शी जिनपिंग की चेतावनी: 'दुनिया जंगलराज की ओर', मध्य पूर्व में तुरंत युद्धविराम ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 20 मई 2025 को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष यदि नहीं रुका, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ेगा। जिनपिंग ने कहा कि दुनिया एक बार फिर 'जंगलराज' की दिशा में बढ़ रही है और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति 'युद्ध और शांति के बीच एक निर्णायक मोड़' पर खड़ी है।
शिखर वार्ता का आयोजन और समझौते
दोनों नेताओं के बीच यह बैठक बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित की गई। वार्ता के दौरान आपसी संबंधों को और मज़बूत करने, द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने तथा मध्य पूर्व सहित वैश्विक हालात पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को मज़बूत करने से जुड़े एक संयुक्त घोषणापत्र (डिक्लेरेशन) पर भी दस्तखत किए।
मध्य पूर्व पर जिनपिंग की सख्त चेतावनी
जिनपिंग ने पुतिन के साथ बैठक के दौरान मध्य पूर्व में सभी शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त करने का आह्वान दोहराया। उन्होंने कहा, 'अगर लड़ाई नहीं रुकी तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा।' जिनपिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमज़ोर कर सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर हैं।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की पैरवी
जिनपिंग ने वैश्विक शासन में आमूल बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, 'हम विश्व शासन की एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली बनाने, दुनिया को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के नए तरीके अपनाए जाने चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान पश्चिमी एकध्रुवीय वर्चस्व के विरुद्ध चीन-रूस की साझी स्थिति को रेखांकित करता है।
चीन-रूस संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जिनपिंग ने इस वर्ष को चीन-रूस संबंधों के लिए विशेष बताया — यह चीन-रूस रणनीतिक समन्वय साझेदारी की 30वीं वर्षगांठ और चीन-रूस मित्र पड़ोसी एवं मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि के हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ का वर्ष है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने राजनीतिक आपसी विश्वास और रणनीतिक समन्वय को 'कदम दर कदम' गहरा किया है तथा अंतरराष्ट्रीय न्याय और समानता की रक्षा में साथ खड़े रहे हैं।
आगे की राह
इस शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक सहयोग के और गहरे होने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार, 20 समझौतों और संयुक्त घोषणापत्र के साथ यह बैठक पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस-चीन धुरी को और मज़बूत करने का संकेत देती है। मध्य पूर्व में शांति की दिशा में चीन की भूमिका आगामी महीनों में और स्पष्ट होगी।