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पश्चिमोत्तानासन: पेट की चर्बी घटाए, रीढ़ को लचीला बनाए — आयुष मंत्रालय की सलाह

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पश्चिमोत्तानासन: पेट की चर्बी घटाए, रीढ़ को लचीला बनाए — आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

पश्चिमोत्तानासन सिर्फ एक खिंचाव नहीं — यह हठ योग की नींव है। रीढ़ की लचक से लेकर पेट की चर्बी तक, आयुष मंत्रालय इसे डायबिटीज़ और तनाव में भी उपयोगी मानता है। सुबह खाली पेट इसका अभ्यास सबसे प्रभावी बताया गया है।

मुख्य बातें

पश्चिमोत्तानासन हठ योग की 12 मूल आसनों में शामिल है और शरीर के पिछले हिस्से को गहराई से खींचता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पेट की चर्बी घटाने, रीढ़ को लचीला बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में सहायक है।
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इसे डायबिटीज़ , कब्ज़ और मानसिक तनाव में लाभकारी मानते हैं।
अभ्यास का सबसे उचित समय सुबह खाली पेट है; शाम को भोजन के 4-5 घंटे बाद भी किया जा सकता है।
स्लिप डिस्क , हर्निया या पेट की सर्जरी वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

पश्चिमोत्तानासन — हठ योग की 12 मूल आसनों में से एक — शरीर के पिछले हिस्से को गहराई से खींचकर रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पेट की चर्बी घटाने में सहायक है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह बैठकर आगे झुकने वाला आसन पाचन अंगों को सक्रिय करता है और मानसिक तनाव को कम करने में भी उपयोगी है। प्राचीन योग ग्रंथों में इसे शरीर और मन की शुद्धि के लिए विशेष स्थान दिया गया है।

पश्चिमोत्तानासन का अर्थ और महत्त्व

संस्कृत में 'पश्चिम' का अर्थ है शरीर का पिछला हिस्सा, 'उत्तान' का अर्थ है खिंचाव, और 'आसन' का अर्थ है मुद्रा। इस प्रकार यह आसन पूरी पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों को एक साथ खींचता है। हठ योग परंपरा में इसे शरीर के पिछले हिस्से की सबसे गहरी स्ट्रेचिंग देने वाला आसन माना गया है।

शरीर पर क्या असर पड़ता है

इस आसन में बैठकर आगे की ओर झुकने से रीढ़ की हड्डी, पेट के अंग और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र मज़बूत होता है, पेट की चर्बी कम होती है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, योग परंपरा में यह माना गया है कि इस आसन के अभ्यास से कुंडलिनी ऊर्जा जागृत होने में सहायता मिलती है।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का दृष्टिकोण

आयुर्वेद और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान दोनों इस आसन को डायबिटीज़, कब्ज़ और मानसिक तनाव से राहत दिलाने में उपयोगी मानते हैं। यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ — विशेष रूप से मधुमेह और मोटापा — भारत में तेज़ी से बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय ने योग को निवारक स्वास्थ्य देखभाल के केंद्र में रखा है।

सही समय और तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमोत्तानासन करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह खाली पेट है। यह पूरे दिन शरीर को ऊर्जावान और तनावमुक्त बनाए रखने में मदद करता है। हालाँकि, शाम को भी इसे भोजन के 4-5 घंटे बाद किया जा सकता है। शुरुआती अभ्यासियों को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे सीखने की सलाह दी जाती है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क या हर्निया की समस्या हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। इसी तरह, पेट की सर्जरी या किसी गंभीर चोट की स्थिति में भी इससे परहेज़ करना ज़रूरी है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसका अभ्यास शुरू करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'कुंडलिनी जागरण' जैसे दावों और डायबिटीज़ में लाभ के संदर्भ में स्वतंत्र क्लिनिकल साक्ष्य की माँग बनती है। भारत में योग को निवारक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाना सही दिशा है, पर जब तक प्रत्येक दावे को peer-reviewed शोध से नहीं जोड़ा जाता, जन-स्वास्थ्य संचार अधूरा रहेगा। यह खबर उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली रोगों के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है — जो उचित है, बशर्ते दावे संयमित और साक्ष्य-आधारित हों।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमोत्तानासन क्या है और इसका अर्थ क्या है?
पश्चिमोत्तानासन हठ योग का एक प्रमुख आसन है जिसमें बैठकर आगे की ओर झुका जाता है। संस्कृत में 'पश्चिम' यानी शरीर का पिछला हिस्सा, 'उत्तान' यानी खिंचाव — अर्थात यह आसन पूरी पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों को गहराई से खींचता है।
पश्चिमोत्तानासन से पेट की चर्बी कैसे कम होती है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन में आगे झुकने से पेट के अंगों पर दबाव पड़ता है जिससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है और पेट की चर्बी घटाने में सहायता मिलती है। नियमित अभ्यास से चयापचय (metabolism) में भी सुधार होता है।
पश्चिमोत्तानासन करने का सही समय कौन सा है?
इस आसन को करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह खाली पेट है। शाम को भी भोजन के 4-5 घंटे बाद इसका अभ्यास किया जा सकता है, लेकिन सुबह का अभ्यास अधिक फायदेमंद बताया गया है।
किन लोगों को पश्चिमोत्तानासन नहीं करना चाहिए?
गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क या हर्निया से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। पेट की सर्जरी या किसी गंभीर चोट की स्थिति में भी इससे परहेज़ ज़रूरी है।
क्या पश्चिमोत्तानासन डायबिटीज़ और तनाव में भी फायदेमंद है?
आयुर्वेद और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान दोनों इसे डायबिटीज़, कब्ज़ और मानसिक तनाव से राहत दिलाने में उपयोगी मानते हैं। हालाँकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या में इसे अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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