भीलवाड़ा में 100 वर्ष प्राचीन जुझारजी महाराज की मूर्ति खंडित, VHP-बजरंग दल का आक्रोश; पुलिस जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के पुर रोड स्थित प्रतापनगर स्कूल परिसर में स्थापित 100 वर्ष प्राचीन जुझारजी महाराज की मूर्ति को कथित असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किए जाने का मामला सोमवार, 18 मई को सामने आया। घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में तीव्र रोष फैल गया और स्थानीय निवासियों सहित विभिन्न सामाजिक व हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता घटनास्थल पर एकत्रित हो गए।
आस्था का केंद्र और पृष्ठभूमि
यह प्राचीन देवस्थान तेली समाज के गुटकणिया परिवार की गहरी आस्था का केंद्र रहा है, जो विगत कई वर्षों से यहाँ नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते आए हैं। इस स्थल के साथ जुड़ी धार्मिक भावनाओं को देखते हुए मूर्ति के खंडन की खबर ने समाज के व्यापक वर्ग को आहत किया।
मौके पर जुटे संगठन और प्रमुख लोग
घटना की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के पदाधिकारी, तेली समाज के युवा और प्रबुद्धजन घटनास्थल पर पहुँचे। उपस्थित लोगों में विहिप के कमल राजपुरोहित, प्रमोद शर्मा, राज सालवी तथा तेली समाज से रामेश्वर लाल तेली, भीमराज गुटकणिया, भगवती लाल तेली, जगदीश चंद्र गुटकणिया, दीपक कुमार, रतन लाल, भैरूलाल, ओम प्रकाश और किशन गुटकणिया सहित दर्जनों लोग शामिल रहे। सभी ने पुलिस-प्रशासन से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की माँग की।
VHP की तीखी प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद के भीलवाड़ा महानगर सह-मंत्री सुशील सुवालका ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 'कुछ असामाजिक तत्व लगातार भीलवाड़ा शहर की शांत फिज़ा में ज़हर घोलकर भाईचारे और शांत माहौल को खराब करने की घिनौनी कोशिशें कर रहे हैं। ऐसी ताकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने पुलिस-प्रशासन से माँग की कि दोषियों को शीघ्र बेनकाब कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जाएँ।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतापनगर थाना प्रभारी सुनील ताड़ा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। थाना प्रभारी ताड़ा ने बताया कि पुलिस टीम ने घटनास्थल का मौका-मुआयना कर लिया है और कथित असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने स्थिति को शांत करने के प्रयास भी किए।
आगे क्या
फिलहाल पुलिस जाँच जारी है और किसी की गिरफ्तारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सामाजिक संगठन पहले से ही सतर्क हैं। स्थानीय संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन की संभावना बनी रहेगी।