अनीता कुंडू: दूध बेचने से एवरेस्ट फतह तक, हरियाणा की बेटी ने दोनों मार्गों से चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला का इतिहास रचा
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के हिसार जिले की पर्वतारोही अनीता कुंडू ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाकर माउंट एवरेस्ट समेत दुनिया की कई सर्वोच्च चोटियों पर भारत का तिरंगा फहराया है। बचपन में पिता को खोने के बाद दूध बेचकर परिवार की मदद करने वाली अनीता आज चीन और नेपाल दोनों मार्गों से एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही के रूप में पहचानी जाती हैं।
संघर्ष से भरा बचपन
8 जुलाई 1991 को हिसार जिले के एक छोटे से गाँव में जन्मी अनीता कुंडू के जीवन में मुश्किलें बहुत जल्दी आ गईं। महज 12 वर्ष की आयु में उनके पिता का निधन हो गया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमज़ोर हो गई। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण अनीता ने कम उम्र में ही ज़िम्मेदारियाँ उठा लीं — वह दूध बेचकर अपनी माँ का हाथ बँटाती थीं, जो खेतों में मेहनत कर परिवार को संभाल रही थीं।
बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाली अनीता ने पाँचवीं कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया था, लेकिन पिता के निधन के बाद घरेलू परिस्थितियों ने उन्हें यह शौक छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
शिक्षा और हरियाणा पुलिस में चयन
अनीता ने अपनी पढ़ाई हिसार से पूरी की। उन्होंने जाट कॉलेज से बीए किया और इसके बाद इतिहास विषय में एमए की डिग्री हासिल की। वर्ष 2008 में उनके जीवन में निर्णायक मोड़ आया जब उनका चयन हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ। सरकारी नौकरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया, लेकिन अनीता के भीतर कुछ असाधारण करने की ललक लगातार बढ़ती रही।
हरियाणा पुलिस में प्रशिक्षण के दौरान ऊँचे पहाड़ों ने उन्हें आकर्षित किया। उन्होंने अपने अधिकारियों से पर्वतारोहण में रुचि ज़ाहिर की और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला।
एवरेस्ट और अन्य शिखरों पर विजय
एक बार पर्वतारोहण की राह पकड़ने के बाद अनीता कुंडू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह चीन और नेपाल — दोनों मार्गों से माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इसके अलावा उन्होंने माउंट मकालू और माउंट मनास्लू जैसी अत्यंत कठिन चोटियों को भी अपने साहस से जीता।
उनकी उपलब्धियाँ हिमालय तक सीमित नहीं रहीं। अनीता ने अंटार्कटिका की सर्वोच्च चोटी विन्सन मैसिफ और दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी अकोंकागोआ पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई की। यह उपलब्धि उन्हें वैश्विक पर्वतारोहण के मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान दिलाती है।
राष्ट्रीय सम्मान और पहचान
अनीता कुंडू की असाधारण उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। उन्हें प्रतिष्ठित तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार और कल्पना चावला अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। ये पुरस्कार उनके संघर्ष और समर्पण की आधिकारिक स्वीकृति हैं।
आम जनता पर असर और प्रेरणा
यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए खेल और साहसिक गतिविधियों में करियर बनाना अभी भी एक कठिन चुनौती है। अनीता की कहानी यह सिद्ध करती है कि सीमित संसाधन और प्रतिकूल परिस्थितियाँ किसी भी लक्ष्य को असंभव नहीं बनातीं। गौरतलब है कि हरियाणा ने पिछले दो दशकों में कई महिला खिलाड़ियों और साहसी व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है, और अनीता कुंडू इस परंपरा की एक उज्ज्वल कड़ी हैं।
अनीता की यात्रा आज देश भर की युवा लड़कियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन चुकी है — यह संदेश देती हुई कि हालात चाहे जितने कठिन हों, हौसला और मेहनत किसी भी शिखर को पहुँच के भीतर ला सकते हैं।