माउंट एवरेस्ट फतह: दुबई की भारतीय बैंकर श्रद्धा गुप्ता ने 8,849 मीटर की चोटी पर फहराया परचम
सारांश
मुख्य बातें
दुबई निवासी भारतीय पर्वतारोही श्रद्धा गुप्ता ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर ली है। यह उपलब्धि उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ने वाले पर्वतारोही निर्मल पुरजा द्वारा स्थापित एलीट एक्सपेडिशन्स के साथ हासिल की। महज तीन वर्षों के पर्वतारोहण करियर में एवरेस्ट की चोटी छूना एक असाधारण उपलब्धि है, जिसे पूरा करने में अधिकांश पर्वतारोहियों को एक दशक से अधिक समय लगता है।
मुख्य घटनाक्रम
गुप्ता की एवरेस्ट विजय से ठीक पहले, उन्होंने 26 सितंबर 2025 को विश्व के आठवें सर्वोच्च पर्वत माउंट मनास्लू (8,163 मीटर) पर चढ़ाई पूरी की थी। इस शिखर प्राप्ति ने उन्हें 8,000 मीटर से ऊंची चोटियों के विशिष्ट पर्वतारोहियों की श्रेणी में शामिल किया और भारत के उभरते पर्वतारोहण नामों में उनकी पहचान स्थापित की।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमालय में स्थित एवरेस्ट की चोटी उस क्षेत्र में है जिसे पर्वतारोही 'मृत्यु क्षेत्र' कहते हैं — 8,000 मीटर से ऊपर का वह दायरा जहाँ ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल का मात्र एक-तिहाई रह जाता है और मानव शरीर तेज़ी से कमज़ोर पड़ने लगता है।
पर्वतारोहण का सुनियोजित सफर
हिमालयी अभियानों से पहले गुप्ता सात महाद्वीपों की तीन प्रमुख चोटियाँ फतह कर चुकी थीं। उन्होंने अफ्रीका में माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर), यूरोप में माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) और दक्षिण अमेरिका में एकॉनकागुआ (6,961 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की, साथ ही एवरेस्ट बेस कैंप तक की यात्रा भी पूरी की।
सात शिखरों से 8,000 मीटर वर्ग तक की यह प्रगति उनके अनुशासित और चरण-दर-चरण दृष्टिकोण को दर्शाती है — जिसमें ऊंचाई का क्रमिक अनुभव, तकनीकी कौशल और शारीरिक अनुकूलन को एक साथ साधा गया।
बैंकिंग और पर्वतारोहण का अनूठा संगम
गुप्ता सिंगापुर स्थित वित्तीय संस्थान डीबीएस बैंक में मध्य पूर्व में कॉर्पोरेट व्यवसाय की प्रमुख हैं। उन्होंने सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद 2006 में बैंकिंग क्षेत्र में कदम रखा। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग की एक चुनौतीपूर्ण वरिष्ठ भूमिका निभाते हुए ये पर्वतारोहण उपलब्धियाँ हासिल करना उनके दोहरे समर्पण की मिसाल है।
गौरतलब है कि उन्होंने पर्वतारोहण की शुरुआत लगभग तीन वर्ष पहले ही की, जब महामारी के बाद प्रकृति के प्रति उनका जुनून पुनः जागृत हुआ। यह सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि पेशेवर जीवन के दबावों के बीच परिवर्तनकारी लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं।
आम जनता पर असर और प्रेरणा
एवरेस्ट अभियान में हफ्तों का अनुकूलन, अत्यधिक ठंड, तकनीकी खतरे और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा शामिल होती है। शिखर तक पहुँचने का अवसर बेहद सीमित होता है और मौसम की अनिश्चितता इसे और कठिन बनाती है। गुप्ता की यह उपलब्धि भारतीय महिला पर्वतारोहियों की बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करती है।
क्या होगा आगे
पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, 8,000 मीटर की दो चोटियाँ फतह कर चुकीं गुप्ता अब उन भारतीय पर्वतारोहियों की सूची में शामिल हो गई हैं जो संभावित रूप से सभी 14 'आठ-हज़ारी' चोटियों की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। उनका यह सफर भारतीय पर्वतारोहण समुदाय में नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने का काम करेगा।