शंकर महादेवन का दुख: मृदंगम वादक श्रीधर पार्थसारथी का कॉन्सर्ट के दौरान निधन
सारांश
मुख्य बातें
प्रख्यात गायक और संगीतकार शंकर महादेवन ने मशहूर मृदंगम वादक एवं कार्नेटिक संगीतकार श्रीधर पार्थसारथी के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्रीधर का निधन एक कॉन्सर्ट के दौरान हुआ — संगीत से उनके अटूट जुड़ाव का शायद सबसे मार्मिक प्रमाण। उनके जाने से भारतीय शास्त्रीय और फ्यूजन संगीत जगत में एक अपूरणीय रिक्तता आ गई है।
शंकर महादेवन की भावभीनी श्रद्धांजलि
शंकर महादेवन ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक नोट साझा करते हुए लिखा, 'यकीन ही नहीं हो रहा। मेरे लिए और म्यूजिक जगत के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षति है। हमारे सबसे प्यारे श्रीधर पार्थसारथी, जो सबसे बेहतरीन मृदंगवादकों में से एक और एक असाधारण संगीतकार थे, हमें दुखी छोड़कर चले गए।'
उन्होंने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए जोड़ा, 'करीब 40 साल पहले मेरा पहला कार्नेटिक क्लासिक कॉन्सर्ट श्रीधर के साथ था, जो मृदंगम बजा रहे थे। हमने म्यूजिक, मजाक और पागलपन भरी हँसी के साथ घंटे और दिन बिताए हैं। उनका निधन एक कॉन्सर्ट में हुआ — क्या आप यकीन कर सकते हैं?'
शंकर ने श्रद्धांजलि का समापन करते हुए लिखा, 'भगवान उनके परिवार की रक्षा करे और उन्हें हिम्मत दे। लव यू श्रीधर।' उनकी इस पोस्ट पर संगीत जगत की अनेक हस्तियों और प्रशंसकों ने अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
श्रीधर पार्थसारथी: एक अनमोल संगीत विरासत
श्रीधर पार्थसारथी एक प्रतिष्ठित कार्नेटिक गायक, मृदंगम वादक और प्लेबैक सिंगर थे, जो शास्त्रीय संगीतकारों के सुविख्यात परिवार से आते थे। उन्होंने डी. के. पट्टम्माल, डॉ. एम. बालमुरलीकृष्ण और मदुरै जी. एस. मणी जैसे महान कर्नाटक संगीत के दिग्गजों के साथ संगति कलाकार के रूप में काम किया था।
दुनियाभर के बड़े-बड़े कॉन्सर्ट हॉल और संगीत महोत्सवों में अपनी प्रस्तुतियाँ देकर उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया। वे शंकर महादेवन, लुई बैंक्स, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, उस्ताद अमजद अली खान, तौफीक कुरैशी, फज़ल कुरैशी और नीलाद्रि कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ यादगार जुगलबंदियाँ कर चुके थे।
फ्यूजन और क्रॉस-कल्चरल संगीत में योगदान
शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ श्रीधर पार्थसारथी फ्यूजन और विभिन्न संस्कृतियों को एकत्र करने वाले संगीत प्रोजेक्ट्स में बेहद सक्रिय थे। उन्होंने कार्ल पीटर्स समेत अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ भी मंच साझा किया, जो उनकी सांगीतिक विविधता और खुलेपन का परिचायक था। गौरतलब है कि वे केवल एक शास्त्रीय वादक नहीं, बल्कि संगीत की अनेक धाराओं को एकसाथ साधने वाले विरल कलाकार थे।
संगीत जगत पर असर
श्रीधर पार्थसारथी का यह जाना ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय शास्त्रीय और फ्यूजन संगीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। उनके साथ काम करने वाले कई संगीतकारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उनकी स्मृतियाँ और उनका संगीत उनके सहयोगियों तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।