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मयूरासन से दूर होंगी पेट की बीमारियां, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सावधानियां

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मयूरासन से दूर होंगी पेट की बीमारियां, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सावधानियां

सारांश

आयुष मंत्रालय के अनुसार मयूरासन — मोर मुद्रा — पेट के अंगों को सक्रिय कर पाचन शक्ति बढ़ाता है, शरीर को डिटॉक्स करता है और नाभि चक्र को जागृत कर आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और उच्च रक्तचाप, हर्निया या अल्सर के मरीजों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

मुख्य बातें

मयूरासन (मोर मुद्रा) एक उन्नत संतुलन-आधारित योग आसन है जिसमें शरीर का पूरा भार हथेलियों पर टिका होता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन पाचन शक्ति बढ़ाने, शरीर को डिटॉक्स करने और रक्त संचार बेहतर बनाने में सहायक है।
यह नाभि चक्र (मणिपुर चक्र) को जागृत कर आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को यह आसन योग विशेषज्ञ की देखरेख में करने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं तथा उच्च रक्तचाप, हर्निया या अल्सर से पीड़ित लोगों को यह आसन वर्जित है।

मयूरासन (Mayurasana) — जिसे 'मोर मुद्रा' भी कहा जाता है — आधुनिक जीवनशैली में पेट की बीमारियों, धीमे मेटाबॉलिज्म और मानसिक अस्थिरता से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावशाली योगाभ्यास माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह एक उन्नत संतुलन-आधारित योग मुद्रा है जिसमें शरीर का पूरा भार हथेलियों पर टिका होता है और पाचन तंत्र को सीधा लाभ मिलता है।

मयूरासन क्या है और इसका अर्थ

संस्कृत में 'मयूर' का अर्थ मोर और 'आसन' का अर्थ मुद्रा होता है। इस आसन में शरीर की स्थिति मोर के समान दिखती है — धड़ और पैर जमीन से ऊपर उठे हुए, संतुलन केवल दोनों हथेलियों पर। योग परंपरा में यह आसन नाभि चक्र (मणिपुर चक्र) को जागृत करने वाला माना जाता है, जिससे आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

स्वास्थ्य लाभ: पाचन से लेकर डिटॉक्स तक

आयुष मंत्रालय के अनुसार, मयूरासन पेट के अंगों को सक्रिय कर पाचन शक्ति बढ़ाने में अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता मिलती है।

इसके अतिरिक्त, यह कलाई, कंधे, पैर और समग्र शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है। रोज़ाना अभ्यास से शरीर का संतुलन सुधरता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक स्थिरता मजबूत होती है। फेफड़ों के लिए भी यह लाभदायक माना जाता है।

मयूरासन करने की सही विधि

इस आसन को सीखने के लिए निम्न चरणों का पालन करें:

सबसे पहले वज्रासन में बैठें। दोनों हथेलियों को जमीन पर रखें और उंगलियों को पीछे की दिशा में मोड़ें। कोहनियों को हल्का मोड़ते हुए पेट के पास लाएं। अब धीरे-धीरे शरीर का भार हथेलियों पर डालते हुए पैरों को पीछे की ओर सीधा करें और सिर को आगे की दिशा में रखें। शुरुआत में इस मुद्रा को कुछ सेकंड तक बनाए रखें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए यह आसन कठिन हो सकता है, इसलिए इसे योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना उचित रहता है।

किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन

गर्भवती महिलाओं को यह आसन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), हर्निया या अल्सर से पीड़ित व्यक्तियों को भी मयूरासन से परहेज करना चाहिए। किसी भी पुरानी शारीरिक समस्या की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

योग विशेषज्ञों के अनुसार, मयूरासन उन योग मुद्राओं में से एक है जो एक साथ शारीरिक शक्ति, पाचन तंत्र और मानसिक ऊर्जा पर काम करती है। यह आसन आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न तनाव और पाचन संबंधी विकारों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। नियमित और सही तरीके से किया गया यह अभ्यास दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के व्यावहारिक उपकरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। हालांकि, इस आसन के दावों को अभी तक बड़े नैदानिक परीक्षणों से पूरी तरह सत्यापित नहीं किया गया है — जो एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। आधुनिक शहरी जीवनशैली में पाचन विकार और मानसिक तनाव की बढ़ती दर को देखते हुए, योग-आधारित हस्तक्षेप की प्रासंगिकता बढ़ी है — लेकिन इसके साथ-साथ चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता को भी उतनी ही स्पष्टता से रेखांकित किया जाना चाहिए।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मयूरासन क्या है और इसे मोर मुद्रा क्यों कहते हैं?
मयूरासन एक उन्नत योग मुद्रा है जिसमें शरीर का पूरा भार हथेलियों पर संतुलित किया जाता है और धड़ व पैर जमीन से ऊपर उठे रहते हैं — ठीक मोर के समान। संस्कृत में 'मयूर' का अर्थ मोर होने के कारण इसे मोर मुद्रा कहा जाता है।
मयूरासन से पेट की बीमारियों में कैसे फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मयूरासन पेट के अंगों पर दबाव डालकर उन्हें सक्रिय करता है, जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। रक्त संचार बेहतर होने से पाचन तंत्र की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
मयूरासन करने की सही विधि क्या है?
पहले वज्रासन में बैठें, हथेलियों को जमीन पर उंगलियां पीछे की ओर करके रखें, कोहनियों को पेट के पास लाएं और धीरे-धीरे शरीर का भार हथेलियों पर डालते हुए पैर पीछे की ओर सीधे करें। शुरुआत में कुछ सेकंड से शुरू करें और योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करें।
मयूरासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं और उच्च रक्तचाप, हर्निया या अल्सर से पीड़ित व्यक्तियों को मयूरासन नहीं करना चाहिए। किसी भी पुरानी शारीरिक समस्या की स्थिति में इस आसन को शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
मयूरासन से मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
मयूरासन नाभि चक्र (मणिपुर चक्र) को जागृत करता है, जिससे आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता और मानसिक स्थिरता में भी सुधार माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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