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पूर्वोत्तानासन रोज़ 5 मिनट: कमर-कंधे होंगे मज़बूत, तनाव और पीठ दर्द से मिलेगी राहत

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पूर्वोत्तानासन रोज़ 5 मिनट: कमर-कंधे होंगे मज़बूत, तनाव और पीठ दर्द से मिलेगी राहत

सारांश

रोज़ाना सिर्फ 5 मिनट का पूर्वोत्तानासन कमर, कंधे, पीठ और जाँघों को एक साथ मज़बूत बनाता है। आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित यह आसन तनाव घटाने, रीढ़ में लचीलापन लाने और पेट की चर्बी कम करने में प्रभावी है।

मुख्य बातें

पूर्वोत्तानासन शरीर के अगले हिस्से को खींचते हुए बाजुओं, कंधों, कमर और पैरों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।
आयुष मंत्रालय ने इसे एक महत्वपूर्ण योगासन के रूप में मान्यता दी है।
नियमित अभ्यास से पीठ दर्द, कमर दर्द और सिरदर्द में राहत मिलती है तथा तनाव कम होता है।
पेट की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और पेट के आसपास की अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है।
कलाई या गर्दन में चोट वाले व्यक्तियों को इस आसन से बचना चाहिए या विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।

पूर्वोत्तानासन एक प्रभावशाली योगासन है जो शरीर के अगले हिस्से को गहराई से खींचते हुए बाजुओं, कंधों, कमर और पैरों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है। आयुष मंत्रालय ने इसे एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास के रूप में मान्यता दी है। नियमित अभ्यास से यह आसन तनाव कम करने, रीढ़ में लचीलापन लाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक है।

पूर्वोत्तानासन का अर्थ और महत्व

इस आसन का नाम दो संस्कृत शब्दों से बना है — 'पूर्व' अर्थात 'शरीर का अगला भाग' और 'उत्तान' यानी 'खिंचा हुआ'। इस प्रकार पूर्वोत्तानासन का शाब्दिक अर्थ है शरीर के अगले हिस्से को पूरी तरह तानना। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर संतुलित करके हाथ, कलाई, पीठ, जाँघ और कंधों की मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है।

शरीर पर मुख्य प्रभाव

इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे पेट के आसपास जमी अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा का संचार बेहतर होता है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से भी यह आसन मांसपेशियों में लचीलापन लाता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है। ब्लड सर्कुलेशन में सुधार के कारण सिरदर्द में भी उल्लेखनीय राहत मिलती है।

पीठ दर्द और तनाव में राहत

रोज़ाना इस आसन का अभ्यास करने से पीठ दर्द और कमर दर्द में राहत मिलती है क्योंकि पीठ की मांसपेशियाँ सक्रिय और मज़बूत होती हैं। इसके अतिरिक्त, यह मानसिक तनाव को कम करने में भी प्रभावी माना जाता है — शरीर में ऊर्जा के बेहतर प्रवाह से मन शांत होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

इस आसन में शरीर का अधिकांश भार हाथों और कलाइयों पर टिकता है, इसलिए कलाई में चोट से पीड़ित व्यक्तियों को इसे करने से बचना चाहिए। गर्दन की चोट वाले लोगों को या तो इस आसन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, या किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में कुर्सी के सहारे इसका अभ्यास करना चाहिए।

अभ्यास की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन केवल 5 मिनट के इस आसन के अभ्यास से दीर्घकालिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में इसे सीखना उचित रहता है, ताकि सही मुद्रा सुनिश्चित हो और चोट का जोखिम न रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश योग-स्वास्थ्य दावे अभी भी बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों की कमी से जूझते हैं। 'रोज़ 5 मिनट में फायदा' जैसे सरलीकृत संदेश आम पाठक को आकर्षित करते हैं, परंतु व्यक्तिगत शारीरिक स्थिति — विशेषकर कलाई, गर्दन या पीठ की पुरानी समस्याओं — को नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है। स्वास्थ्य पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी है कि वह लाभ के साथ-साथ सावधानियों को भी समान महत्व दे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वोत्तानासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
पूर्वोत्तानासन एक योगासन है जिसमें शरीर के अगले हिस्से को पूरी तरह ऊपर की ओर तानते हुए हाथों और पैरों पर शरीर का भार संतुलित किया जाता है। इसका नाम संस्कृत के 'पूर्व' (शरीर का अगला भाग) और 'उत्तान' (खिंचा हुआ) से बना है।
पूर्वोत्तानासन के क्या फायदे हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन हाथ, कलाई, पीठ, जाँघ और कंधों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है। इसके अतिरिक्त, यह पीठ दर्द, कमर दर्द और सिरदर्द में राहत देता है, पेट की चर्बी कम करता है और तनाव घटाने में सहायक है।
पूर्वोत्तानासन कितनी देर करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन केवल 5 मिनट का नियमित अभ्यास दीर्घकालिक लाभ दे सकता है। शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में इसे सीखना उचित रहता है।
पूर्वोत्तानासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
कलाई में चोट से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें शरीर का भार कलाइयों पर पड़ता है। गर्दन की चोट वाले व्यक्तियों को भी इससे बचना चाहिए या विशेषज्ञ की देखरेख में कुर्सी के सहारे अभ्यास करना चाहिए।
क्या पूर्वोत्तानासन से पेट की चर्बी कम होती है?
हाँ, इस आसन के अभ्यास से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे पेट के आसपास जमी अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है। हालाँकि बेहतर परिणामों के लिए इसे संतुलित आहार के साथ करना उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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