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आईएसएम 2.0 से उभरीं 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ, 70,000 इंजीनियर प्रशिक्षित: अश्विनी वैष्णव

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आईएसएम 2.0 से उभरीं 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ, 70,000 इंजीनियर प्रशिक्षित: अश्विनी वैष्णव

सारांश

भारत में आईएसएम 2.0 के तहत 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरी हैं, 70,000 इंजीनियर प्रशिक्षित हो चुके हैं और आईएसएम 1.0 की 5 इकाइयाँ उत्पादन में आ चुकी हैं। सेमिकॉन इंडिया 2026 में सिंगापुर, यूरोप और दक्षिण कोरिया के साथ रणनीतिक राउंडटेबल्स ने भारत के ग्लोबल चिप हब बनने की रफ़्तार को और तेज़ कर दिया है।

मुख्य बातें

आईएसएम 2.0 के तहत देश में अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरकर सामने आई हैं।
105 से अधिक स्टार्टअप्स को EDA टूल्स तक पहुँच दी गई; 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग मिली।
पिछले चार वर्षों में 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियर प्रशिक्षित; लक्ष्य 85,000 का है।
आईएसएम 1.0 की 12 में से 5 सेमीकंडक्टर इकाइयाँ व्यावसायिक उत्पादन में आ चुकी हैं।
सेमिकॉन इंडिया 2026 में भारत-सिंगापुर ( 142 ), भारत-यूरोप ( 139 ) और भारत-दक्षिण कोरिया ( 115 ) राउंडटेबल्स हुए।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए विश्वसनीयता और वैश्विक साझेदारियों को अनिवार्य बताया।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 19 सितंबर 2026 को बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) के तहत देश में अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरकर सामने आई हैं, जो स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) के विकास की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत हैं। नई दिल्ली में आयोजित सेमिकॉन इंडिया 2026 कार्यक्रम के मौके पर दिए गए इस बयान ने भारत की ग्लोबल चिप हब बनने की महत्वाकांक्षा को नई ऊर्जा दी है।

आईएसएम 2.0 की उपलब्धियाँ

वैष्णव के अनुसार, 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी प्राप्त हो चुकी है, जो यह दर्शाता है कि निजी पूँजी अब इस क्षेत्र पर भरोसा करने लगी है।

पिछले चार वर्षों में देश में करीब 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य यह संख्या 85,000 तक पहुँचाना है। यह प्रतिभा-निर्माण कार्यक्रम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन श्रृंखला में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

विनिर्माण मोर्चे पर प्रगति

मंत्री ने बताया कि आईएसएम 1.0 के तहत स्वीकृत 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में से पाँच संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उच्च गुणवत्ता और लागत दक्षता दोनों को अनिवार्य बताया। भारत को एक विश्वसनीय देश के रूप में मान्यता मिल रही है और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की सुरक्षा के मामले में देश का रिकॉर्ड मज़बूत होने की बात उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित की।

वैश्विक साझेदारियों पर जोर

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि मज़बूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के निर्माण के लिए वैश्विक साझेदारियाँ आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वसनीयता, भरोसा, प्रोत्साहन और मूल्य सृजन को सहयोग के चार प्रमुख स्तंभ बताया। मिस्री ने आत्मनिर्भरता के लिए घरेलू क्षमताओं और वैश्विक विशेषज्ञता के संतुलित उपयोग पर भी बल दिया।

सेमिकॉन इंडिया 2026 के दौरान हुए कंट्री राउंडटेबल्स में भारत-सिंगापुर बैठक में 142 प्रतिभागी, भारत-यूरोप बैठक में 139 प्रतिभागी और भारत-दक्षिण कोरिया बैठक में 115 प्रतिभागी शामिल हुए। इन बैठकों में निवेश, एडवांस पैकेजिंग, सप्लाई चेन स्थानीयकरण, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भू-राजनीतिक बदलावों के चलते विविधीकरण की माँग तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश में अमेरिका और यूरोप ने पहले ही बड़े कदम उठाए हैं, और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता बढ़ने से उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और दूरसंचार — सभी क्षेत्रों में आयात-निर्भरता घटेगी और लागत में कमी आ सकती है। भारत इस दशक के अंत तक ग्लोबल चिप डिजाइन और निर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख नाम बनने की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 प्रशिक्षित इंजीनियरों के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि ये स्टार्टअप्स अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बिकने लायक उत्पाद कब तक लाएंगे। आईएसएम 1.0 की 12 में से केवल 5 इकाइयों का उत्पादन में आना यह याद दिलाता है कि घोषणाओं और क्रियान्वयन के बीच की खाई अभी पूरी तरह पाटी नहीं गई है। वेंचर कैपिटल की भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन बाज़ार में ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिकी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का स्तर बेहद ऊँचा है। भारत की असली परीक्षा फैब्रिकेशन क्षमता और डिजाइन-टू-मैन्युफैक्चरिंग इंटीग्रेशन में होगी — जो अभी भी काफी हद तक आयात-निर्भर है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) क्या है?
आईएसएम 2.0 भारत सरकार की सेमीकंडक्टर नीति का दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य देश में स्वदेशी चिप डिजाइन और निर्माण क्षमता विकसित करना है। इसके तहत स्टार्टअप्स को EDA टूल्स, फंडिंग और प्रशिक्षण के ज़रिए समर्थन दिया जा रहा है।
आईएसएम 2.0 के तहत कितनी चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरी हैं?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, आईएसएम 2.0 के तहत अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरकर सामने आई हैं। इनमें से 105 से अधिक स्टार्टअप्स को EDA टूल्स तक पहुँच दी गई है और 20 को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी मिली है।
भारत में चिप डिजाइन इंजीनियरों की तैयारी कहाँ तक पहुँची है?
पिछले चार वर्षों में देश में करीब 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य यह संख्या 85,000 तक पहुँचाना है।
सेमिकॉन इंडिया 2026 में किन देशों के साथ राउंडटेबल्स हुए?
सेमिकॉन इंडिया 2026 में भारत-सिंगापुर (142 प्रतिभागी), भारत-यूरोप (139 प्रतिभागी) और भारत-दक्षिण कोरिया (115 प्रतिभागी) राउंडटेबल्स आयोजित हुए। इनमें निवेश, सप्लाई चेन, एडवांस पैकेजिंग और प्रतिभा विकास पर चर्चा हुई।
आईएसएम 1.0 के तहत कितनी सेमीकंडक्टर इकाइयाँ उत्पादन में आई हैं?
आईएसएम 1.0 के तहत स्वीकृत 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में से 5 संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जैसा कि अश्विनी वैष्णव ने 19 सितंबर 2026 को जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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