9 अक्टूबर 2026
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आरएसएस शताब्दी वर्ष: मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के वैश्विक संपर्क दौरे पर रवाना

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आरएसएस शताब्दी वर्ष: मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के वैश्विक संपर्क दौरे पर रवाना

सारांश

आरएसएस के शताब्दी वर्ष में मोहन भागवत की अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा महज़ एक सांगठनिक कदम नहीं — यह संघ की वैश्विक पहचान को नई परिभाषा देने की कोशिश है। न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से लंदन तक, संवाद का दायरा प्रवासी भारतीयों से आगे बढ़कर मुख्यधारा के समाज तक पहुँचने का है।

मुख्य बातें

मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 को अमेरिका , कनाडा और ब्रिटेन के तीन-देशीय दौरे पर रवाना हुए।
29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में 'एकात्मता उत्सव' ('यूनिवर्सल वननेस') में हज़ारों प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद।
31 अगस्त–1 सितंबर को टोरंटो में प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक; कनाडा में खालिस्तानी समूहों के विरोध की आशंका के चलते उच्च सुरक्षा बंदोबस्त।
ब्रिटेन के लंदन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रमों में भागीदारी प्रस्तावित।
सह सरकार्यवाह सी.आर.
मुकुंदा के अनुसार यात्रा के तीन उद्देश्य: सकारात्मक छवि, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश और प्रवासी भारतीयों के हितों पर संवाद।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 को तीन देशों — अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन — के दौरे पर रवाना हुए। यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किए गए वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रवासी भारतीयों, छात्रों और बौद्धिक वर्ग तक संघ का संदेश पहुँचाना है।

मुख्य घटनाक्रम

29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में 'एकात्मता उत्सव' — जिसे 'यूनिवर्सल वननेस' भी कहा जा रहा है — का आयोजन किया जाएगा, जिसे भागवत मुख्य रूप से संबोधित करेंगे। संघ सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में हज़ारों प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है। यह भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय से जुड़े संगठनों की भागीदारी वाला एक बड़ा सामुदायिक आयोजन बताया जा रहा है।

अमेरिका के बाद भागवत 31 अगस्त और 1 सितंबर को कनाडा के टोरंटो में रहेंगे, जहाँ वे प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक करेंगे और मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे। संघ सूत्रों का मानना है कि लंबे अरसे बाद किसी आरएसएस प्रमुख का कनाडा दौरा हो रहा है, जिसे ऐतिहासिक बताया जा रहा है।

कनाडा में सुरक्षा बंदोबस्त और विरोध की आशंका

भागवत के कनाडा दौरे से पहले ही खालिस्तानी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसे देखते हुए कनाडा में उनके कार्यक्रम और प्रवास को लेकर उच्च सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। मिलने आने वाले लोगों का पहले से बैकग्राउंड चेक किया जाएगा, उसके बाद ही उन्हें भागवत से मिलने की अनुमति दी जाएगी।

ब्रिटेन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रम

उत्तरी अमेरिका के बाद भागवत ब्रिटेन जाएंगे, जहाँ लंदन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यहाँ भी भारतीय मूल के लोगों, हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद यात्रा का अहम हिस्सा रहेगा।

दौरे के तीन प्रमुख उद्देश्य

आरएसएस के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा के अनुसार, इस वैश्विक यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के बारे में सकारात्मक और तथ्यात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना। दूसरा, भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की परंपरा का संदेश विश्व तक पहुँचाना। तीसरा, विदेशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों और अधिकारों से जुड़े विषयों पर मुख्यधारा के समाज के साथ संवाद को मज़बूत करना।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आरएसएस अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है और संगठन अपनी वैश्विक उपस्थिति को नई ऊँचाइयाँ देने की दिशा में काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शताब्दी वर्ष में अपनी वैश्विक प्रासंगिकता सिद्ध करने का प्रयास है। कनाडा में खालिस्तानी विरोध और बैकग्राउंड चेक की ज़रूरत यह बताती है कि यह यात्रा कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है। गौरतलब है कि भारत-कनाडा संबंध हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं, और ऐसे में किसी प्रमुख हिंदू संगठन के प्रमुख का टोरंटो दौरा राजनयिक हलकों में भी नज़र से नहीं गुज़रेगा। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश सार्वभौमिक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि यह संवाद केवल प्रवासी हिंदू समुदाय तक सीमित रहता है या मुख्यधारा के पश्चिमी समाज तक वास्तव में पहुँचता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत का तीन देशों का दौरा क्यों हो रहा है?
यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किए गए वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य प्रवासी भारतीयों, हिंदू समुदाय और बौद्धिक वर्ग के साथ संवाद बढ़ाना और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश विश्व तक पहुँचाना है।
न्यूयॉर्क में 'एकात्मता उत्सव' क्या है?
'एकात्मता उत्सव' — जिसे 'यूनिवर्सल वननेस' भी कहा जा रहा है — 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में आयोजित एक बड़ा सामुदायिक कार्यक्रम है। इसमें मोहन भागवत मुख्य वक्ता होंगे और हज़ारों प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है।
कनाडा दौरे में किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई है?
कनाडा में खालिस्तानी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन की आशंका के मद्देनज़र उच्च सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। मिलने आने वाले हर व्यक्ति का पहले से बैकग्राउंड चेक किया जाएगा और उसके बाद ही भागवत से मिलने की अनुमति दी जाएगी।
भागवत ब्रिटेन में किन कार्यक्रमों में शामिल होंगे?
ब्रिटेन के लंदन में भागवत कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है। वहाँ भारतीय मूल के लोगों, हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद प्रमुख एजेंडा होगा।
आरएसएस के सह सरकार्यवाह ने इस दौरे के क्या उद्देश्य बताए?
सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा के अनुसार तीन उद्देश्य हैं: भारत और आरएसएस के बारे में सकारात्मक व तथ्यात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश वैश्विक स्तर पर फैलाना, और विदेशों में रहने वाले हिंदुओं व भारतीय मूल के लोगों के हितों पर मुख्यधारा के समाज से संवाद बढ़ाना।
राष्ट्र प्रेस
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