न्यूयॉर्क में 30 देशों के धर्मगुरुओं का संकल्प: धर्म के नाम पर नफरत नहीं, मोहन भागवत भी रहे मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 30 अगस्त 2026 को आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस' (सार्वभौमिक एकता) सम्मेलन में 30 देशों के 200 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधियों ने एक ऐतिहासिक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें धर्म के नाम पर नफरत, हिंसा और अमानवीय व्यवहार को सिरे से नकारा गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत सहित विश्व के प्रमुख धर्मों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
घोषणापत्र में क्या कहा गया
सम्मेलन में तैयार किए गए घोषणापत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया — 'हम नफरत, अपमान, अमानवीय व्यवहार या हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को अस्वीकार करेंगे।' साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि गहरी आस्था और भिन्न मान्यताओं के प्रति सम्मान एक साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।
घोषणापत्र ने आस्था की दोहरी भूमिका को स्वीकार किया — एक ओर उसकी मेल-मिलाप और उपचार की असाधारण शक्ति, और दूसरी ओर यह कड़वा सच कि धर्म का दुरुपयोग कभी-कभी विभाजन और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए भी किया गया है।
डिजिटल युग में नफरत की चुनौती
धार्मिक नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान दौर में नफरत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीमाओं के पार तेज़ी से फैलती है। घोषणापत्र में चेतावनी दी गई कि सशस्त्र संघर्षों, विस्थापन और बढ़ते अविश्वास के इस माहौल में कोई भी अकेली सरकार, संस्था या तकनीक इस ज़िम्मेदारी को नहीं उठा सकती।
घोषणापत्र के अनुसार — 'कोई भी सरकार, संस्था या तकनीक अकेले इस समय की जिम्मेदारी नहीं उठा सकती — लेकिन एक जिम्मेदारी है जो खास तौर पर हमारी है।'
एकता, गरिमा और युवाओं पर जोर
नेताओं ने स्पष्ट किया कि एकता के लिए एक जैसा होना ज़रूरी नहीं और गहरी आस्था के लिए दूसरों से नफरत की कोई आवश्यकता नहीं। उन्होंने हर व्यक्ति की गरिमा को सर्वोपरि माना और अपनी-अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं या पहचान को बनाए रखते हुए एकजुट रहने का संकल्प लिया।
विशेष रूप से, नेताओं ने विवाद या त्रासदी होने से पहले विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के युवाओं को एक साथ लाने का वादा किया। घोषणापत्र में कहा गया — 'जिसे हम जानते हैं, उससे नफरत करना मुश्किल होता है।'
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानवीय प्रगति
इस सम्मेलन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि घोषणापत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों से जुड़े नैतिक सवालों को भी शामिल किया गया। नेताओं ने संकल्प लिया कि वे इस बात पर ज़ोर देंगे कि तकनीक से मानवीय गरिमा, सच्चाई, आज़ादी और आपसी जुड़ाव मज़बूत हों — कमज़ोर नहीं।
घोषणापत्र में युद्ध, गरीबी, पर्यावरण संरक्षण और विस्थापन जैसे मुद्दों पर भी सामूहिक सेवा का आह्वान किया गया। नेताओं ने कहा — 'हमारा सहयोग न सिर्फ हमारी संयुक्त बातों में, बल्कि हमारे संयुक्त कामों में भी दिखना चाहिए।'
राखी बंधन: आपसी जुड़ाव का प्रतीक
कार्यक्रम में एक भावपूर्ण परंपरा भी निभाई गई — उपस्थित प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को राखी बाँधी, जो जुड़ाव, देखभाल और पारस्परिक जिम्मेदारी का प्रतीक थी। आयोजकों ने बताया कि इस परंपरा को परिवारों की सीमा से आगे बढ़ाकर मित्रों, पड़ोसियों और समुदायों तक ले जाने का संदेश दिया जा रहा है।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं। आगे की राह में यह देखना होगा कि यह घोषणापत्र ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।