29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पूर्वोत्तानासन: लैपटॉप पर घंटों बैठने से होने वाली रीढ़ की जकड़न और थकान का योग-समाधान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पूर्वोत्तानासन: लैपटॉप पर घंटों बैठने से होने वाली रीढ़ की जकड़न और थकान का योग-समाधान

सारांश

दिनभर लैपटॉप के सामने बैठने से रीढ़, कूल्हे और गर्दन जकड़ जाते हैं — पूर्वोत्तानासन इस जकड़न का सीधा जवाब है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ में लचीलापन, थायरॉयड ग्रंथि की सक्रियता और लोअर बॉडी की मजबूती एक साथ देता है।

मुख्य बातें

पूर्वोत्तानासन को अपवर्ड प्लैंक पोज़ भी कहते हैं; यह शरीर के अगले हिस्से को गहरा खिंचाव और पिछले हिस्से को मजबूती देता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार इसके नियमित अभ्यास से हाथ, पैर और पीठ की माँसपेशियाँ मजबूत होती हैं और रीढ़ में लचीलापन बना रहता है।
गर्दन पीछे झुकने से थायरॉयड ग्रंथि के आसपास रक्त-प्रवाह बढ़ता है, जिससे ग्रंथि अधिक सक्रिय होती है।
यह आसन हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स और पिंडलियों में खिंचाव लाकर दिनभर बैठने से आई जकड़न दूर करता है।
स्लिप डिस्क या गर्दन की गंभीर चोट में इस आसन से बचें; शुरुआती लोग पहले कलाई का वॉर्म-अप करें।

पूर्वोत्तानासन (Upward Plank Pose) उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी योगासन है जो दिनभर लैपटॉप या डेस्क पर बैठकर काम करते हैं और जिन्हें रीढ़ की जकड़न, थकान व गलत पोस्चर की समस्या रहती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

पूर्वोत्तानासन का अर्थ और पहचान

यह आसन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है — 'पूर्व' (शरीर का अगला हिस्सा या पूर्व दिशा), 'उत्तान' (तीव्र खिंचाव), और 'आसन' (मुद्रा)। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ है 'शरीर के अग्र भाग का तीव्र खिंचाव'।

इसे अंग्रेज़ी में अपवर्ड प्लैंक पोज़ भी कहते हैं। यह आसन आगे की ओर झुकने वाले आसनों — जैसे पश्चिमोत्तानासन — के प्रभाव को संतुलित करने के लिए एक प्रभावी काउंटर-पोज़ के रूप में जाना जाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार मुख्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तानासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बना रहता है और शरीर के अगले हिस्से में गहरा खिंचाव आता है जिससे पीठ की माँसपेशियाँ मजबूत होती हैं। यह आसन थकान को दूर करते हुए पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करता है।

इस आसन का एक उल्लेखनीय लाभ थायरॉयड ग्रंथि पर भी देखा जाता है। इस मुद्रा में गर्दन पीछे की ओर झुकने से थायरॉयड ग्रंथि के आसपास रक्त-प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ग्रंथि तक पहुँचते हैं और वह अधिक सक्रिय व संतुलित तरीके से कार्य करती है।

पैरों और कूल्हों पर असर

इस आसन में एड़ियों को ज़मीन पर दबाकर पैरों को सीधा रखा जाता है। इससे पिंडलियों, जाँघों के अगले और पिछले हिस्सों में तीव्र खिंचाव आता है और माँसपेशियाँ मजबूत होती हैं। दिनभर बैठे रहने से जमी पैरों की जकड़न भी इस अभ्यास से खुलती है।

कूल्हों को ऊपर की ओर उठाने के लिए ग्लूट्स (नितंबों की माँसपेशियाँ) को पूरी तरह सक्रिय करना पड़ता है। इससे हिप जॉइंट्स की अकड़न दूर होती है, कमर के निचले हिस्से को सहारा मिलता है और हिप फ्लेक्सर्स में खिंचाव आता है जो लगातार बैठने से कस जाते हैं। नियमित अभ्यास से पैरों में स्थिरता, कूल्हों में लचीलापन और पूरी लोअर बॉडी में मजबूती महसूस होती है।

सावधानियाँ और शुरुआती सुझाव

यदि आप योग की शुरुआत कर रहे हैं, तो इस आसन से पहले कलाइयों को घुमाकर वॉर्म-अप अवश्य करें, क्योंकि इस मुद्रा में कलाइयों पर शरीर का पूरा भार आता है। गर्दन या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट — जैसे स्लिप डिस्क — होने की स्थिति में सिर को पीछे न झुकाएँ या इस आसन से पूरी तरह बचें।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर और लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने की आदत से पोस्चर-सम्बंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नए आसन की शुरुआत प्रशिक्षित योग-प्रशिक्षक की देखरेख में करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि थायरॉयड जैसी चिकित्सीय स्थितियों में किसी भी योग-अभ्यास से पहले चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है। योग को लाइफस्टाइल-सुधार के रूप में देखना उचित है, चिकित्सा के विकल्प के रूप में नहीं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वोत्तानासन क्या है और इसे कौन कर सकता है?
पूर्वोत्तानासन एक योगासन है जिसे अंग्रेज़ी में अपवर्ड प्लैंक पोज़ कहते हैं। यह शरीर के अगले हिस्से में गहरा खिंचाव और पिछले हिस्से में मजबूती देता है। इसे वे वयस्क कर सकते हैं जिन्हें गर्दन, रीढ़ या कलाई की कोई गंभीर चोट न हो।
लैपटॉप पर काम करने वालों के लिए पूर्वोत्तानासन क्यों फायदेमंद है?
दिनभर बैठे रहने से रीढ़, हिप फ्लेक्सर्स और पिंडलियाँ जकड़ जाती हैं। पूर्वोत्तानासन इन सभी हिस्सों को एक साथ खींचकर और मजबूत करके इस जकड़न को दूर करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन शरीर में ऊर्जा का संचार भी बढ़ाता है।
क्या पूर्वोत्तानासन थायरॉयड की समस्या में मदद करता है?
इस आसन में गर्दन पीछे झुकती है जिससे थायरॉयड ग्रंथि के आसपास रक्त-प्रवाह तेज होता है और ग्रंथि को अधिक ऑक्सीजन व पोषण मिलता है। हालाँकि थायरॉयड की चिकित्सीय स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करें।
पूर्वोत्तानासन करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें?
शुरुआत से पहले कलाइयों का वॉर्म-अप जरूर करें क्योंकि इस मुद्रा में कलाइयों पर पूरे शरीर का भार आता है। स्लिप डिस्क या गर्दन की गंभीर चोट होने पर इस आसन से बचें या सिर को पीछे न झुकाएँ।
पूर्वोत्तानासन और पश्चिमोत्तानासन में क्या अंतर है?
पश्चिमोत्तानासन में आगे की ओर झुककर शरीर के पिछले हिस्से में खिंचाव आता है, जबकि पूर्वोत्तानासन में शरीर को ऊपर उठाकर अगले हिस्से में खिंचाव दिया जाता है। इसीलिए पूर्वोत्तानासन को पश्चिमोत्तानासन का काउंटर-पोज़ माना जाता है जो दोनों के बीच संतुलन बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले