रास्ते में एक रेडियो से महान गायक केएल सहगल की करुण आवाज़ गूंजती। उस आवाज़ के आकर्षण ने उस बच्चे को इतना मुग्ध किया कि घर में ग्रामोफोन न होने के बावजूद, उसने अपने पिता से ज़िद्द करके उस गीत का रिकॉर्ड खरीदवा लिया। वह रोज़ उस रिकॉर्ड को पड़ोसी के घर ले जाता और घंटों सहगल को सुनता रहता। स्वर और सुरों के प्रति यही अनन्य दीवानगी आगे चलकर भारतीय संगीत को एक ऐसी मखमली आवाज़ देने वाली थी, जिसे हम मनहर उधास के नाम से जानते हैं।

संगीत का वंशक्रम और प्रारंभिक वर्ष

मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को ब्रिटिश भारत के बड़ौदा राज्य (वर्तमान गुजरात) में हुआ था। उनके परिवार में कला और शिक्षा का अद्वितीय संमिश्रण था। उनके पिता केशुभाई उधास एक सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ इसराज (दिलरुबा) वाद्य में निपुण थे, जबकि माता जीतूबेन एक प्रतिष्ठित गायिका थीं। उस दौर में संगीत को व्यवसाय बनाना जोखिम भरा माना जाता था, इसलिए मनहर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली।

बॉम्बे में दोहरा जीवन और पहली सफलता

1965 में जब मनहर उधास अपनी डिग्री लेकर मुंबई पहुंचे, तो उनका जीवन दो धारों में बंट गया। दिन में वे एक टेक्सटाइल कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करते, और संध्या में फेमस स्टूडियोज़ के रिकॉर्डिंग हॉल में अघोषित 'स्क्रैच' सिंगर बन जाते। दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के सान्निध्य में, वे बड़े गायकों के आने से पहले गानों की धुनें और बोल परीक्षण करते थे।

1969 में फिल्म 'विश्वास' के गीत

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दर्शकों को पता ही नहीं था कि वे एक इंजीनियर की आवाज़ सुन रहे हैं। उधास के तीन दशकों की सफलता के बावजूद, उन्हें जनता की स्वीकृति पार्श्व गायकी के कारण कभी नहीं मिली जो एक प्रमुख गायक को मिलनी चाहिए। गुजराती गजलों की ओर उनका मुड़ना केवल कलात्मक विकल्प नहीं था — यह एक पुनः दावेदारी थी। जब उन्होंने 30,000 की भीड़ के सामने गजलें गाईं, तो उन्होंने अपनी असली पहचान वापस ले ली। आज का संगीत उद्योग 'फीचर्ड आर्टिस्ट' क्रेडिट में अधिक पारदर्शी है, लेकिन उधास की विरासत एक कड़वी याद दिलाती है कि कितने प्रतिभाशाली कलाकार सिस्टम के पीछे खो गए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनहर उधास कौन हैं और बॉलीवुड में उनकी भूमिका क्या है?
मनहर उधास एक भारतीय पार्श्व गायक हैं, जिनका जन्म 13 मई 1943 को गुजरात में हुआ था। वे 1969 से 1990 के दशक के बीच बॉलीवुड के सबसे मांग वाले पार्श्व गायक रहे, विशेषकर जैकी श्रॉफ, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना के लिए गाने गाए।
'हीरो' में जैकी श्रॉफ की आवाज़ मनहर उधास की क्यों थी?
1983 की फिल्म 'हीरो' में सुभाष घई ने जैकी श्रॉफ को लॉन्च किया था। श्रॉफ की अपनी आवाज़ की सीमाओं के कारण, संगीत निर्देशकों ने मनहर उधास को उनके सभी गीत गवाने के लिए नियुक्त किया। 'तू मेरा जानू है' जैसे हिट गीतों ने उधास की आवाज़ को श्रॉफ के सिनेमाई व्यक्तित्व का अभिन्न अंग बना दिया।
मनहर उधास की सफलता की कहानी कैसे शुरू हुई?
1969 में फिल्म 'विश्वास' के गीत 'आप से हम को बिछड़े हुए' की रिकॉर्डिंग के लिए मुकेश उपलब्ध नहीं थे। संगीत निर्देशकों ने मनहर उधास से डमी ट्रैक गवाया, लेकिन जब मुकेश ने उनकी रिकॉर्डिंग सुनी, तो वे इतने प्रभावित हुए कि गीत मनहर के नाम से ही रिलीज़ हुआ। रातों-रात यह गीत सुपरहिट बन गया, जिससे मनहर उधास का बॉलीवुड करियर शुरू हुआ।
मनहर उधास ने अपने करियर के शीर्ष पर क्या किया?
अपने बॉलीवुड करियर के चरम पर, मनहर उधास ने 1970-80 के दशक में गुजराती गजलों के पुनरुद्धार में पूरी तरह समर्पित हो गए। उन्होंने 1975 में 'सूरज ढलती सांज' और 1986 में 'आगमन' जैसे एल्बम रिलीज़ किए, जिन्होंने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और गुजराती गजलों को स्टेडियम कॉन्सर्ट्स तक ले गए।
क्या मनहर उधास आज भी सक्रिय हैं?
हाँ, 83 वर्ष से अधिक आयु में भी मनहर उधास सक्रिय रूप से लाइव कॉन्सर्ट देते हैं। वे राजकोट से लेकर अमेरिका के टेक्सास तक विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन करते हैं।
राष्ट्र प्रेस