रोजाना गर्भासन करें: पाचन तंत्र को मजबूत और तनाव को दूर करने का अद्भुत उपाय
सारांश
Key Takeaways
- गर्भासन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
- यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
- तनाव कम करने में मदद करता है।
- इसे नियमित रूप से करने से लाभ मिलते हैं।
- गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में इसे करने से बचें।
नई दिल्ली, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय संस्कृति में योग एक अनमोल धरोहर है, जो शरीर और मन को स्वस्थ रखने का प्राचीन साधन है। योग के कई आसनों में से एक आसन है गर्भासन, जिसे एक उन्नत और प्रभावशाली मुद्रा माना जाता है। यह हठयोग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जिसमें शरीर भ्रूण (गर्भ में शिशु) के समान आकृति बनाता है।
गर्भासन संतुलन, मानसिक शांति और पेट के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह मुख्य रूप से पेट की मांसपेशियों को सशक्त करता है, पाचन में सुधार लाता है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है।
हठयोग प्रदीपिका में 15 प्रमुख आसनों का उल्लेख किया गया है। यह अक्सर प्रारंभिक आसनों के बाद, उत्तान-कूर्म या अन्य बंधनों के अंतर्गत आता है। इसमें पद्मासन में बैठकर हाथों को जंघाओं और पिंडलियों के बीच से निकालकर कान तक लाया जाता है।
गर्भासन 'गर्भ' और 'आसन' शब्दों का संयोजन है। गर्भ का अर्थ 'भ्रूण' और आसन का अर्थ 'मुद्रा' है। इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति ठीक वैसी होती है, जैसे मां के गर्भ में शिशु कुंडलित अवस्था में रहता है, इसलिए इसे गर्भासन कहा जाता है। इसे रोजाना कुछ मिनट करने से अनेक प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
आयुष मंत्रालय ने इस आसन के महत्व को रेखांकित किया है। उनके अनुसार, गर्भासन एक उन्नत योग मुद्रा है, जो मन को शांत करने, तनाव कम करने, पाचन में सुधार करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है। यह आसन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है, जोड़ों को मजबूत करता है और पीठ के निचले हिस्से में आराम प्रदान करता है।
इसे करना बेहद सरल है। सबसे पहले, योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठें। फिर कुक्कुटासन की तरह अपने हाथों को जांघों और पिंडलियों के बीच में पकड़ें। अब दोनों कोहनियों को मोड़ते हुए हाथों से कान पकड़ने का प्रयास करें। इस दौरान शरीर का पूरा भार कूल्हों पर होना चाहिए। सामान्य रूप से सांस लेते रहें और अपनी क्षमता के अनुसार इस स्थिति में रहें।
गंभीर पीठ दर्द, घुटने/कूल्हे की चोट या हर्निया जैसी स्थितियों में यह आसन नहीं करना चाहिए।