5 अक्टूबर 2026
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तुंगनाथ मंदिर: विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर, चंद्रशिला की गोद में तृतीय केदार का इतिहास

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तुंगनाथ मंदिर: विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर, चंद्रशिला की गोद में तृतीय केदार का इतिहास

सारांश

चंद्रशिला की गोद में बसा तुंगनाथ महज एक मंदिर नहीं — यह विश्व का सर्वोच्च शिव धाम है। पांडवों की आस्था से जुड़ा तृतीय केदार आज भी श्रद्धालुओं और ट्रेकर्स दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है। उत्तराखंड के CM ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर सभी को दर्शन का न्योता दिया है।

मुख्य बातें

श्री तुंगनाथ मंदिर विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर है, जो रुद्रप्रयाग जिले में चंद्रशिला पर्वत पर स्थित है।
यह पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय है।
मान्यता है कि पांडवों ने कुरुक्षेत्र युद्ध के पाप से मुक्ति के लिए यहाँ भगवान शिव की भुजाओं (बाहु) की पूजा कर मंदिर स्थापित किया था।
शीतकाल में कपाट बंद होने पर भगवान तुंगनाथ की उत्सव मूर्ति मक्कूमठ के श्री मार्कंडेय मंदिर में स्थापित की जाती है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर वीडियो साझा कर तुंगनाथ महादेव के दर्शन की अपील की।
चोपता ('मिनी स्विट्जरलैंड') से शुरू होने वाला ट्रेक मार्ग बुग्यालों और देवदार वनों से होकर गुजरता है।

रुद्रप्रयाग जिले में चंद्रशिला पर्वत की गोद में विराजमान श्री तुंगनाथ मंदिर विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर है, जहाँ पंच केदारों में से तृतीय केदार के रूप में भगवान शिव की आराधना की जाती है। देवभूमि उत्तराखंड का यह आध्यात्मिक धाम युगों से श्रद्धालुओं, ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों का प्रमुख गंतव्य रहा है। 5 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का वीडियो साझा कर सभी से दर्शन की अपील की।

मुख्यमंत्री की अपील और सोशल मीडिया पोस्ट

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'भगवान शिव को समर्पित और रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद श्री तुंगनाथ मंदिर, पाँच पवित्र केदारों में से एक है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा, इस मंदिर की आध्यात्मिक आभा और प्राकृतिक सुंदरता मन को बहुत शांति देती है।' उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से रुद्रप्रयाग पहुँचने पर तुंगनाथ महादेव के दर्शन के लिए अवश्य जाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह स्थान ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक विशेष आकर्षण है। उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

पौराणिक इतिहास और महत्त्व

मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में कुरुक्षेत्र युद्ध के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने यहाँ भगवान शिव की भुजाओं (बाहु) की पूजा-अर्चना कर इस मंदिर की स्थापना की थी। पंच केदारों में तुंगनाथ का स्थान 'तृतीय केदार' के रूप में है और यह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। बर्फ से ढकी गगनचुंबी चोटियों और अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह धाम सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है।

शीतकाल में कपाट बंदी की परंपरा

भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और तापमान शून्य से नीचे चले जाने पर मंदिर तक जाने वाले ट्रेकिंग मार्ग असुरक्षित हो जाते हैं। परंपरा के अनुसार, शीतकाल के छह महीनों के लिए भगवान तुंगनाथ की प्रतीकात्मक उत्सव मूर्ति को मक्कूमठ स्थित श्री मार्कंडेय मंदिर (मार्कंडेश्वर मंदिर) में स्थापित किया जाता है, जहाँ पूरे शीतकाल में विधि-विधान से उनकी पूजा होती है। यह परंपरा इस क्षेत्र की धार्मिक संस्कृति की अनूठी पहचान है।

चोपता से ट्रेक और प्राकृतिक सौंदर्य

उत्तराखंड के 'मिनी स्विट्जरलैंड' के नाम से विख्यात चोपता से शुरू होने वाला तुंगनाथ का पैदल मार्ग मखमली बुग्यालों और देवदार के घने जंगलों से होकर गुजरता है। यह ट्रेक रोमांचप्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। बादलों के बीच महादेव की उपस्थिति का एहसास कराने वाला यह धाम आध्यात्मिक यात्रा और साहसिक पर्यटन दोनों का संगम है।

पर्यटन और धार्मिक महत्त्व

विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर होने का गौरव प्राप्त तुंगनाथ न केवल धार्मिक दृष्टि से अपितु पारिस्थितिकी पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उत्तराखंड सरकार इस क्षेत्र को धार्मिक और साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना के विकास की संभावनाएँ और भी प्रबल होती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो केदारनाथ पुनर्निर्माण के बाद उत्तराखंड के अन्य तीर्थों को वैश्विक मानचित्र पर लाने की कोशिश है। हालाँकि, तुंगनाथ मंदिर के एक हिस्से के झुकाव और संरक्षण की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए — सोशल मीडिया पोस्ट आस्था और पर्यटन को बढ़ावा तो देती है, लेकिन धरोहर संरक्षण के ठोस कदमों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। बढ़ता पर्यटन दबाव इस नाजुक पारिस्थितिकी क्षेत्र के लिए दोधारी तलवार हो सकता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुंगनाथ मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में चंद्रशिला पर्वत पर स्थित है और विश्व का सर्वोच्च शिव मंदिर माना जाता है। यह पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थान रखता है।
तुंगनाथ मंदिर का पांडवों से क्या संबंध है?
मान्यता है कि कुरुक्षेत्र युद्ध के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाओं (बाहु) की पूजा-अर्चना कर इस मंदिर की स्थापना की थी। यह पौराणिक आख्यान मंदिर की धार्मिक महत्ता को और गहरा बनाता है।
सर्दियों में तुंगनाथ मंदिर के कपाट क्यों बंद होते हैं और भगवान की मूर्ति कहाँ जाती है?
भारी बर्फबारी के कारण तापमान शून्य से नीचे चले जाने पर मंदिर तक पहुँचना असुरक्षित हो जाता है, इसलिए शीतकाल में कपाट बंद कर दिए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, भगवान तुंगनाथ की उत्सव मूर्ति को मक्कूमठ स्थित श्री मार्कंडेय मंदिर में स्थापित किया जाता है, जहाँ छह महीने पूजा होती है।
तुंगनाथ ट्रेक कहाँ से शुरू होता है और यह कितना कठिन है?
तुंगनाथ ट्रेक उत्तराखंड के चोपता (जिसे 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहा जाता है) से शुरू होता है और मखमली बुग्यालों तथा देवदार के जंगलों से होकर गुजरता है। यह ट्रेकिंग शौकीनों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने तुंगनाथ मंदिर के बारे में क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर कहा कि तुंगनाथ की आध्यात्मिक आभा और प्राकृतिक सुंदरता मन को शांति देती है। उन्होंने सभी से रुद्रप्रयाग आने पर श्री तुंगनाथ महादेव के दर्शन करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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