आईएसएम 2.0 से उभरीं 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ, 70,000 इंजीनियर प्रशिक्षित: अश्विनी वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 19 सितंबर 2026 को बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) के तहत देश में अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियाँ उभरकर सामने आई हैं, जो स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) के विकास की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत हैं। नई दिल्ली में आयोजित सेमिकॉन इंडिया 2026 कार्यक्रम के मौके पर दिए गए इस बयान ने भारत की ग्लोबल चिप हब बनने की महत्वाकांक्षा को नई ऊर्जा दी है।
आईएसएम 2.0 की उपलब्धियाँ
वैष्णव के अनुसार, 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी प्राप्त हो चुकी है, जो यह दर्शाता है कि निजी पूँजी अब इस क्षेत्र पर भरोसा करने लगी है।
पिछले चार वर्षों में देश में करीब 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य यह संख्या 85,000 तक पहुँचाना है। यह प्रतिभा-निर्माण कार्यक्रम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन श्रृंखला में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।
विनिर्माण मोर्चे पर प्रगति
मंत्री ने बताया कि आईएसएम 1.0 के तहत स्वीकृत 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में से पाँच संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उच्च गुणवत्ता और लागत दक्षता दोनों को अनिवार्य बताया। भारत को एक विश्वसनीय देश के रूप में मान्यता मिल रही है और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की सुरक्षा के मामले में देश का रिकॉर्ड मज़बूत होने की बात उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित की।
वैश्विक साझेदारियों पर जोर
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि मज़बूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के निर्माण के लिए वैश्विक साझेदारियाँ आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वसनीयता, भरोसा, प्रोत्साहन और मूल्य सृजन को सहयोग के चार प्रमुख स्तंभ बताया। मिस्री ने आत्मनिर्भरता के लिए घरेलू क्षमताओं और वैश्विक विशेषज्ञता के संतुलित उपयोग पर भी बल दिया।
सेमिकॉन इंडिया 2026 के दौरान हुए कंट्री राउंडटेबल्स में भारत-सिंगापुर बैठक में 142 प्रतिभागी, भारत-यूरोप बैठक में 139 प्रतिभागी और भारत-दक्षिण कोरिया बैठक में 115 प्रतिभागी शामिल हुए। इन बैठकों में निवेश, एडवांस पैकेजिंग, सप्लाई चेन स्थानीयकरण, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भू-राजनीतिक बदलावों के चलते विविधीकरण की माँग तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश में अमेरिका और यूरोप ने पहले ही बड़े कदम उठाए हैं, और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता बढ़ने से उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और दूरसंचार — सभी क्षेत्रों में आयात-निर्भरता घटेगी और लागत में कमी आ सकती है। भारत इस दशक के अंत तक ग्लोबल चिप डिजाइन और निर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख नाम बनने की ओर अग्रसर है।