अयोध्या दीपोत्सव 2026: परमहंस आचार्य बोले — योगी ने खुशी दी, अब जनता योगी को दोबारा CM बनाए
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के रामघाट पर 5 नवंबर 2026 को दीपोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य सहित अनेक संत इस अवसर पर उपस्थित रहे। आचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, और अब जनता की जिम्मेदारी है कि वह इस उत्सव की निरंतरता के लिए उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपे।
दीपोत्सव का ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ
परमहंस आचार्य ने इस अवसर पर कहा, 'यह रामनगरी अयोध्या का रामघाट है। यहाँ स्थित श्री तपस्वी जी की छावनी संतों की सबसे पुरानी और प्राचीन पीठों में से एक है। इसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है।' उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम प्रकट हुए, तब यहाँ इतने साधु-संत एकत्र होते थे कि इसे संतों की छावनी कहा जाने लगा — और यह परंपरा तभी से चली आ रही है।
आचार्य ने दीपावली की उत्पत्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया — और उसी दिन से दीपावली का उत्सव मनाया जाने लगा।
आचार्य का राजनीतिक संदेश
परमहंस आचार्य ने खुलकर कहा कि बीच में एक ऐसा कालखंड आया जब भारतीय संस्कृति पर ग्रहण-सा लग गया था — चाहे वह मुगल काल रहा हो, ब्रिटिश शासन रहा हो या तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस और सपा जैसी सरकारें रही हों। उन्होंने कहा कि जब से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आई, तब से भारतीय संस्कृति को पुनर्स्थापित करने का प्रयास हुआ है।
उन्होंने आगे जनता से आह्वान किया: सीएम योगी के नेतृत्व में जो खुशी मिली है, वह पूरे उत्तर प्रदेश, देश और दुनिया को मिली है। अब चुनाव भी आने वाले हैं और इस दीपोत्सव को निरंतर बनाए रखने तथा रामराज्य की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए जनता को योगी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाना चाहिए।
अखिलेश यादव पर तीखी टिप्पणी
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े समाजवादी पार्टी (SP) कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए परमहंस आचार्य ने कहा कि अखिलेश यादव यादव सरनेम लगाते हैं, लेकिन उन्होंने कभी भगवान कृष्ण के बारे में नहीं बोला और कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की बात नहीं की। उन्होंने कहा, 'अब अचानक हिंदुत्व, जाति और सनातन धर्म में रुचि या वोट हासिल करने की इच्छा जाग गई है। इस बयान के पीछे उनकी मंशा क्या है, ये वही बेहतर बता सकते हैं।'
दीपोत्सव का आयोजन
इस वर्ष दीपोत्सव का शुभारंभ रामघाट पर बाकायदा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। रंगोली बनाई गई और 'दीपोत्सव' लिखा गया। गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में अयोध्या का दीपोत्सव हर वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है और यह आयोजन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त कर चुका है। आने वाले दिनों में इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के उमड़ने की उम्मीद है।