ओडीओपी योजना से यूपी के 3.5 लाख रोजगार और ₹2 लाख करोड़ का निर्यात, दीपावली पर 'लोकल वाली दिवाली' की लहर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना दीपावली 2026 पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रही है — मिट्टी के दीये से लेकर बनारसी साड़ी तक, प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की माँग ने कारीगरों और छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन पर वर्ष 2018 में शुरू हुई इस पहल ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति की है।
योजना का दायरा और उपलब्धियाँ
ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 से अब तक 21,000 से अधिक लाभार्थियों को वित्तीय सहायता दी गई है। इस अवधि में ₹8,000 करोड़ से अधिक की मार्जिन मनी जारी की गई और 3.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। प्रदेश का कुल निर्यात वर्ष 2017-18 के ₹88,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच गया है — यह वृद्धि ओडीओपी के व्यापारिक असर की स्पष्ट गवाही है।
वाराणसी की बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, कन्नौज का इत्र, मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, भदोही की कालीन, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और गोरखपुर की टेराकोटा कला — इन सभी को ओडीओपी के तहत संरक्षण, प्रशिक्षण, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन सहायता उपलब्ध कराई गई है।
दीपावली पर माटी कला महोत्सव
लखनऊ के डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में आयोजित माटी कला महोत्सव इस पहल का जीवंत उदाहरण बना। यहाँ 40 से अधिक स्टॉल पर मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएँ और सजावटी उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। प्रदेश भर से आए कारीगर और उद्यमी यहाँ न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं बल्कि अपने उत्पादों की मार्केटिंग के लिए एक सशक्त मंच भी पा रहे हैं।
गौरतलब है कि यूपीआईटीएस-2025 में ओडीओपी के 466 स्टॉल के माध्यम से ₹20.77 करोड़ के बिजनेस लीड और डील हासिल हुईं, जो यह दर्शाता है कि पर्वों और सामान्य दोनों अवसरों पर ग्राहकों में ओडीओपी उत्पादों के प्रति विशेष रुचि है।
डिजिटल और ई-कॉमर्स का योगदान
विभिन्न सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए ओडीओपी उत्पादों का व्यापक प्रचार हो रहा है। ऑनलाइन खरीदारी में आई तेजी ने स्थानीय उद्यमियों का मनोबल बढ़ाया है और उनकी पहुँच राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक विस्तृत हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब 'वोकल फॉर लोकल' का नारा नीति-निर्माण और उपभोक्ता व्यवहार दोनों को प्रभावित कर रहा है।
नेतृत्व का आह्वान और 'लोकल वाली दिवाली'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विदेशी दौरों और विदेशी राजनेताओं से मुलाकात के अवसर पर उत्तर प्रदेश के ओडीओपी उत्पाद भेंट में देते हैं, जिससे इन उत्पादों को कूटनीतिक पटल पर भी पहचान मिली है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस और धन्वंतरि जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों से 'लोकल वाली दिवाली' मनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी की एक खरीदारी किसी हुनरमंद परिवार के आंगन में स्वावलंबन और सम्मान का दीप प्रज्वलित कर सकती है। यह योजना प्रदेश की पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों को आर्थिक विकास के मजबूत आधार में बदलने का प्रयास है, जिसके परिणाम आँकड़ों में स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
आने वाले समय में डिजिटल बाजारों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में ओडीओपी की भागीदारी और बढ़ने की संभावना है, जो प्रदेश के कारीगरों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।