आरएसएस शताब्दी वर्ष: मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के वैश्विक संपर्क दौरे पर रवाना
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 को तीन देशों — अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन — के दौरे पर रवाना हुए। यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किए गए वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रवासी भारतीयों, छात्रों और बौद्धिक वर्ग तक संघ का संदेश पहुँचाना है।
मुख्य घटनाक्रम
29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में 'एकात्मता उत्सव' — जिसे 'यूनिवर्सल वननेस' भी कहा जा रहा है — का आयोजन किया जाएगा, जिसे भागवत मुख्य रूप से संबोधित करेंगे। संघ सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में हज़ारों प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है। यह भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय से जुड़े संगठनों की भागीदारी वाला एक बड़ा सामुदायिक आयोजन बताया जा रहा है।
अमेरिका के बाद भागवत 31 अगस्त और 1 सितंबर को कनाडा के टोरंटो में रहेंगे, जहाँ वे प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक करेंगे और मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे। संघ सूत्रों का मानना है कि लंबे अरसे बाद किसी आरएसएस प्रमुख का कनाडा दौरा हो रहा है, जिसे ऐतिहासिक बताया जा रहा है।
कनाडा में सुरक्षा बंदोबस्त और विरोध की आशंका
भागवत के कनाडा दौरे से पहले ही खालिस्तानी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसे देखते हुए कनाडा में उनके कार्यक्रम और प्रवास को लेकर उच्च सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। मिलने आने वाले लोगों का पहले से बैकग्राउंड चेक किया जाएगा, उसके बाद ही उन्हें भागवत से मिलने की अनुमति दी जाएगी।
ब्रिटेन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रम
उत्तरी अमेरिका के बाद भागवत ब्रिटेन जाएंगे, जहाँ लंदन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यहाँ भी भारतीय मूल के लोगों, हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद यात्रा का अहम हिस्सा रहेगा।
दौरे के तीन प्रमुख उद्देश्य
आरएसएस के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा के अनुसार, इस वैश्विक यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के बारे में सकारात्मक और तथ्यात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना। दूसरा, भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की परंपरा का संदेश विश्व तक पहुँचाना। तीसरा, विदेशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों और अधिकारों से जुड़े विषयों पर मुख्यधारा के समाज के साथ संवाद को मज़बूत करना।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आरएसएस अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है और संगठन अपनी वैश्विक उपस्थिति को नई ऊँचाइयाँ देने की दिशा में काम कर रहा है।