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योगमुद्रासन: तनाव, कब्ज और पीठ दर्द से राहत दिलाने वाला शक्तिशाली योगासन

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योगमुद्रासन: तनाव, कब्ज और पीठ दर्द से राहत दिलाने वाला शक्तिशाली योगासन

सारांश

व्यस्त जीवनशैली में तनाव, कब्ज और पीठ दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए योगमुद्रासन एक समग्र समाधान है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह आसन मणिपुर चक्र को जागृत करता है, पाचन सुधारता है और शरीर-मन में गहरा सामंजस्य स्थापित करता है।

मुख्य बातें

योगमुद्रासन 'साइकिक यूनियन पोज़' के नाम से भी जाना जाता है, जो शरीर और मन को एकसूत्र में जोड़ता है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह आसन पाचन सुधारने, पेट के अंगों को सक्रिय करने और मन को शांत करने में सहायक है।
यह मणिपुर चक्र को उत्तेजित करता है, जिससे शरीर में प्राणिक ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है।
पेल्विक मसल्स मज़बूत होने से महिलाओं में प्रजनन अंगों से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
दीर्घकालिक अभ्यास से एकाग्रता, स्थिरता और आंतरिक शांति में वृद्धि होती है।
प्रारंभ में प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में इस आसन को सीखना उचित है।

योगमुद्रासन आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने का एक प्रभावशाली योगिक उपाय है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह आसन पाचन तंत्र को सक्रिय करने, मानसिक शांति स्थापित करने और शरीर की प्राणिक ऊर्जा को नियंत्रित करने में सहायक है। नियमित अभ्यास से तनाव, कब्ज और पीठ दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है।

योगमुद्रासन क्या है

योगमुद्रासन दो संस्कृत शब्दों — 'योग' (जोड़ना) और 'मुद्रा' (प्रतीक) — से मिलकर बना है। अंग्रेजी में इसे 'साइकिक यूनियन पोज़' कहते हैं, जिसका अर्थ है 'मानस को जोड़ना'। यह आसन शरीर और मन के बीच की दूरी को मिटाकर आंतरिक सामंजस्य स्थापित करता है।

इस आसन के अभ्यास के दौरान साधक ध्यान, समर्पण और आंतरिक शांति की अवस्था में प्रवेश करता है — जो इसे केवल शारीरिक व्यायाम से कहीं अधिक गहरा अनुभव बनाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार प्रमुख लाभ

आयुष मंत्रालय द्वारा जारी योगासन दिशा-निर्देशों के अनुसार, योगमुद्रासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

यह आसन पेट के अंगों को सक्रिय करता है और पाचन क्रिया में सुधार लाता है। पेल्विक मसल्स को मज़बूत बनाने के कारण यह महिलाओं में प्रजनन अंगों से संबंधित समस्याओं को कम करने में भी सहायक माना जाता है। दीर्घकालिक अभ्यास से शरीर और मस्तिष्क में स्थिरता तथा एकाग्रता बढ़ती है।

यह आसन विशेष रूप से मणिपुर चक्र — मानव शरीर के सात मुख्य ऊर्जा केंद्रों में तीसरा, जो आत्मविश्वास, पाचन और अग्नि तत्व से संबंधित है — को सक्रिय और उत्तेजित करता है, जिससे शरीर में प्राणिक ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है।

योगमुद्रासन करने की विधि

इस आसन को करने की प्रक्रिया सरल है, परंतु प्रारंभ में किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में इसे सीखना उचित रहता है:

पहला चरण: सबसे पहले पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं।
दूसरा चरण: दोनों हाथों की कलाइयों को पीठ के पीछे ले जाकर पकड़ें, अथवा पैरों के अंगूठे को पकड़ें।
तीसरा चरण: लंबी और गहरी सांस लेते-छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें।
चौथा चरण: माथे को भूमि से स्पर्श कराने का प्रयास करें और शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दें।
पाँचवाँ चरण: सामान्य गति से सांस लेते हुए कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें, फिर सांस भरते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं।

किसे ध्यान रखना चाहिए

रीढ़ की हड्डी और पैरों सहित शरीर के अधिकांश अंग इस आसन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह समग्र स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में गतिहीन जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। कुछ सप्ताह के नियमित अभ्यास के बाद यह आसन सहज हो जाता है। गर्भवती महिलाओं, घुटने या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले व्यक्तियों को इसे अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

योगमुद्रासन का निरंतर अभ्यास न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मानसिक स्थिरता और आत्मिक शांति की ओर भी एक ठोस कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन दावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नैदानिक शोध अभी भी सीमित है। भारत में योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में प्रयास सराहनीय हैं, परंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि किन स्वास्थ्य स्थितियों में यह आसन वर्जित हो सकता है। गतिहीन शहरी जीवनशैली की बढ़ती चुनौतियों के बीच ऐसे सुलभ योगाभ्यासों का प्रसार ज़रूरी है, बशर्ते इसके साथ व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श की सलाह भी दी जाए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगमुद्रासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
योगमुद्रासन एक योगिक आसन है जो शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह पाचन सुधारने, तनाव कम करने और प्राणिक ऊर्जा को संतुलित करने में सहायक है — जो इसे आज की व्यस्त जीवनशैली के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनाता है।
योगमुद्रासन करने की सही विधि क्या है?
पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों की कलाइयाँ पीठ के पीछे पकड़ें या पैरों के अंगूठे पकड़ें। गहरी सांस लेते-छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे झुकें और माथे को ज़मीन से स्पर्श कराएं। कुछ सेकंड रुककर सांस भरते हुए वापस प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
योगमुद्रासन से कौन-कौन सी समस्याओं में राहत मिलती है?
यह आसन तनाव, कब्ज और पीठ दर्द में राहत देने के साथ पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। पेल्विक मसल्स मज़बूत होने से महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याएं भी कम हो सकती हैं।
मणिपुर चक्र और योगमुद्रासन का क्या संबंध है?
मणिपुर चक्र मानव शरीर का तीसरा ऊर्जा केंद्र है, जो आत्मविश्वास, पाचन और अग्नि तत्व से जुड़ा है। योगमुद्रासन इस चक्र को सक्रिय और उत्तेजित करता है, जिससे शरीर में प्राणिक ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रित होता है।
क्या योगमुद्रासन सभी के लिए सुरक्षित है?
अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों के लिए यह आसन सुरक्षित है, परंतु प्रारंभ में प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लेना उचित है। गर्भवती महिलाओं, रीढ़ या घुटनों की गंभीर समस्या वाले व्यक्तियों को इसे अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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