27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गर्भासन: पाचन तंत्र को मजबूत करने और मानसिक तनाव को कम करने का अद्भुत उपाय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गर्भासन: पाचन तंत्र को मजबूत करने और मानसिक तनाव को कम करने का अद्भुत उपाय

सारांश

गर्भासन एक प्रभावशाली योग मुद्रा है, जो न केवल पाचन स्वास्थ्य में सुधार करती है, बल्कि तनाव को भी कम करती है। इसे नियमित रूप से करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण लाभ हो सकते हैं। जानें इसके लाभ और सही तरीके से करने की विधि।

मुख्य बातें

गर्भासन पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
यह मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।
इससे शरीर की लचीलापन बढ़ती है।
यह आसन आसानी से किया जा सकता है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में इसे नहीं करना चाहिए।

नई दिल्ली, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योग भारतीय संस्कृति की एक अनमोल धरोहर है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक प्राचीन साधन है। इसमें से एक प्रमुख आसन है गर्भासन, जिसे एक उन्नत और प्रभावशाली मुद्रा माना जाता है। यह हठयोग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जिसमें शरीर भ्रूण (गर्भाशय में शिशु) की आकृति का निर्माण करता है।

यह आसन संतुलन, मानसिक शांति और पाचन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह मुख्यतः पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है, पाचन क्रिया में सुधार लाता है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है।

हठयोग प्रदीपिका में 15 प्रमुख आसनों का वर्णन किया गया है। यह अक्सर प्रारंभिक आसनों के समूह के बाद आता है, जैसे कि उत्तान-कूर्म या अन्य बंधनों के अंतर्गत। इस आसन में पद्मासन लगाकर हाथों को जंघाओं और पिंडलियों के बीच से निकालकर कान तक लाया जाता है।

गर्भासन शब्द 'गर्भ' और 'आसन' से मिलकर बना है। गर्भ का अर्थ है 'भ्रूण' और आसन का अर्थ है 'मुद्रा'। इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति ठीक वैसी होती है, जैसे मां के गर्भ में शिशु कुंडलित अवस्था में होता है, इस कारण इसे गर्भासन कहा जाता है। इसे रोजाना कुछ मिनट करने से कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

आयुष मंत्रालय ने इस आसन के महत्व पर जोर दिया है। उनके अनुसार, गर्भासन एक उन्नत योग मुद्रा है जो मन को शांत करने, तनाव कम करने, पाचन में सुधार करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए अत्यधिक लाभकारी है। यह शरीर की लचीलापन को बढ़ाता है, जोड़ों को मजबूत करता है और पीठ के निचले हिस्से में आराम प्रदान करता है।

इसे करना बेहद सरल है। सबसे पहले योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठें। फिर कुक्कुटासन की तरह अपने हाथों को जांघों और पिंडलियों के बीच में फंसाकर कोहनियों तक बाहर निकालें। अब दोनों कोहनियों को मोड़कर हाथों से दोनों कान पकड़ने की कोशिश करें। इस दौरान शरीर का पूरा भार कूल्हों पर होना चाहिए। सामान्य रूप से सांस लेते रहें और अपनी क्षमतानुसार इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में लौटें।

हालांकि, गंभीर पीठ दर्द, घुटने/कूल्हे की चोट या हर्निया की स्थिति में इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता में वृद्धि और तनाव में कमी आती है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो मानसिक दबाव में रहते हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भासन के क्या लाभ हैं?
गर्भासन पाचन में सुधार करता है, मानसिक तनाव को कम करता है, और शरीर की लचीलापन को बढ़ाता है।
गर्भासन करने का सही तरीका क्या है?
पद्मासन में बैठकर हाथों को जांघों के बीच से निकालकर कानों तक लाना चाहिए।
क्या गर्भासन सभी के लिए सुरक्षित है?
गंभीर पीठ दर्द, घुटने की चोट या हर्निया की स्थिति में गर्भासन नहीं करना चाहिए।
गर्भासन कितनी बार करना चाहिए?
इसे रोजाना कुछ मिनट तक करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
गर्भासन का नाम क्यों रखा गया है?
इसका नाम भ्रूण की आकृति के समान मुद्रा के कारण रखा गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले