तेल कंपनियों को ईंधन मूल्य वृद्धि के बाद भी ₹750 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान: पेट्रोलियम मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार, 18 मई को स्पष्ट किया कि हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को अभी भी प्रतिदिन करीब ₹750 करोड़ का घाटा हो रहा है। नई दिल्ली में दिए गए इस बयान में उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी राज्य से कमी की सूचना नहीं है।
नुकसान की स्थिति और मूल्य वृद्धि का असर
शर्मा के अनुसार, ईंधन मूल्य वृद्धि से पहले सरकारी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा करीब ₹1,000 करोड़ था। हालिया मूल्य संशोधन के बाद यह घटकर लगभग ₹750 करोड़ प्रतिदिन रह गया है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि मूल्य वृद्धि से कुछ राहत मिली है, लेकिन कंपनियाँ अभी भी गहरे वित्तीय दबाव में हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों के लिए किसी राहत पैकेज पर विचार नहीं कर रही है।
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
शर्मा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और एलएनजी आयात में पिछले करीब डेढ़ महीने से लगातार बाधाएँ बनी हुई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो रही है और भारत के ऊर्जा आयात बिल पर दबाव बढ़ा है। ऊर्जा बाज़ार में उतार-चढ़ाव के कारण सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएँ गहरी हो रही हैं।
ईंधन आपूर्ति और भंडार की स्थिति
आपूर्ति की स्थिति पर शर्मा ने कहा, 'हमारे पास पर्याप्त भंडार है और कहीं भी ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।' उन्होंने बताया कि 'सरकार और तेल कंपनियाँ स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं ताकि पूरे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति और सुचारु वितरण सुनिश्चित किया जा सके।' इसके अलावा, ईंधन माँग के पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है — थोक बिक्री की तुलना में खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर माँग अधिक शिफ्ट हो रही है।
एलपीजी आपूर्ति सामान्य
एलपीजी वितरण को लेकर शर्मा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद तेल कंपनियाँ स्थिर वितरण बनाए रखने में सफल रही हैं। उनके अनुसार, पिछले चार दिनों में करीब 1.72 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई, जबकि लगभग 1.69 लाख बुकिंग रिक्वेस्ट प्राप्त हुए। यह आँकड़ा बताता है कि आपूर्ति शृंखला फिलहाल सामान्य और स्थिर बनी हुई है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक ओएमसी का घाटा बना रह सकता है। राहत पैकेज की अनुपस्थिति में इन कंपनियों की बैलेंसशीट पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जो दीर्घकालिक निवेश क्षमता को प्रभावित कर सकती है।