19 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन: पीठ और हैमस्ट्रिंग की अकड़न दूर करने का असरदार योगासन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन: पीठ और हैमस्ट्रिंग की अकड़न दूर करने का असरदार योगासन

सारांश

घंटों कुर्सी पर बैठने वालों की हैमस्ट्रिंग और ग्रोइन की अकड़न के लिए पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन एक असरदार उपाय है। आयुष मंत्रालय की अनुशंसित यह मुद्रा लचीलापन बढ़ाने के साथ मन को भी शांत करती है — बशर्ते स्लिप डिस्क या साइटिका न हो।

मुख्य बातें

पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन , पश्चिमोत्तानासन का उन्नत रूप है जिसमें पैरों को फैलाकर आगे झुका जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह बैठकर किया जाने वाला महत्वपूर्ण योगासन है जो शरीर का लचीलापन बढ़ाता है।
यह आसन हैमस्ट्रिंग, ग्रोइन, अंदरूनी जांघों और पीठ-कंधों की मांसपेशियों को व्यापक खिंचाव देता है।
रनिंग, साइकिलिंग या जिम करने वालों के लिए भी यह विशेष रूप से उपयोगी है।
स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द होने पर इस आसन से बचना चाहिए।

पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन उन लोगों के लिए एक अत्यंत उपयोगी योगाभ्यास है जो घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और जिनकी हैमस्ट्रिंग, पीठ तथा कंधे लगातार अकड़ी रहती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह बैठकर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है जो शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ-साथ मन को शांत कर तनाव को भी कम करता है।

क्या है पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन

यह आसन पश्चिमोत्तानासन का एक उन्नत रूप है। जहाँ सामान्य पश्चिमोत्तानासन में दोनों पैर आपस में जुड़े रहते हैं, वहीं इस आसन में पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुका जाता है। इसका नाम संस्कृत शब्दों से लिया गया है — 'पाद' अर्थात पैर, 'प्रसार' अर्थात फैलाना, 'पश्चिम' अर्थात शरीर का पिछला भाग, 'उत्तान' अर्थात विस्तारित तथा 'आसन' अर्थात मुद्रा।

यह आगे की ओर झुकने वाला योगासन है, जो पश्चिमोत्तानासन के सामान्य लाभों के अतिरिक्त पैरों के भीतरी भाग, कंधों के नीचे और बीच की मांसपेशियों को भी व्यापक खिंचाव प्रदान करता है।

हैमस्ट्रिंग और ग्रोइन पर असर

जब इस आसन में पैर फैलाकर आगे झुका जाता है, तो जांघ के पीछे की हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों पर सबसे गहरा खिंचाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से इन मांसपेशियों की टाइटनेस धीरे-धीरे दूर होती है और पैरों में हल्कापन महसूस होता है।

इसके साथ ही पैरों को चौड़ा करके आगे झुकने से ग्रोइन और अंदरूनी जांघों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हमारी अंदरूनी जांघों में एडक्टर मांसपेशियों का एक समूह होता है जो ग्रोइन से जुड़ा होता है — लगातार बैठे रहने, गलत पोस्चर या व्यायाम न करने से ये मांसपेशियाँ बहुत टाइट और छोटी हो जाती हैं।

किन्हें होगा सबसे ज़्यादा फ़ायदा

जिन लोगों को चलते, सीढ़ियाँ चढ़ते या ज़मीन पर बैठते वक्त अंदरूनी जांघों में खिंचाव महसूस होता है, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। इसके अलावा रनिंग, साइकिलिंग या जिम करने वाले लोगों के लिए भी यह अभ्यास उपयोगी है, क्योंकि यह निचले शरीर की मांसपेशियों को समुचित खिंचाव और रिकवरी प्रदान करता है।

गौरतलब है कि आधुनिक कार्यशैली में अधिकांश लोग प्रतिदिन 6 से 8 घंटे या उससे अधिक समय बैठकर बिताते हैं, जिससे ये मांसपेशियाँ क्रमशः कमज़ोर और अकड़ी हो जाती हैं। ऐसे में यह आसन एक सरल और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है।

सावधानियाँ और सीमाएँ

इस आसन को करते समय शरीर को जबरदस्ती नीचे न झुकाएँ — शुरुआत में जितना स्वाभाविक रूप से संभव हो, उतना ही झुकें और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएँ। आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द की समस्या हो, तो इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए।

किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहता है, विशेषकर तब जब कोई पूर्व-मौजूद शारीरिक समस्या हो।

आगे क्या

शरीर के लचीलेपन और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ साधने वाले ऐसे योगासनों की माँग आज के कार्यालय-केंद्रित जीवनशैली में तेज़ी से बढ़ रही है। नियमित अभ्यास के साथ इस आसन को दिनचर्या में शामिल करने से दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सरल योगाभ्यासों को दिनचर्या में शामिल करना एक सस्ती और सुलभ निवारक रणनीति हो सकती है। आयुष मंत्रालय की इस अनुशंसा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मस्कुलोस्केलेटल समस्याएँ भारत में कार्यस्थल अनुपस्थिति के प्रमुख कारणों में से एक हैं। हालाँकि, पाठकों को यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि यह आसन चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक अभ्यास है — और गंभीर रीढ़ संबंधी समस्याओं में बिना विशेषज्ञ परामर्श के इसका अभ्यास हानिकारक हो सकता है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन क्या है?
यह एक बैठकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुका जाता है। यह सामान्य पश्चिमोत्तानासन का उन्नत रूप है और हैमस्ट्रिंग, ग्रोइन, अंदरूनी जांघों तथा पीठ की मांसपेशियों को गहरा खिंचाव देता है।
यह आसन किन लोगों के लिए सबसे ज़्यादा फायदेमंद है?
यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो घंटों बैठकर काम करते हैं और जिनकी हैमस्ट्रिंग व अंदरूनी जांघें अकड़ी रहती हैं। इसके अलावा रनिंग, साइकिलिंग या जिम करने वाले लोग भी इससे लाभ उठा सकते हैं।
इस आसन को करते समय क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
शुरुआत में शरीर को जबरदस्ती नीचे न झुकाएँ — जितना स्वाभाविक रूप से संभव हो उतना ही झुकें। स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द होने पर इस आसन से बचना चाहिए।
पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन का नाम कहाँ से आया है?
इसका नाम संस्कृत शब्दों से बना है — 'पाद' (पैर), 'प्रसार' (फैलाना), 'पश्चिम' (शरीर का पिछला भाग), 'उत्तान' (विस्तारित) और 'आसन' (मुद्रा)। इसका सम्मिलित अर्थ है — पैरों को फैलाकर शरीर के पिछले भाग को विस्तारित करने की मुद्रा।
क्या आयुष मंत्रालय ने इस आसन की सिफारिश की है?
हाँ, आयुष मंत्रालय के अनुसार पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन बैठकर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है जो शरीर का लचीलापन बढ़ाता है और मन को शांत कर तनाव कम करने में सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले